किसी को चौराहे पर मारा, किसी के चेहरे पर फेंका गया एसिड, दर्दनाक है इन पाकिस्तानी एक्टर्स की मौत

पाकिस्तानी फिल्म इंडस्ट्री की एक ऐसी डार्क साइड भी है जिसके बारे में लोगों को अक्सर पता नहीं होता. पाकिस्तान के टॉप हीरो रहे सुलतान राही से लेकर, फैन्स के दिलों की धड़कन रहीं नादिरा तक 'लॉलीवुड' में ऐसे कई नाम हैं जिनका करियर रहस्यमयी अपराधों की वजह से ख़त्म हो गया. आपको बताते हैं इनके हैरान कर देने वाले किस्से.

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मारवी और नादिरा मारवी और नादिरा

aajtak.in

  • नई दिल्ली ,
  • 02 दिसंबर 2022,
  • अपडेटेड 8:30 AM IST

लॉलीवुड यानी पाकिस्तानी फिल्म इंडस्ट्री ने न जाने कितने कलाकारों को शोहरत दी है. लेकिन इस इंडस्ट्री की एक ऐसी डार्क साइड भी है, जहां कई मशहूर कलाकार अपनी शानदार कामयाबी के शिखर पर पहुंचकर भी लोगों की याददाश्त से गायब हो गए. और इस पूरे सिलसिले में सबसे दुखद बात ये रही कि इन कलाकारों के खो जाने की वजह इनकी नाकामयाबी नहीं थी. बल्कि ये अपराध का शिकार हुए. 

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इन कलाकारों में से किसी को बीच चौराहे पर गोली मार दी गई, तो किसी की हत्या पूर्व प्रेमी ने कर दी. कुछ मामले ऐसे भी हैं जिनकी जांच आज तक किसी नतीजे पर नहीं पहुंची और न अपराधियों का पता चला. आज आपको बताते हैं पाकिस्तानी फिल्म इंडस्ट्री के ऐसे पॉपुलर सितारों के किस्से जिनका करियर और जीवन किसी अपराध की भेंट चढ़ गया. 

निग्गो 
लाहौर का एक मशहूर रेड लाइट एरिया है शाही मोहल्ला, जिसे बहुत लोग हीरा मंडी के नाम से भी जानते हैं. पिछले कुछ समय से बॉलीवुड फैन्स ने ये नाम इसलिए सुना होगा क्योंकि संजय लीला भंसाली इस नाम से एक वेब सीरीज बना रहे हैं. पाकिस्तानी फिल्म प्रोड्यूसर्स ने कई टैलेंटेड लड़कियों को शाही मोहल्ले से निकालकर अपनी फिल्मों में एक्ट्रेस लिया. और ये लड़कियां आगे चलकर बहुत मशहूर एक्ट्रेस बनीं. ऐसी ही एक एक्ट्रेस थीं निग्गो उर्फ़ नर्गिस बेगम. 

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निग्गो

60 और 70 के दशक में पाकिस्तानी फिल्मों में आज के 'आइटम नंबर' की तरह 'मुजरा' होता था. निग्गो की डांसिंग स्किल्स बेहतरीन थीं और कुछ ही दिनों में वो फिल्म में क्लासिक मुजरा डांस रखने वाले प्रोड्यूसर्स की पहली पसंद बन गईं. 1972 में फिल्म 'क़सू' के शूट के दौरान निग्गो को प्रोड्यूसर ख्वाजा मजहर से प्यार हो गया और कुछ दिन में दोनों ने शादी कर ली. मगर ये शादी निग्गो के परिवार को नागवार गुजरी. शाही मोहल्ले की परंपरा थी कि अगर कोई इस इलाके की लड़की से शादी करता, तो उसे बदले में लड़की के परिवार को हर्जाना देना पड़ता था. 

बताया जाता है कि निग्गो के परिवार ने उन्हें वापस बुलाने की कोशिश की लेकिन जब कामयाबी नहीं मिली तो उनकी मां ने बीमार होने की बात बोलकर बस एक आखिरी बार मिलने आने को कहा. निग्गो के वापस जाने के बाद उनके परिवार ने उन्हें ब्रेन वाश करना शुरू कर दिया और वो दबाव में आकर वापिस नहीं लौटीं. ख्वाजा मजहर ने उन्हें वापिस बुलाने के लिए अपने म्यूजिक डायरेक्टर मंजूर अशरफ को भी भेजा, जिनकी बात अफेयर के दिनों में निग्गो खूब माना करती थीं. लेकिन निग्गो नहीं लौटीं. 

आखिरकार मजहर का सब्र जवाब दे गया. वो अपने साथ एक स्टेन गन लेकर शाही मोहल्ले में निग्गो के घर पहुंचे और उनपर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी. उन दिनों इस तरह की घटनाएं किसी ने नहीं सुनी थीं. निग्गो के साथ वहां मौजूद 3 और लोग मारे गए. निग्गो की मां ने भी इस घटना का बदला कोर्ट में खूब लिया और मजहर को उम्रकैद की सजा हुई. 
 
