बिहार की राजनीति में इन दिनों कब्रिस्तान समाधि और श्मशान की चर्चा आम हो चली है. सभी दल अपने विरोधियों को यहीं पहुंचाना चाहते हैं. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राजगीर दौरे पर गए तो आरजेडी अध्यक्ष लालू प्रसाद ने कहा कि उनकी समाधि राजगीर में ही बनेगी.
इससे पहले JDU ने भी कहा था कि आरजेडी अगर मर्यादा से बाहर गई तो उन्हें श्मशान पहुंचा देंगे. केन्द्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अश्वनी चौबे ने लालू प्रसाद पर प्रहार करते हुए कहा कि ऐसे घोटालेबाज नेताओं को जनता कब्रगाह तक पहुंचाएगी.
पिक्चर पॉलिटिक्स से शुरू हुई बिहार की राजनीति अपने निचले स्तर तक पहुंच कर कब्रिस्तान श्मशान और समाधि तक पहुंच गई है. इसकी शुरुआत पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव की तरफ से हुई, जिन्होंने मुख्यमंत्री आवास में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ खींची एक तस्वीर जारी करते हुए आरोप लगाया था कि जहरीली शराब कांड का आरोपी मुख्यमंत्री के साथ कैसे सेल्फी ले रहा है.
दूसरे ही दिन JDU ने एक युवती की तस्वीर जारी कर दी. यह कुछ वर्ष पहले की तस्वीर थी, जिसमें तेजस्वी यादव दिखाई दे रहे थे. तेजस्वी ने इस तस्वीर पर सफाई पेश करते हुए बताया कि वह जब आईपीएल के खिलाड़ी थे तब उनके साथ कई महिलाओं ने तस्वीर खिंचाई थी, उसमें गलत क्या है.
हालांकि इस पर उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने भी चुटकी लेते हुए कहा कि इतनी अंतरंग तस्वीरें कोई सेल्फी में नही खिंचवाता.
आरोप प्रत्यारोप के इस दौर में नेता व्यक्तिगत आरोप पर आ गए हैं, एक दूसरे की पोल पट्टी खोलने में लग गए हैं. पुरानी तस्वीरें निकाली जा रही हैं. एक दूसरे पर वार करने न तो एनडीए के नेता पीछे हैं और न ही आरजेडी के.
केन्द्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री अश्वनी चौबे ने लालू प्रसाद को जवाब देते हुए कहा कि वह सोच लें कि उनकी समाधि कहां बनेगी. राजनीति में इस प्रकार कब्रिस्तान, श्मशान और समाधि की बातें नहीं होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि लालू अनाप शनाप बयान देकर बयानों के जरिए ही खुद को राजनीति में जिंदा रखना चाहते हैं. उन में न तो दम बचा है और न खम. अब जनता जान चुकी है. ऐसे घोटालेबाज नेताओं को जनता कब्रगाह तक पहुंचाएगी.
सुजीत झा