वर्जिनिटी टेस्ट को दिल्ली HC ने बताया असंवैधानिक, 1992 के सिस्टर सेफी केस की सुनवाई के दौरान सुनाया फैसला

दिल्ली हाई कोर्ट का कहना है कि केरल में 1992 में सिस्टर अभया की हत्या के लिए आरोपी सिस्टर सेफी पर किया गया वर्जिनिटी टेस्ट असंवैधानिक था. इस कदम के लिए सिस्टर सेफी CBI से मुआवजा लेने की हकदार हैं. कोर्ट ने कहा, न्यायिक या पुलिस हिरासत में महिला बंदी या आरोपी की जांच के तहत किया गया वर्जिनिटी टेस्ट असंवैधानिक है.

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दिल्ली हाई कोर्ट (फाइल फोटो) दिल्ली हाई कोर्ट (फाइल फोटो)

नलिनी शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 07 फरवरी 2023,
  • अपडेटेड 8:47 PM IST

दिल्ली हाई कोर्ट ने मंगलवार को एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि न्यायिक या पुलिस हिरासत में महिला बंदी या आरोपी की जांच के तहत किया गया कौमार्य परीक्षण (Virginity Test) असंवैधानिक है. साल 1992 सिस्टर अभया मर्डर केस में दिल्ली हाई कोर्ट ने आदेश जारी किया है. 

दिल्ली हाई कोर्ट का कहना है कि केरल में 1992 में सिस्टर अभया की हत्या के लिए आरोपी सिस्टर सेफी पर किया गया वर्जिनिटी टेस्ट असंवैधानिक था. इस कदम के लिए सिस्टर सेफी CBI से मुआवजा लेने की हकदार हैं. 

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वर्जिनिटी टेस्ट को अवैध घोषित करने की उठाई थी मांग

यह आदेश न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने सिस्टर सेफी की याचिका पर पारित किया, जिन्होंने 1992 में केरल में एक नन की मौत पर एक आपराधिक मामले के सिलसिले में उनके वर्जिनिटी टेस्ट के संचालन को असंवैधानिक घोषित करने की मांग की थी.

'एजेंसी ने महिला की गरिमा के साथ की छेड़छाड़'

हाई कोर्ट ने कहा, हिरासत में लिए गए व्यक्ति की बुनियादी गरिमा बरकरार रखनी होती है, जिसका मौजूदा मामले में उल्लंघन किया गया. बता दें कि याचिकाकर्ता ने अदालत के सामने आरोप लगाया था कि 1992 में नन की मौत से जुड़े मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा 2008 में उसे जबरन 'कौमार्य परीक्षण' से गुजरना पड़ा था. इस वर्जिनिटी टेस्ट के नतीजे भी लीक हो गए थे.

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मानवाधिकारों का उल्लंघन

न्यायमूर्ति शर्मा ने कहा, 'यह घोषित किया जाता है कि एक महिला बंदी, जांच के तहत आरोपी, या हिरासत में, चाहे वह न्यायिक हो या पुलिस, असंवैधानिक है और संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन है, जिसमें गरिमा का अधिकार शामिल है. इसलिए, यह अदालत मानती है कि यह परीक्षण सेक्सिस्ट है और महिला अभियुक्त की भी गरिमा के मानवाधिकार का उल्लंघन है, अगर उसे हिरासत में रहते हुए इस तरह के परीक्षण के अधीन किया जाता है.'

क्या है पूरा मामला?

बता दें कि मामला 1992 का है. उस वक्त सिस्टर अभया एक 20 साल की युवती थी. वो कोट्टायम के St.Pious Xth Convent में रहती थी. 27 मार्च 1992 को उसकी लाश एक कुएं में मिली थी. केरल पुलिस ने अपनी जांच में माना था कि अभया ने खुदकुशी की. लेकिन मामला जब सीबीआई के पास पहुंचा तो इसमें कई खुलासे हुए. सीबीआई की जांच के मुताबिक सिस्टर सेफी दोषी साबित हुई. सीबीआई के मुताबिक सिस्टर सेफी और मामले के दूसरे आरोपी फादर कुट्टूर के बीच शारीरिक संबंध थे. अभया की हत्या इस पर परदा डालने के लिए की गई थी.  

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