कोरोना संकट काल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों को आपदा को अवसर में बदलने का मंत्र दिया था. पीएम मोदी के इस मंत्र को बहुत से लोगों ने फॉलो भी किया. दिल्ली के चितरंजन पार्क में रहने वालीं कुछ महिलाएं ने भी इसको अमल में लाया है.
महिलाओं ने सोशल मीडिया को हथियार बनाकर ना केवल एक बड़ा स्टार्टअप खड़ा कर लिया, बल्कि कोरोना काल में उनके बनाए फेवरट फूड और डिसेज की बहुत डिमांड भी है. सिर्फ दिल्ली ही नहीं गुरुग्राम, फरीदाबाद, नोएडा और सोनीपत तक फूड डिलीवरी पहुंच रही है.
बंगाली फूड और फेवरिट डिश की ऑनलाइन डिलीवरी
दिल्ली के चितरंजन पार्क को मिनी बंगाल भी कहा जाता है. कोरोना में पूजा पंडाल नहीं लगे तो स्पेशल बंगाली खाने को लोग मिस ना करें, इसके लिए बंगाली समुदाय से ताल्लुक रखने वालीं कुछ महिलाओं ने घर से ही बंगाली फूड और फेवरिट डिश की ऑनलाइन डिलीवरी शुरू कर दी.
चितरंजन पार्क की संहिता सेनगुप्ता पेशे से वकील हैं. लॉकडाउन से अनलॉक तक सिर्फ 2 बार ही घर से बाहर निकलीं, लेकिन तनाव या अवसाद हावी ना हो इसके लिए खाना बनाने के पैशन को जिंदा कर दिया.
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संहिता कहती हैं कि बंगालियों को नॉन-वेज खाने के लिए जाना जाता है, लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि सप्तमी, अष्टमी, नवमी और दशमी को 'बंगाली सात्विक खाने की' ऑनलाइन डिलीवरी वेटिंग में है. सोशल मीडिया पर अलग-अलग वैरायटी के मेन्यू पोस्ट करते ही वेटिंग में ऑर्डर चले जाते हैं.
(फोटो-संहिता)
वहीं, अंतारा डेनियल कहती हैं कि साल की शुरूआत में लॉकडाइन लग गया. फिर हमने कोलकाता स्टाइल होम मेड खाना अपनी मां के साथ मिलकर बनाना शुरू किया. लोगों ने ना केवल इसे सराहा बल्कि हाथों हाथ लिया. वो कहती हैं कि अब तो टाइम ही नहीं है.
अंतारा का दावा है कि नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत ने उनके एफबी पेज को भी लाइक किया है. फेसबुक पर रिव्यूज बहुत अच्छे हैं. अब तो सोनीपत तक से ऑर्डर आता है.
फोटो- मृणालिनी
सीआरपार्क की ही मृणालिनी मजूमदार ने बंगाली डिसेज बनाने के अपने शौक को कोरोना काल में विकसित किया और अब त्योहारी सीजन में बंगाली भोग और भोजन की ऑनलाइन डिलीवरी कर रहीं हैं.
राम किंकर सिंह