Salempur Assembly Seat: कांग्रेस के गढ़ में बीजेपी का विधायक, क्या कब्जा रह पाएगा बरकरार?

सलेमपुर विधानसभा सीट 2012 के चुनाव से एससी-एसटी के लिए आरक्षित है. इस सीट से बीजेपी के टिकट पर काली प्रसाद 2017 में विधानसभा सदस्य निर्वाचित हुए.

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यूपी Assembly Election 2022 सलेमपुर विधानसभा सीट यूपी Assembly Election 2022 सलेमपुर विधानसभा सीट

राम प्रताप सिंह

  • देवरिया,
  • 05 जनवरी 2022,
  • अपडेटेड 12:13 AM IST
  • देवरिया जिले की सीट है सलेमपुर विधानसभा
  • 2012 से आरक्षित है सलेमपुर विधानसभा सीट

उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले की विधानसभा सीट है सलेमपुर. सलेमपुर बिहार के साथ भी सीमा साझा करता है. सलेमपुर का इलाका मझौली स्टेट के विशेन क्षत्रियों के शासन का अधीन रहा. सलेमपुर स्थित मझौली स्टेट भगवान राम के घर अयोध्या और ससुराल जनकपुर के बिल्कुल मध्य में स्थित है इसलिए इस स्थान का प्राचीन नाम मध्यवलिया है जो बाद में मझौली स्टेट हो गया. कहा जाता है कि भगवान राम की बारात लौटते समय यहां विश्राम के लिए रुकी थी.

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मझौली स्टेट में तीन दरवाजों का मिथक आज भी कायम है और नगर के सभी पुराने घरों में तीन दरवाजे हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि पूरा कस्बा सूर्यभेदी है इसलिए मकानों में तीन दरवाजे हैं. किसी संत या वास्तुविद ने सलाह दी कि सूर्यभेद का प्रभाव कम करने के लिए तीन दरवाजे जरूरी हैं. इसकी पहचान गुरू द्रोणाचार्य के पुत्र अश्वत्थामा की तपोस्थली के रूप में भी है. महाभारत कालीन प्रमुख पात्र और गुरु द्रोणाचार्य के पुत्र की तपोस्थली भगवान शिव का पौराणिक मंदिर दीर्घेश्वरनाथ नाथ भी सलेमपुर के मझौली स्टेट में है. ऐसी मान्यता है कि अश्वत्थामा यहां पूजा करने आते हैं.

राजनीतिक पृष्ठभूमि

सलेमपुर विधानसभा सीट की राजनीतिक पृष्ठभूमि की बात करें तो ये सीट कांग्रेस का गढ़ रही है. इस सीट से सबसे ज्यादा पांच दफे कांग्रेस के उम्मीदवारों को जीत मिली है. बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के उम्मीदवार तीन, समाजवादी पार्टी (सपा) और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के उम्मीदवार दो-दो दफे इस सीट से जीते हैं.

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सलेमपुर विधानसभा सीट के चुनावी अतीत की बात करें तो कांग्रेस के बद्री मिश्रा इस सीट से पहले विधायक बने थे. 1957 में कांग्रेस के शिवबचन राय, 1962 में प्रजा सोशलिस्ट पार्टी और 1967, 1985 में कांग्रेस के टिकट पर अवधेश प्रताप मल्ल, 1969 में कांग्रेस के शिवबचन, 1974 में सोशलिस्ट पार्टी और 1977 में जनता पार्टी के टिकट पर हरिकेवल प्रसाद, 1980 में बीजेपी के दुर्गा प्रसाद मिश्र विधानसभा पहुंचे. 1989 में जनता दल के सुरेश यादव, 1991 में जनता दल के स्वामीनाथ यादव, 1993 में बसपा के आनंद यादव, 1996 में बसपा के मुराद लारी, 2002 में बसपा और 2007 में सपा के टिकट पर गजाला लारी विधायक निर्वाचित हुई थीं. 2008 के परिसीमन में ये सीट आरक्षित हो गई और 2012 में सपा के मनबोध प्रसाद विधाननसभा पहुंचे.

2017 का जनादेश

सलेमपुर विधानसभा सीट से 2017 के चुनाव में बीजेपी ने काली प्रसाद को उम्मीदवार बनाया. बीजेपी के काली प्रसाद ने अपनी निकटतम प्रतिद्वंदी सपा की विजय लक्ष्मी गौतम को 25654 वोट से हरा दिया था. बसपा के रणविजय तीसरे स्थान पर रहे थे. 2017 के विधानसभा चुनाव में सलेमपुर सीट कुल नौ उम्मीदवार मैदान में थे.

सामाजिक ताना-बाना

सलेमपुर विधानसभा सीट के सामाजिक समीकरणों की बात करें तो ये विधानसभा सीट दलित बाहुल्य मानी जाती है. इस विधानसभा क्षेत्र में दलित मतदाताओं की तादाद अधिक है. सलेमपुर विधानसभा सीट पर कुल करीब तीन लाख मतदाता हैं. इस सीट पर ब्राह्मण, क्षत्रिय, भूमिहार, कुर्मी, पाल और कायस्थ मतदाता भी अच्छी तादाद में हैं.

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विधायक का रिपोर्ट कार्ड

सलेमपुर विधानसभा सीट से बीजेपी के विधायक काली प्रसाद का जन्म 1967 के देवकली गांव में हुआ था. इनकी शादी स्वर्णलता देवी से 1979 में हुई थी. उनके दो बेटे अखिल कुमार और अजेंद्र कुमार और एक बेटी है. ये अनुसूचित जाति से आते हैं. इन्होंने 1990 में संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय वाराणसी से ग्रेजुएशन की डिग्री प्राप्त की थी. काली प्रसाद 1985 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े और 1995 में क्षेत्र पंचायत सदस्य निर्वाचित होकर भागलपुर ब्लॉक के ब्लॉक प्रमुख बने.

काली प्रसाद 2002 में भी क्षेत्र पंचायत सदस्य निर्वाचित हुए और इनकी पत्नी ग्राम प्रधान निर्वाचित हुईं. साल 2005 में जिला पंचायत सदस्य का चुनाव जीते और इसके बाद जिला महामंत्री और क्षेत्रीय मंत्री के रुप में बीजेपी संगठन में कार्य किया. 2017 के चुनाव में बीजेपी ने इन्हें विधानसभा का टिकट दिया और ये चुनाव जीतकर विधायक भी बन गए.

 

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