बिहार सरकार के स्वास्थ्य विभाग ने शुक्रवार को आनन-फानन में मधेपुरा के जननायक कर्पूरी ठाकुर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. राकेश कुमार और प्राचार्य डॉ. जी के. मिश्रा को हटा दिया है. मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. राकेश कुमार को मधेपुरा मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में ही पैथोलॉजी विभाग के सह प्राध्यापक बनाया गया है.
मधेपुरा कॉलेज के नए मेडिकल सुपरीटेंडेंट डॉ वैद्यनाथ ठाकुर को नियुक्त किया गया है. वहीं प्रिंसिपल डॉक्टर जी के मिश्रा को हटाकर बेतिया के राजकीय मेडिकल कॉलेज के नेत्र विभाग का प्राध्यापक बनाया गया है. मेडिकल कॉलेज के नए प्राचार्य डॉक्टर भूपेंद्र प्रसाद को बनाया गया है.
आज तक ने मंगलवार को जननायक कर्पूरी ठाकुर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल पर एक खबर चलाई थी, जहां पर अस्पताल में फैली अव्यवस्था के बारे में खुलासा किया था. आजतक ने दिखाया था कि कोसी और सीमांचल क्षेत्र के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल जो फाइव स्टार होटल की तरह दिखता है वहां पर और संसाधनों की कमी है जिसकी वजह से कोरोनावायरस के मरीजों को दूसरी जगह इलाज के लिए भेज दिया जाता है.
मेडिकल सुपरीटेंडेंट डॉ.राकेश कुमार ने आज तक के कैमरे पर अस्पताल की पोल खोल दी थी और खुलासा किया कि बिहार सरकार के द्वारा इस अस्पताल को कोविड-19 अस्पताल घोषित किए जाने के बावजूद भी यहां पर डॉक्टरों की भारी कमी है, जिसकी वजह से 500 बेड के कोविड-19 अस्पताल में केवल 100 बेड पर ही मरीजों का इलाज हो रहा है.
डॉ राकेश कुमार ने अस्पताल में ऑक्सीजन की भी कमी पर बात हुई थी. वहीं दूसरी तरफ जननायक कर्पूरी ठाकुर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के प्रिंसिपल डॉ. जी के मिश्रा ने भी खुलासा किया था कि कैसे सोमवार और मंगलवार के बीच अस्पताल में ऐसी स्थिति उत्पन्न हुई थी जहां पर अस्पताल में 24 घंटे के लिए बिजली नहीं थी और पूरा अस्पताल जेनरेटर के भरोसे चल रहा था.
स्टोरी दिखाए जाने के बाद लगातार कोसी प्रमंडल के कमिश्नर राहुल महिवाल और मधेपुरा के डीएम श्याम बिहारी मीणा ने भी अस्पताल में औचक निरीक्षण किया और पाया कि डॉक्टर ड्यूटी से गायब हैं. जननायक कर्पूरी ठाकुर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल की पूरी अव्यवस्था का इन दोनों डॉक्टरों ने खुलासा किया था और ऐसा लगता है कि बिहार सरकार ने ऐसा करने कि इन दोनों को सजा दी है.
रोहित कुमार सिंह