नन्हा 
पाकितान की पहली कॉमेडी ड्रामा सीरीज 'अलिफ़ नून' में रफ़ी ख्वार उर्फ़ नन्हा को लोगों ने खूब पसंद किया. 70 के दशक में 'जिद्दी' और 'नौकर' जैसी फिल्मों से उनका नाम लोगों को याद हो गया, साथ ही उनके लीड रोल वाली 'दुबई चलो' और 'ठेका पहलवान' भी ही गईं. अब नन्हा का नाम लोगों की जुबान पर भी आ गया. वो ऐसा दौर था जब फिल्मों में एक बार हिट हुई जोड़ी को प्रोड्यूसर कई-कई फिल्मों में दोहराया करते थे.

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नन्हा

नन्हा के साथ जिस एक्ट्रेस को लीड में खूब लिया गया, उनका नाम था नजली. दोनों में रोमांस शुरू हो गया और अक्सर वो पब्लिक में भी एक साथ नजर आने लगे. कहा जाता है कि अपने शानदार दौर में नन्हा ने प्रोड्यूसर्स पर नजली को कास्ट करने का दबाव भी बनाया. इसलिए नन्हा की कामयाबी से नजली का करियर भी खूब चला. मगर फिर वो दौर आया जब नन्हा की फिल्में फ्लॉप होने लगीं. कहते हैं कि इस वक़्त में नजली की भी दिलचस्पी नन्हा में कम हो गई.

2 जून 1986 को खबर आई कि नन्हा ने अपने घर में शॉटगन से खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली है. इसके पीछे वजह क्या थी, ये कभी साफ़ तो नहीं हुआ. बाद में कुछ अफवाहें ऐसी भी आईं कि नन्हा ने अपनी सारी दौलत नजली को देने का फैसला ले लिया था, जिससे उसके अपने घर में लोग टेंशन में आ गए थे. असल में क्या हुआ, कोई नहीं जानता. 

सुलतान राही 
फवाद खान स्टारर फिल्म 'द लेजेंड ऑफ़ मौला जट्ट' 2022 में रिलीज हुई और इतिहास रचते हुए ये सबसे कमाऊ पाकिस्तानी फिल्म बन चुकी है और पड़ोसी मुल्क की सबसे बड़ी हिट फिल्म है. लेकिन क्या आपको पता है कि ये फिल्म 1979 में आई पाकिस्तानी कल्ट क्लासिक फिल्म 'मौला जट्ट' का एडाप्टेशन है? फवाद खान ने इस साल जो आइकॉनिक किरदार निभाया है, उसे 70 के दशक में निभाया था लॉलीवुड के लेजेंड एक्टर सुलतान राही ने. 

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सुलतान राही

पाकिस्तान में 700 से ज्यादा पंजाबी फिल्में और 100 से ज्यादा उर्दू फिल्में करने वाले सुलतान राही ने अपने करियर में 150 से ज्यादा अवार्ड जीते. 'बाबुल सदके तेरे' 'शेर खान' 'शरीफ बदमाश', ये उनकी सबसे बड़ी फिल्मों में से कुछ के नाम हैं. कई कलाकारों का करियर राही ने आगे बढ़ाया. उन्होंने सिर्फ जूनियर एक्टर्स के लिए एक फिल्म फाइनेंस की और चैरिटी के कई काम किए. 

9 जनवरी 1996 को सुलतान राही देर रात इस्लामाबाद से लौट रहे थे तभी गुजरांवाला के पास मेन जीटी रोड पर उनकी गाड़ी का टायर पंचर हो गया. अंधेरे और सुनसान इलाके का फायदा उठाते हुए कुछ लोगों ने उनपर फायरिंग कर दी. राही को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन वहां उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया. जो हुआ वो क्यों हुआ, अचानक कैसे हो गया, आजतक साफ-साफ़ कोई नहीं कह सकता!

नादिरा
बेहतरीन एक्टिंग स्किल्स के साथ बेहद अलहदा खूबसूरती की मालकिन नादिरा ने 8 साल तक लॉलीवुड पर राज किया. उनका हुनर पंजाबी और उर्दू, दोनों सिनेमा में खूब चमका. तमाम चैरिटी करने वालीं नादिरा की शख्सियत के भी बहुत लोग फैन थे. बताया जाता है कि वो फिल्मों के अलावा, लोगों के लिए प्राइवेट परफॉरमेंस भी करती थीं. ऐसी चर्चा थी कि उस दौर में उन्होंने एक बार, एक रात की मुजरा परफॉरमेंस से 52 लाख रुपये कमाए थे. तबतक पाकिस्तानी फिल्म स्टार नैना के ही एक मुजरा परफॉर्म कर के 56 लाख कमाने का हल्ला था. 

