Chandpur Assembly Seat: 2002 में टूट गया था हर चुनाव में विधायक बदलने का ट्रेंड, इस बार क्या होगा?

चांदपुर विधानसभा सीट की राजनीतिक पृष्ठभूमि की बात करें तो इस सीट पर कभी किसी एक दल का वर्चस्व नहीं रहा. यहां की जनता हर चुनाव में विधायक बदलती रही थी लेकिन ये ट्रेंड 2002 के चुनाव में टूट गया.

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यूपी Assembly Election 2022 चांदपुर विधानसभा सीट यूपी Assembly Election 2022 चांदपुर विधानसभा सीट

संजीव शर्मा

  • बिजनौर,
  • 25 दिसंबर 2021,
  • अपडेटेड 3:42 PM IST
  • बीजेपी की कमलेश सैनी हैं चांदपुर विधानसभा सीट से विधायक
  • स्वामी ओमवेश और इकबाल ठेकेदार 2-2 दफे रहे विधायक

यूपी के बिजनौर जिले की चांदपुर विधानसभा सीट को मिनी छपरौली के नाम से जाना जाता है. इस इलाके की पहचान गन्ना बेल्ट के रूप में भी है. इस इलाके में गन्ने की पैदावार बहुत ज्यादा हुआ करती थी और खांडसारी उद्योग यहां का प्रसिद्ध उद्योग था. इस इलाके में गुड़ और चीनी बनाने के क्रशर बहुत थे जो अब धीरे-धीरे समाप्त हो रहे हैं.

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चांदपुर क्षेत्र बिजनौर जिला मुख्यालय से 35 किलोमीटर दूर मेरठ और अमरोहा जिले की सीमा से सटा है. चांदपुर में एक रेलवे स्टेशन भी है जहां से हर रोज चार ट्रेन गुजरती है. नारनौर-दतियाना रोड पर एक बड़े पुल का निर्माण हुआ है जो चांदपुर को सीधे मवाना से जोड़ता है. इसके निर्माण से चांदपुर की दूरी मेरठ और दिल्ली से कम हो गई है. इलाके की 30 फीसदी आबादी गंगा खादर क्षेत्र से आती है. यहां से गंगा नदी भी गुजरती है और गढ़मुक्तेश्वर की तरफ जाती हैं.

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ये क्षेत्र हर साल बाढ़ से भी प्रभावित होता है और इसके साथ-साथ इसकी पृष्ठभूमि महाभारत से भी जुड़ती है. इस क्षेत्र में एक गांव सेंदवार भी आता है जो महाभारत काल में हस्तिनापुर का सैन्य द्वार हुआ करता था. हस्तिनापुर की  सैन्य छावनी इसी क्षेत्र में हुआ करती थी. गंगा पार करते ही हस्तिनापुर का क्षेत्र शुरू हो जाता है.

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राजनीतिक पृष्ठभूमि

चांदपुर विधानसभा सीट की राजनीतिक पृष्ठभूमि की बात करें तो इस सीट पर कभी किसी एक दल का वर्चस्व नहीं रहा. यहां की जनता हर चुनाव में विधायक बदलती रही थी लेकिन ये ट्रेंड 2002 के चुनाव में टूट गया. साल 1996 से 2017 के बीच हुए पांच चुनाव की बात करें तो मतदाताओं ने जिसे भी विधानसभा भेजा, उसे दो बार भेजा.

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चांदपुर विधानसभा सीट से 1996 में जाट नेता स्वामी ओमवेश पहली दफे निर्दलीय जीते थे. 2002 के विधानसभा चुनाव में भी स्वामी ओमवेश लोक दल के टिकट पर विधानसभा पहुंचने में सफल रहे. तब लोक दल और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का गठबंधन था. बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के इकबाल ठेकेदार भी इस सीट से 2007 और 2012 में विधायक रहे.

2017 का जनादेश

चांदपुर विधानसभा सीट से साल 2017 के विधानसभा चुनाव में बसपा के इकबाल ठेकेदार के सामने बीजेपी ने महिला उम्मीदवार कमलेश सैनी को टिकट दिया. बीजेपी के कमलेश सैनी ने बसपा के इकबाल ठेकेदार को पटखनी दे दी. बीजेपी की कमलेश सैनी ने बसपा के इकबाल ठेकेदार को 35 हजार से अधिक वोट के अंतर से हरा दिया.

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सामाजिक ताना-बाना

चांदपुर विधानसभा सीट के सामाजिक समीकरणों की बात करें तो ये सीट मुस्लिम और जाट बाहुल्य सीट रही है. इस सीट पर मुस्लिम और जाट मतदाताओं के बाद सैनी और अनुसूचित जाति जनजाति के मतदाताओं की तादाद अधिक है. ब्राह्मण, चौहान और वैश्य बिरादरी के मतदाता भी इस सीट का चुनाव परिणाम निर्धारित करने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं. चांदपुर विधानसभा क्षेत्र में करीब सवा तीन लाख मतदाता हैं.

विधायक का रिपोर्ट कार्ड

चांदपुर विधानसभा सीट से विधायक कमलेश सैनी का जन्म चांदपुर क्षेत्र के गांव हिलालपुर उर्फ बहावलपुर में नेपाल सैनी के घर हुआ था. इनका बचपन आर्थिक तंगी के बीच  बीता. गांव में ही प्राथमिक शिक्षा ग्रहण करने के बाद इन्होंने चांदपुर के गुलाब सिंह डिग्री कॉलेज से उच्च शिक्षा ग्रहण की. कमलेश सैनी ने इंटर पास करते ही किराए का मकान लेकर बच्चों को शिक्षित करने का बीड़ा उठाया. उन्होंने क्षेत्र के 13 गांव में विद्यालय चलाए और कई साल तक आंगनबाड़ी कार्यकत्री के रूप में भी काम किया. कमलेश ने एलआईसी एजेंट के तौर पर कार्य किया. कमलेश सैनी की शादी बिलना गांव के हरि राज सैनी के साथ हुई.

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कमलेश सैनी साल 2000 और 2005 में जिला पंचायत सदस्य रहीं और 2012 में बीजेपी की कार्यवाहक जिला अध्यक्ष भी रहीं. 2013 से लगातार पश्चिम उत्तर प्रदेश  संगठन की उपाध्यक्ष भी रहीं और 2017 के विधानसभा चुनाव में विधायक निर्वाचित हुईं. पहली बार विधायक बनी कमलेश सैनी अपने कार्यकाल में हुए विकास कार्य गिनाते हुए दावा करती हैं कि इलाके में एक राजकीय इंटर कॉलेज, एक आईटीआई कॉलेज का निर्माण कराया है. चांदपुर क्षेत्र में मिनी स्टेडियम का प्रस्ताव भी भिजवाया है.

 

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