'जो दिखता है वही बिकता है' के फॉर्मूले पर भाजपा

पांच राज्यों में हो रहे विधानसभा चुनावों में भाजपा ने प्रत्याशियों के चयन में अपने कॉडर की जगह चर्चित चेहरों और दलबदलूओं को वरीयता दी है.

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केरल के भाजपा नेता के.जे. अलफोंस और अन्य (फाइल फोटो: आइएएनएस) केरल के भाजपा नेता के.जे. अलफोंस और अन्य (फाइल फोटो: आइएएनएस)

सुजीत ठाकुर

  • नई दिल्ली,
  • 15 मार्च 2021,
  • अपडेटेड 1:45 PM IST
  • केरल में भाजपा के सबसे पुराने कार्यकर्ताओं में शामिल ओ. राजगोपाल का टिकट कटा
  • ई. श्रीधरन के अलावा केरल में पूर्व मंत्री के. अलफोंस को भी टिकट दिया गया है
  • मूल कॉडर की अनदेखी की वजह से पश्चिम बंगाल में नाराज कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन तक कर दिया

पांच राज्यों में हो रहे विधानसभा चुनाव में भाजपा ने जीत हासिल करने के लिए प्रत्याशियों के चयन में चर्चित चेहरों को अपने कॉडर पर वरीयता दी है. दूसरी पार्टियों से भाजपा में आए लोगों को तो बड़ी तादाद में टिकट दिया ही गया है, कुछ राज्यों में तो अपने सबसे पुराने कार्यकर्ताओं को टिकट से बेदखल कर ब्यूरोक्रैट और दूसरे लोगों को भी प्रत्याशी बनाया गया है.

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भाजपा के सबसे पुराने कार्यकर्ता रहे केरल में विधायक ओ. रोजगोपाल का टिकट पार्टी ने काट दिया है. वह दीनदयाल उपाध्याय के समय से भाजपा (तब जनसंघ) से जुड़े रहे हैं. ओ. रोजगोपाल पहले ऐसे भाजपा कार्यकर्ता रहे हैं, जिन्होंने केरल में भाजपा को पहली विधानसभा सीट जीतकर दी. प्रदेश भाजपा के नेताओं का कहना है कि ओ. रोजगोपाल की उम्र 91 साल है इसलिए उन्हें टिकट नहीं दिया गया है, लेकिन भाजपा के नेता इस बात पर चुप्पी साध जाते हैं कि यदि उम्र की ही बात है तो फिर 88 साल के ई. श्रीधरन को भाजपा ने केरल के पल्लकाड से अपना प्रत्याशी क्यों बनाया है. श्रीधरण को सिर्फ टिकट ही नहीं मिला है बल्कि भाजपा ने उन्हें सीएम चेहरे के रूप में भी राज्य में चर्चित कर दिया है, हालांकि इसकी औपचारिक घोषणा नहीं हुई है. फिल्म आर्टिस्ट कृष्ण कुमार, अभिनेता सुरेश गोपी को भी भाजपा ने अपना प्रत्याशी घोषित किया है.

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श्रीधरन के अलावा केरल में पूर्व मंत्री के. अलफोंस को भी टिकट दिया गया है जबकि वह ब्यूरोक्रैट रहे हैं और भाजपा के मूल कॉडर से नहीं हैं. भाजपा के एक नेता इस बात से आहत हैं कि केरल जैसे राज्य में लंबे समय से मूल कॉडर के लोग, पार्टी का काम कर रहे हैं और चुनाव के समय टिकट दूसरे लोगों को दे दिया जाता है. बात सिर्फ इतनी ही नहीं है, जब विरोधी दलों के कद्दावर नेता प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ते हैं तो फिल्मकार और चर्चित चेहरे को उनके खिलाफ नहीं लड़ाया जाता है बल्कि उस वक्त पार्टी के पुराने कॉडर को उनके सामने खड़ा किया जाता है. जैसे केरल में इस बार मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के खिलाफ श्रीधरन, सुरेश गोपी आदि को लड़ाने की जगह पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सीके. पद्मनाभन को प्रत्याशी बनाया गया है. कालीकट विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति रहे अब्दुल सलाम को भी भाजपा ने चुनाव मैदान में उतारा है.

केरल के अलावा तमिलनाडु में भी फिल्म एक्ट्रेस खुशबू सुंदर को भाजपा ने अपना प्रत्याशी बनाया है. इसी तरह आइपीएस रहे एमआर गांधी को भी भाजपा ने अपना प्रत्याशी बनाया है. पश्चिम बंगाल में भी टीएमसी और अन्य दलों से आए लोगों को भाजपा ने बड़ी तादाद में टिकट दिया है लेकिन मूल कॉडर के लोगों को टिकट देने में पार्टी कोताही बरतती दिख रही है. पश्चिम बंगाल में तो रविवार को नाराज कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन तक कर दिया. भाजपा नेता इस मुद्दे पर खुलकर कुछ भी बोलने से बच रहे हैं. परोक्ष रूप से सिर्फ यह कहा जा रहा है कि चुनाव में उसी को प्रत्याशी बनाया जाता है जिसके जीतने की संभावना होती है.

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