दिल्ली में मोती नगर फैक्ट्री में हुए ब्लास्ट में सात लोगों की जान चली जाने के बाद एमसीडी ने दावा किया कि उसने नोटिस तो दिया था लेकिन सील नहीं की. दरअसल, दिल्ली आजतक के हाथ शिकायत की एक ऐसी कॉपी लगी है जिसमें साफ है कि इलाके के डीसीपी, साउथ म्युनिसिपल कारपोरेशन औरसुप्रीम कोर्ट की मॉनिटरिंग कमेटी को साफ तौर पर शिकायत की गई थी.
शिकायत में बताया गया था कि पश्चिमी दिल्ली की अधिकतर सील फैक्ट्री में रात के वक्त छुपे तौर पर काम होता है. आरटीआई एक्टिविस्ट परमिंदर सिंह ने दावा किया है कि सभी सील फैक्ट्री के बढ़े हुए बिल इस बात की तस्दीक कर रहे हैं कि सील फैक्ट्रियां चोर दरवाजे से चल रही हैं.
रियलिटी चेक में पाया कि पश्चिमी दिल्ली के ख्याला, चांद मगर, नर्सिंग गार्डन, विष्णु गार्डन के ई-ब्लॉक, RZ-Block और रवि नगर में करीब सभी सील बंद फैक्ट्रियों में दिन के वक्त भी काम हो रहा है. विष्णु गार्डन इलाका है तो रेजिडेंशियल है लेकिन यहां पर कभी छोटे लघु उद्योग होते थे. नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेश के बाद यहां पर कई फैक्ट्रियां सील हुई लेकिन चोर दरवाजे से वहां आज भी काम जारी है. दिल्ली आजतक की टीम एक ऐसी ही फैक्ट्री पहुंची जहां सील किए गए गेट पर कार खड़ी कर दी गयी थी और अंदर स्टंपिंग का काम जारी था.
विष्णु गार्डन निवासी आरटीआई एक्टिविस्ट परमिंदर सिंह ने कहा कि पिछले साल की 14 तारीख को शिकायत देने के बाद भी प्रशासन की मिली भगत से सीलबंद फैक्ट्रियों में काम होता रहा. इनके बिजली मीटर की जांच के लिए लिखने के बाद भी किसी ने सुध नहीं ली. लिहाजा जानलेवा हादसे रुक जाएं, ये भला कैसे संभव है. सवाल ये है कि क्या एमसीडी जान बूझकर आंख मूंदे हुए है या फिर वो अनजान है?
गौरतलब है कि गुरुवार को दिल्ली के मोतीनगर के पास सुदर्शन पार्क के पास डी ब्लॉक में घर के अंदर कंप्रेशर ब्लास्ट हो गया था , जिसकी वजह से छत गिरने से 7 लोगों की मौत हो गई जबकि 8 लोग घायल हो गए थे. कहा गया था कि इस बिल्डिंग को एमसीडी की तरफ से नोटिस भी दिया गया था, लेकिन इसके बावजूद गैरकानूनी काम चल रहा था.
राम किंकर सिंह