ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल से हालात बिगड़े, महंगी हुईं सब्जियां

राज्य में ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल को थोक सब्जी कारोबारियों ने समर्थन दे दिया है.  इसके चलते 27 जुलाई से बाहरी राज्यों से सब्जी नहीं आएगी.  थोक सब्जी व्यवसायों  का कहना है कि आने वाले दिनों में सभी साग सब्जियां और महंगी हो जाएंगी.     

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महंगी हुईं सब्जियां महंगी हुईं सब्जियां

सुनील नामदेव / देवांग दुबे गौतम

  • रायपुर,
  • 26 जुलाई 2018,
  • अपडेटेड 8:03 PM IST

हफ्तेभर से चली आ रही ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल की वजह से अब छत्तीसगढ़ में हालात बिगड़ते चले जा रहे हैं. महंगाई दिखने लगी है, खासकर अनाज और दालों समेत तमाम साग-सब्जिया महंगी होने लगी हैं. तेल और चीनी की कीमत में भारी बढ़ोत्तरी होने लगी है. चिल्हर में दाल और चीनी में चार रुपए किलो तक का इजाफा हुआ है. जबकि तेल पांच से दस रुपए प्रति किलो महंगा हो गया है.

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कारोबारियों के मुताबिक बाहर से माल नहीं आ रहा है इसलिए धीरे धीरे कमी की स्थिति बन रही है. उन्होंने अंदेशा जाहिर किया है कि अगर हड़ताल जल्द नहीं खत्म हुई और ऐसी हालत रही तो निश्चित रूप से आने वाले दिनों में बाजार का हाल और भी गंभीर होगा. उपभोक्ताओं को त्यौहार में महंगाई का सामना करना होगा.  

ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल का सबसे ज्यादा असर सब्जियों पर दिखने लगा है. कमजोर आवक के चलते पहले से महंगी हो रही सब्जियों की कीमत अब आसमान छूने लगी हैं. 10-20 रुपए प्रति किलो तक बिकने वाला टमाटर आठ दिनों बाद 40 रुपए किलो पर पहुंच गया है. साथ ही गोभी, बरबट्टी, परवल और अन्य सब्जियों की कीमतें बढ़ गई हैं. सब्जी कारोबारियों का कहना है कि बाहरी आवक लगभग समाप्त होने लगी है और 27 जुलाई तक तो पूरी तरह से बाहरी आवक पर रोक लग जाएगी. इसके बाद हालत और गंभीर हो जाएंगे. सब्जी के दाम में और इजाफा होगा.

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राज्य में ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल को थोक सब्जी कारोबारियों ने समर्थन दे दिया है. इसके चलते 27 जुलाई से बाहरी राज्यों से सब्जी नहीं आएगी. थोक सब्जी व्यवसाइयों का कहना है कि आने वाले दिनों में सभी साग सब्जियां और महंगी हो जाएंगी.

व्यापारियों के मुताबिक हड़ताल का सबसे ज्यादा फायदा जमाखोर उठाएंगे. उन्होंने बताया कि रोजाना उपयोग में आने वाली साग सब्जियों को कई जगह स्टॉक किया जा रहा है. ताकि जरूरत के हिसाब से ऊंची कीमत में बेचा जा सके. इससे एक बार फिर दाम बेलगाम हो सकते हैं. व्यापारियों की यह भी दलील है कि छत्तीसगढ़ में उपजने वाली साग सब्जियों के लिए वाहन मुहैया नहीं हो रहे हैं.

इससे परिवहन नहीं होने से स्थिति सामान्य होने के बाद भी वे बाजार में अघोषित शॉर्टेज की स्थिति पैदा की जा रही है. उन्होंने इसके लिए कई दलालों को जिम्मेदार ठहराया है. उधर साग सब्जियों और तेल-मसालों के दामों में हुई बढ़ोत्तरी ने महिलाओं के बजट को बिगाड़ना शुरू कर दिया है. महिलाएं इस बात परेशान से हैं कि दो चार दिनों में ही सब्जी के दामों में दोगुनी से ज्यादा वृद्धि दर्ज हुई है. महिलाओं के मुताबिक ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल तोड़ने के लिए सरकार को आगे आना चाहिए.

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