चुनावी बजट: पंजाब सरकार ने खोला खजाना

पंजाब के लिए यह चुनाव-पूर्व साल है, ऐसे में लोकलुभावन बजट की उम्मीद थी. लेकिन क्या राज्य इसके भार को वहन कर पाएगा?

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पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह (एएनआइ) पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह (एएनआइ)

अनिलेश एस. महाजन

  • नई दिल्ली,
  • 09 मार्च 2021,
  • अपडेटेड 6:50 PM IST
  • वित्तमंत्री मनप्रीत सिंह बादल ने खजाना खोल दिया है ताकि मतदाताओं को रिझाया जा सके
  • समस्या यह है कि खर्चीला बजट राज्य को कर्ज के जंजाल में फंसा देगा
  • अकाली दल और भाजपा दोनों कहते हैं कि अमरिंदर सरकार ने बहुत कम काम किए हैं

पंजाब की कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार अगले साल फरवरी में दूसरा जनादेश हासिल करना चाहेगी और इसके लिए वित्तमंत्री मनप्रीत सिंह बादल ने खजाना खोल दिया है ताकि मतदाताओं को रिझाया जा सके. समस्या यह है कि खर्चीला बजट राज्य को कर्ज के जंजाल में फंसा देगा, खासकर तब जबकि अर्थव्यवस्था और कारोबार महामारी की झटकों से अभी उबरे नहीं हैं और इसके कारण मंदी का दौर चल रहा है.  

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बादल के लिए अपनी योजना के मुताबिक, बजट में वास्तविक प्राप्तियों और खर्च के बीच इस साल तालमेल बैठाना मुश्किल होगा. 8 मार्च को पेश बजट में उन्होंने 2021-22 के लिए 1,68,015 करोड़ रुपए के परिव्यय का बजट पेश किया जो पिछले साल के 1,54,805 करोड़ रु. के मुकाबले कहीं अधिक है. वित्त वर्ष 2021-22 के अंत तक कुल प्राप्तियां 1,62,599 करोड़ रुपए रहने का अनुमान है; अगर हम उधारियों को घटा देंगे तो पूंजी प्राप्तियां 95,258 करोड़ रु. रहेंगी. इस गणित से तो राज्य का कर्ज इस साल के 2,52,880 करोड़ रु. के मुकाबले 2,73,703 करोड़ रु होने के आसार लगते हैं.  

पंजाब का आधे से ज्यादा राजस्व सरकारी कर्मचारियों के वेतन और पेंशन के भुगतान में चला जाता है. यह चुनावी साल है लिहाजा बादल ने छठे वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करने की घोषणा करने के साथ 48,989 पदों (पहले चरण में भरे जाएंगे) पर भर्ती करने का भी ऐलान कर दिया है. राज्य में कुल 1,00,000 पद रिक्त हैं. बादल ने पिछले साल बड़ा कदम उठाते हुए राज्य के कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति आयु 60 साल से घटाकर 58 साल कर दी थी. राज्य सरकार वेतन आयोग की सिफारिशें 1 जुलाई 2021 से लागू करने जा रही है. एरियर का भुगतान किस्तों में किया जाएगा और बादल ने इसके लिए 9,000 करोड़ रुपए अलग से रख दिए हैं. सरकारी कर्मचारी और कारोबारी आमतौर पर भाजपा से सहानुभूति रखने वाले माने जाते हैं और इन्हें कांग्रेस की तरफ लाने के लिए जोरदार प्रयास किए जा रहे हैं. लेकिन ये आसान नहीं होगा- राज्य सरकार को पुराना बकाया चुकता करने में मुश्किल आ रही है और कुछेक मामलों में तो वेतन और पेंशन के भुगतान में भी महीनों का विलंब चल रहा है.  

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इससे भी ज्यादा चिंता की बात यह है कि धन को लड़कियों की शादी शगुन की रकम की राशि 21,000 रु. से बढ़ाकर 51,000 रु करने और सरकारी बसों में महिलाओं और विद्यार्थियों को मुफ्त सफर जैसी लोकलुभावन योजनाओं पर खर्च किया जा रहा है. इसके अलावा बादल ने 1,186 करोड़ रु. राज्य के 1,13,000 कर्जदार किसानों के लिए और 526 करोड़ रु भूमिहीन किसानों के लिए अलग से रखे हैं. बजट में बुजुर्गों की पेंशन भी 750 रु. से बढ़ाकर 1,500 रु कर दी है औऱ ग्रेजुएशन कर रहे विद्यार्थियों को स्मार्टफोन देने के लिए भी पैसों का अलग से प्रावधान किया है.

साल 2017 में अमरिंदर सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस ने पंजाब में और भाजपा ने उत्तर प्रदेश में किसानों को कृषि ऋणमाफी का चुनावी वादा किया था. हालांकि केंद्र सरकार के वित्त मंत्रालय ने इन योजनाओं के लिए पैसे देने से इनकार कर दिया था. इसके बाद यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार ने प्रदेश के 36 लाख किसानों का 36,359 करोड़ रुपए का कर्ज माफ किया और इसके लिए पैसों का इंतजाम इंटरनेशनल बांड मार्केट से किया. हालांकि अमरिंदर सिंह की सरकार को संसाधन जुटाने में मुश्किलें आईं. उनकी सरकार ने इस साल 1,13,000 किसानों का कर्ज माफ करने और भूमिहीन किसानों के लिए 526 करोड़ रु का इंतजाम करने के लिए फंड का आवंटन किया है.

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पंजाब में अकाली दल और भाजपा दोनों कहते हैं कि अमरिंदर सरकार ने बहुत कम काम किए हैं. भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ कहते हैं कि कांग्रेस ने किसानों को प्रति एकड़ न्यूनतम आय, पांच एकड़ से कम जमीन के मालिक किसानों को नौकरी और राज्य में फसल के नुक्सान को कवर करने के लिए कृषि बीमा आयोग बनाने का वादा किया था लेकिन किसी को पूरा नहीं किया.

अनुवादः मनीष दीक्षित

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