बिहार में काफी समय से गमछे का इस्तेमाल एक परंपरागत परिधान के तौर पर होता रहा है. पूजा पाठ से लेकर हर बड़े आयोजन में इसका इस्तेमाल होता है. आमतौर पर युवा से लेकर बुज़ुर्ग तक हर कोई अपने कंधे या सिर पर गमछा रखता है. कोरोना वायरस के इस दौर में गमछा फैशन के साथ-साथ यहां के लोगों के लिए सुरक्षा कवच भी बन गया है. पिछले दिनों पीएम मोदी ने भी लोगों से मास्क के बदले गमछा इस्तेमाल करने की अपील की थी. ऐसे में अब बिहार में गमछे की डिमांड बढ़ गई है.
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बिहार की गमछा परंपरा एक बार फिर देश में हिट हो रही है और कोरोना के खिलाफ लड़ाई में सहायक भी साबित हो रही है. मास्क के बदले बिहार के लोग रंग बिरंगे, लाल, हरा, सफेद और केसरिया गमछा इस्तेमाल कर रहे हैं. जिसकी वजह से बाजार में गमछों की डिमांड बढ़ गई है. फिलहाल 50 हजार गमछों का ऑर्डर बिहार के कला संस्कृति विभाग और उद्योग विभाग को दिया गया है. ताकि कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए राज्य के लोग मास्क की जगह गमछों का इस्तेमाल करें.कोरोना कमांडोज़ का हौसला बढ़ाएं और उन्हें शुक्रिया कहें...
इस बीच मुजफ्फरपुर खादी ग्रामोद्योग ने भी गमछे बनाने की कवायत तेज कर दी है. मंलवार को उद्योग मंत्रालय को करीब 5000 से अधिक खादी के गमछे भेजे हैं. बिहार के उद्योग मंत्री श्याम रजक ने गमछे के निर्माण से जुड़े तीन संगठनों के साथ बैठक कर 50 हजार डिजाइनर गमछों की उपलब्धता की बात कही है.
खादी बोर्ड से जुड़ी 19 संस्थानों से पर्याप्त गमछे लेने का निर्देश दिया गया है. वहीं मुजफ्फरपुर जिला खादी ग्रामोद्योग के अध्यक्ष वीरेंद्र कुमार ने कहा कि खादी बोर्ड के सीओ के निर्देश पर 5 हजार खादी गमछे खादी बोर्ड को भेजे जा रहे हैं.
मणिभूषण शर्मा