दिल्ली: HC ने 300 साल पुराने बरगद के पास खड़ी दीवारों को तोड़ने का दिया आदेश

कोर्ट ने गुरुवार की सुनवाई में एजेंसी को तुरंत पेड़ के आसपास खड़ी दीवारों को तोड़ने के आदेश दिए हैं. कोर्ट ने साफ कर दिया है कि इस पेड़ को किसी भी हाल में संरक्षित करना है और इसके लिए सभी कोशिशों को जल्द से जल्द अंजाम दिया जाए.

दिल्ली हाई कोर्ट में पेड़ को बचाने के लिए दायर की याचिका
पूनम शर्मा
  • नई दिल्ली,
  • 14 अगस्त 2020,
  • अपडेटेड 2:40 AM IST

  • 300 साल पुराने बरगद को बचाने की कवायद
  • बिल्डर ने बिल्डिंग प्लान में नहीं दी थी पेड़ की जानकारी

दिल्ली अपनी ऐतिहासिक धरोहरों और विरासत के लिए यूं तो पूरी दुनिया मे मशहूर है. लेकिन अगर अपने ही लोग इस विरासत को सहेजने के बजाय उसको नष्ट करने की कोशिश में लग जाएं तो स्थिति की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है. चांदनी चौक के 300 साल पुराने बरगद के एक पेड़ को बिल्डर से बचाने के लिए एक स्थानीय नागरिक ने दिल्ली हाई कोर्ट में गुहार लगाई है. जिसके बाद कोर्ट ने पेड़ के आसपास खड़ी की गई दीवार को तोड़ने के आदेश दिए हैं.

दरअसल हाई कोर्ट ने इससे पहले सुनवाई करते हुए सिविक एजेंसियों को पेड़ के चारों तरफ की दीवारें और कंस्ट्रक्शन मैटेरियल हटाने को कहा. कोर्ट के आदेश के बाद सिविक एजेंसियों ने कंस्ट्रक्शन मैटेरियल तो हटा दिया लेकिन दीवारें ज्यों की त्यों खड़ी रहीं. गुरुवार को कोर्ट ने इस मामले की दोबारा सुनवाई की और नाराज होते हुए कहा कि अब तक पुराने आदेश का पालन क्यों नहीं किया गया? अब तक पेड़ के चारों तरफ खड़ी दीवारें क्यों नहीं हटाई गईं?

कोर्ट ने गुरुवार की सुनवाई में एजेंसी को तुरंत पेड़ के आसपास खड़ी दीवारों को तोड़ने के आदेश दिए हैं. कोर्ट ने साफ कर दिया है कि इस पेड़ को किसी भी हाल में संरक्षित करना है और इसके लिए सभी कोशिशों को जल्द से जल्द अंजाम दिया जाए.

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नॉर्थ एमसीडी ने हाई कोर्ट को सुनवाई के दौरान बताया कि बिल्डर के खिलाफ शो कॉज नोटिस जारी करते हुए पूछा गया है कि उसको दी गई स्वीकृति, एमसीडी द्वारा क्यों ना खारिज की जाए.

एमसीडी ने हाई कोर्ट में यह भी तर्क दिया कि परमिशन लेने के दौरान बिल्डर ने बिल्डिंग प्लान में कहीं भी पेड़ होने का जिक्र नहीं किया था. एमसीडी ने कोर्ट को यह भी बताया था कि इस मामले में दोषी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति कर दी गई है.

एमसीडी की तरफ से सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि कोर्ट के निर्देश पर पूरे चांदनी चौक इलाके में पेड़ों की गणना का काम भी पूरा कर लिया गया है. नॉर्थ एमसीडी ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि चांदनी चौक में कुल 1700 पेड़ों की गणना की गई है.

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बता दें, चांदनी चौक के रहने वाले नितिन गुप्ता ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका लगाई थी कि वर्षों पुराने बरगद के एक पेड़ को बिल्डर द्वारा हटाया जा रहा है, जो उनकी कई पीढ़ियों का गवाह है. इसके अलावा चांदनी चौक इलाके में पहले से ही पेड़ों की बेहद कमी है.

दिल्ली हाई कोर्ट ने नॉर्थ एमसीडी से इस पुराने बरगद के पेड़ के अलावा अन्य पुराने पेड़ों को भी संरक्षित करने का आदेश दिया है. सुनवाई के दौरान अधिकारियों द्वारा कोर्ट को बताया गया कि बिल्डर के द्वारा लगाए गए पत्थरों और सीमेंटेड हिस्से को बरगद के पेड़ के पास से हटा दिया गया है.

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बिल्डर की तरफ से बतौर वकील पेश हुए सलमान खुर्शीद ने कहा कि वह कोर्ट के किसी भी आदेश का पालन करने के लिए तैयार हैं. उन्होंने कोर्ट को आश्वस्त किया है कि इस मामले में आगे बिल्डर पेड़ को कोई नुकसान नहीं पहुंचाएगा.

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