बीते साल, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दिवाली के पहले देश में करेंसी नोट पर हिंदू देवी-देवता लक्ष्मी और गणेश की फोटो लगाए जाने की मांग की थी. लगे हाथ, महाराष्ट्र के कुछ लोगों ने मध्यकाल में मराठा साम्राज्य की स्थापना करने वाले छत्रपति शिवाजी की तस्वीर वाले नोट छापने की भी मांग कर डाली थी.
केंद्रीय मंत्री नारायण राणे के पुत्र और बीजेपी नेता नीतेश राणे ने एडिटिंग के जरिए बनाए गए शिवाजी की तस्वीर वाले 200 रुपये के एक नोट को शेयर करते हुए इस मांग का समर्थन किया था. तब इसको लेकर खूब चर्चा भी हुई थी.
अब सोशल मीडिया पर शिवाजी की तस्वीर वाले उसी 200 रुपये के नोट को लेकर एक नया भ्रम फैलाया जा रहा है.
इसे शेयर करते हुए कुछ लोग कह रहे हैं कि साल 2023 में 200 रुपये के नोट पर शिवाजी की तस्वीर छापने का फैसला हो गया है यानी केंद्र सरकार ने शिवाजी की फोटो वाले नोट छापने की मांग को मान लिया है.
एक इंस्टाग्राम यूजर ने इसे शेयर किया है. इस पर लिखा है, “2023 में एक फैसला सामने आया है कि 200 के नोट में गांधी जी की नहीं बल्कि छत्रपति शिवाजी महाराज की तस्वीर होगी.”
इंडिया टुडे फैक्ट चेक ने पाया कि सरकार ने अभी तक 200 रुपये के नोट पर महात्मा गांधी की जगह छत्रपति शिवाजी की तस्वीर को छापने का कोई फैसला नहीं किया है. जो फोटो लोग शेयर कर रहे हैं ये वही फोटो है जिसे पिछले साल नीतेश राणे ने शेयर किया था.
कैसे पता लगाई सच्चाई?
अगर 200 रुपये के नोट पर शिवाजी की तस्वीर छापने का फैसला लिया गया होता तो ये खबर सुर्खियों में होती. लेकिन खोजने पर हमें ऐसी कोई खबर नहीं मिली.
भारत में नोट छापने का जिम्मा रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के ऊपर है. हमने उसकी वेबसाइट पर जाकर देखा तो वहां भी ऐसी कोई जानकारी नहीं है. इस वेबसाइट पर भारत में अब तक चलन में रहे सभी प्रकार के करेंसी नोट के बारे में जानकारी दी गई है. इसके मुताबिक, साल 1969 में महात्मा गांधी की 100वीं जयंती के मौके पर नोट पर उनकी तस्वीर छापने की शुरूआत हुई थी. साल 1987 में जारी हुए 500 रुपये के नोट पर भी महात्मा गांधी की तस्वीर छापी गई. साल 1996 में महात्मा गांधी की तस्वीर वाले नोटों की एक सीरीज शुरू हुई थी.
साल 2016 में हुई नोटबंदी के बाद देश में इस सीरीज के नए नोट जारी हुए. इसमें 200 रुपये के नोट भी शामिल हैं जिन्हें अगस्त 2017 को लॉन्च किया गया था. इस नोट पर भी महात्मा गांधी की ही तस्वीर है. इसके अलावा 200 रुपये का कोई अन्य करेंसी नोट चलन में नहीं है.
भारत के इतिहास में छत्रपति शिवाजी का स्थान बेहद अहम है. उनके पिता शाहजी बीजापुर सल्तनत के सरदार थे. शिवाजी ने मराठा सैनिकों की फौज खड़ी करके छापामार शैली का युद्ध करने में महारत हासिल की और दक्कन में मुगल बादशाह औरंगजेब को कड़ी चुनौती दी. साल 1674 उन्होंने 'छत्रपति' की उपाधि के साथ अपने स्वतंत्र मराठा राज्य की स्थापना की थी.
सुमित कुमार दुबे