हरियाणा: सत्ताधारी बीजेपी की चुनावी हुंकार, विपक्षी कांग्रेस में बस तकरार ही तकरार...

हरियाणा कांग्रेस में अंतर्कलह खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही है, जबकि सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) चुनावी बिगुल फूंक चुकी है.

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हरियाणा के कांग्रेस प्रभारी गुलाम नबी आजाद (फाइल फोटो-IANS) हरियाणा के कांग्रेस प्रभारी गुलाम नबी आजाद (फाइल फोटो-IANS)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 08 सितंबर 2019,
  • अपडेटेड 2:34 PM IST

  • हरियाणा कांग्रेस के प्रमुख रहे अशोक तंवर और विधायक दल की पूर्व नेता किरण चौधरी नाराज
  • बीजेपी फूंक चुकी है चुनावी बिगुल जबकि कांग्रेस आतंरिक मामलों को सुलझाने में उलझी हुई है

विधानसभा चुनाव सिर पर है, लेकिन हरियाणा कांग्रेस में अंतर्कलह खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही है, जबकि सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) चुनावी बिगुल फूंक चुकी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को रोहतक में रैली कर चुनाव अभियान का आगाज किया. वहीं हरियाणा कांग्रेस में शनिवार को मतभेद उस समय उभरकर सामने आ गए जब वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद के नेतृत्व में आयोजित बैठक से राज्य के दो सीनियर नेता नदारद रहे.   

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पूर्व केंद्रीय मंत्री कुमारी शैलजा और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के क्रमशः प्रदेश अध्यक्ष और राज्य चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष के रूप में कार्यभार संभालने के लिए आयोजित कार्यक्रम में हरियाणा कांग्रेस के प्रमुख रहे अशोक तंवर और विधायक दल की पूर्व नेता किरण चौधरी नहीं पहुंचीं. इन नेताओं के कार्यक्रम में नहीं पहुंचने की वजह से गुलाब नबी आजाद के लिए असमंजस वाली स्थिति पैदा हो गई और सफाई देते नजर आए.

न्यूज एजेंसी पीटीआई के अनुसार अशोक तंवर और किरण चौधरी की गैर मौजूदगी के बारे में पूछे जाने पर गुलाम नबी आजाद ने कहा कि हरियाणा में कोई गुटबाजी नहीं चल रही है. कुछ दूसरी वजहों से दोनों नेता कार्यक्रम में शरीक नहीं हो सके. लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि दोनों नेताओं को कार्यक्रम में शामिल होना चाहिए था.

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गुलाम नबी आजाद ने पत्रकारों से कहा, 'संगठन में बदलाव निरंतर चलने वाली एक प्रक्रिया है. संगठन में फेरबदल लगा रहता है. कोई भी शख्स एक ही पद पर जीवन भर नहीं रह सकता है.'

बता दें कि अक्टूबर में हरियाणा में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित है. लेकिन उससे पहले ही अशोक तंवर और किरण चौधरी को हटाए जाने से उनके समर्थकों में निराशा का भाव है. समर्थकों ने कांग्रेस आलाकमान के फैसले पर निराशा जाहिर की है. हालांकि गुलाम नबी आजाद ने अशोक तंवर और किरण चौधरी के योगदान की सराहना की है.

आजाद ने कहा कि पार्टी ने महसूस किया कि जिम्मेदारी उन लोगों को दी जानी चाहिए जिन्हें प्रशासन और संगठन में लंबा अनुभव है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि पूर्व सीएलपी नेता या पूर्व प्रदेश अध्यक्ष कमजोर नेता थे.

हरियाणा के प्रभारी आजाद ने कहा, 'उनके नेतृत्व (अशोक तंवर) में, एक या दो चुनाव पहले ही लड़े जा चुके थे. पार्टी को लगा कि तीसरे चुनाव के लिए एक नई टीम होनी चाहिए.' इससे पहले सभा को संबोधित करते हुए आजाद ने कहा, “जब भी पार्टी में कोई संगठनात्मक परिवर्तन होता है, तो इसका स्वागत किया जाना चाहिए. किसी को इसके बारे में बुरा नहीं मानना चाहिए और न ही निराश होना चाहिए.”

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आजाद ने कहा कि उनका विचार है कि हर दो-तीन साल में पदाधिकारियों में बदलाव होना चाहिए. बाद में मीडिया से आजाद ने कहा कि नए प्रदेश अध्यक्ष और कांग्रेस की राज्य चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष की घोषणा के बाद हरियाणा में समाज के हर वर्ग के बीच एक नई उम्मीद पैदा हुई है.

इससे साफ है कि हरियाणा में कांग्रेस की मुश्किलें खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं. अशोक तंवर को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद से हटाए जाने से उनके समर्थक नाराज हैं. उनका कहना है कि अशोक तंवर को हटाने का फैसला पार्टी आलाकमान ने दबाव में लिया है. नाराज कार्यकर्ताओं ने गुलाम नबी आजाद पर भी आरोप लगाया. हालांकि, इस पूरे मामले में पर अशोक तंवर ने कोई प्रतिक्रिया देने से इनकार किया. कांग्रेस हाईकमान ने अशोक तंवर से हाथों से प्रदेश अध्यक्ष की कमान लेकर पूर्व केंद्रीय मंत्री कुमारी शैलजा को सौंपी है.

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