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नादिरा

कहा जाता है कि उन्होंने अपने पति के साथ एक प्रॉपर्टी खरीदने का बिजनेस शुरू किया और दोनों में इसे लेकर विवाद हो गया. 1995 में एक रेस्टोरेंट से बाहर निकलते वक़्त उनपर गोलियां बरसा दी गईं. नादिरा के साथ जो हुआ उसका शक उनके पति पर गया तो जरूर, लेकिन मामले की जांच कभी कहीं पहुंची नहीं. उनके जाने से कई प्रोड्यूसर्स का नुक्सान हो गया जिन्होंने अपने अगले प्रोजेक्ट्स के लिए उन्हें साइन किया था. मुजरा परफॉर्म करके 56 लाख कमाने वालीं नैना के साथ भी कुछ ऐसा हुआ और 1996 में लाहौर में उनकी भी हत्या हो गई. 

यास्मीन खान 
शमशाद उर्फ़ यास्मीन खान ने पहली पश्तो हिट फिल्म 'युसूफ खान शेरबानो' (1970) में लीड रोल निभाया था. उर्दू एक्शन फिल्म 'दुल्हन एक रात की' में आने के बाद तो वो रातोंरात स्टार बन गईं. इसके बाद उन्होंने पंजाबी फिल्मों में भी खूब नाम कमाया. लेकिन बाद में पश्तो सिनेमा मने अश्लीलता और फूहड़पन आते देख वो इंडस्ट्री से दूर हो गईं. दो नाकाम शादियों एक बाद यास्मीन ने एक बड़े रसूख वाले परिवार के लड़के आरिफुल्लाह से शादी की. यास्मीन सब छोड़कर धर्म और चैरिटी की तरफ जुड़ चुकी थीं लेकिन उनके पारी के परिवार ने उन्हें कभी स्वीकार नहीं किया.

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यास्मीन खान

उन्हें बाद में पता चला कि उनके पति को जुए की लत है और उसकी एक पहली पत्नी भी है. इन सब हरकतों के चलते आरिफुल्लाह के परिवार ने उसे बेदखल कर दिया, लेकिन यास्मीन लगातार उसे सुधारने की कोशिश कर रही थीं. यास्मीन की कोशिशों से चिढ़ कर 15 अप्रैल, 1999 को उनके पति ने उनकी हत्या कर दी और दरवाजा अन्दर से बंद कर लिया. यास्मीन की बॉडी दो दिन बाद बरामद हुई. बाद में आरिफुल्लाह की भी हत्या हुई, जब वोतीसरी बार शादी करने की कोशिश कर रहा था. 

अंदलीब
अपनी पहली ही फिल्म 'घूंघट' हिट होने के बाद अंदलीब के करियर को बेहतरीन शुरुआत मिली थी. रिपोर्ट्स बताती हैं कि उनके चाहने वाले हर तबके, हर प्रोफेशन में थे और ये कोई हैरानी की बात नहीं है कि सियालकोट के बिजनेसमैन हनीफ गुमान के साथ वो रिलेशनशिप में थीं. लेकिन कहा जाता है कि एक वक़्त बाद अंदलीब की गुमान में दिलचस्पी कम हो गई और वो अब इस रिश्ते से बाहर निकलना चाहती थीं. 

अंदलीब

लेकिन बदले की आग में जल रहे गुमान ने अंदलीब की खूबसूरती बिगाड़ने के लिए उनके चेहरे पर तेजाब फेंक दिया. अंदलीब की जान तो बच गई, लेकिन उन्हें बहुत मुश्किल सर्जरी से गुजरना पड़ा और अब वो इंडस्ट्री की चमक से दूर, एक अच्छी शादीशुदा जिंदगी बिता रही हैं. 

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मारवी
पाकिस्तानी फिल्म इंडस्ट्री में सिन्धी बैकग्राउंड वाली एक्ट्रेसेज बहुत कामयाब नहीं रहीं, लेकिन मारवी ने इस मिथ को पलट दिया. सिर्फ 3-4 फिल्मों में ही उनकी सुन्दरता और एक्टिंग को लोगों ने बहुत पसंद किया और इंडस्ट्री के टॉप कलाकारों में उनका नाम बहुत तेजी से ऊपर आया.

मारवी

उनकी पॉपुलैरिटी का आलम ये था कि एक प्रोड्यूसर ने उन्हें लीड में लेकर 'मारवी' नाम से ही फिल्म अनाउंस की. लेकिन अभी मारवी का करियर रफ़्तार पकड़ ही रहा था कि 1998 में एक दिलजले आशिक ने कराची के तारिक रोड सिग्नल पर, उन्हें गोली मार दी. बताया जाता है कि जबतक पुलिस वगैरह नहीं आ गई तबतक मारवी का शरीर उसे हालत में कार में पड़ा रहा और कोई उनकी मदद करने आगे नहीं आया. जबतक पुलिस प्रशासन जुटा, तबतक बहुत देर हो चुकी थी. 'मारवी' उनकी आखिरी फिल्म रही और उनके जाने के बाद रिलीज हुई. उनकी हत्या की जांच आजतक किसी नतीजे पर नहीं पहुंची है. 

 

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