कोर्ट में दाखिल याचिका में यह भी कहा गया है कि ऑनलाइन चल रहीं ये पैथोलॉजी लैब्स को न तो आईसीएमआर से और न ही एनएबीएल (National Accreditation Board for Testing & Calibration Laboratories) से अप्रूवल हासिल है. इस तरह से ऑनलाइन चल रहे ये लैब अवैध हैं.
जनहित याचिका में यह भी कहा गया है कि अथॉरिटीज की स्वीकृति के बिना ये ऑनलाइन पैथोलॉजी लैब्स शहर में लोगों के ब्लड सैंपल ले रही हैं जिससे आम लोगों का जीवन खतरे में है. इसके अलावा जो लोग ब्लड सैंपल लेने जाते हैं उनके पास एजुकेशन या किसी तरह की आवश्यक डिग्री भी नहीं होती है.
एक डॉक्टर की ओर से लगाई गई इस याचिका में कोर्ट से इस मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत सुनवाई करने की अपील की गई है. याचिकाकर्ता ने अपनी अर्जी में बताया है कि ऑनलाइन चलने वाले ये पैथोलॉजी लैब्स बॉयो मेडिकल वेस्ट के निपटारे के भी पर्याप्त इंतजाम नहीं रखती हैं जो बेहद घातक है.
कोरोना काल में और ज्यादा खतरनाक
बॉयोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स 2016 के मुताबिक पैथोलॉजिकल लैब्स को राज्य के पल्यूशन कंट्रोल बोर्ड या पल्यूशन कंट्रोल कमेटी के द्वारा रजिस्टर्ड होना भी जरूरी है जो ऑनलाइन चल रही पैथोलॉजिकल लैब्स के पास नहीं है.
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याचिका में खासतौर से इस बात पर जोर दिया गया है कि ऑनलाइन चल रहीं ये पैथोलॉजी लैब्स इंफेक्शन को और बढ़ाने में सहायक हैं और कोविड-19 के दौर में इसके परिणाम बेहद घातक साबित हो सकते हैं. याचिका में यह भी कहा गया है कि बॉयोमेडिकल वेस्ट को यह पैथोलॉजिकल लैब खुले में ही फेंक रही हैं, जो आसपास रह रहे लोगों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है.
आरटीआई से भी नहीं मिली जानकारी
कोर्ट में दाखिल याचिका में कहा गया है कि इस याचिका को लगाने से पहले आईसीएमआर और स्वास्थ्य मंत्रालय में एक आरटीआई भी लगाई गई थी, जिसमें ऑनलाइन चल रही पैथ लैब्स को लेकर जानकारी मांगी गई थी, लेकिन इस बारे में भी काफी वक्त बीतने के बाद आरटीआई का कोई जवाब याचिकाकर्ता को अभी तक नहीं मिल सका है.
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ऑनलाइन पैथोलॉजी लैब्स को लेकर याचिकाकर्ता के द्वारा आईसीएमआर को शिकायत भी भेजी गई, लेकिन उस पर भी क्या कार्रवाई हुई यह साफ नहीं हुआ जिसके बाद याचिकाकर्ता को कोर्ट में आना पड़ा जिससे ऑनलाइन पैथोलॉजिकल लैब से आम लोगों को लगातार हो रहे खतरे को रोका जा सके.
पूनम शर्मा