सीताराम येचुरी बोले- हमने मिलकर काम किया लेकिन BJP के सामने फेल हो गए

सीताराम येचुरी से जब हार की जिम्मेदारी के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि हम सबने एक साथ मिलकर काम किया था. इसलिए इसके लिए कोई एक जिम्मेदार नहीं हो सकता.

Advertisement
सीताराम येचुरी (फाइल फोटो) सीताराम येचुरी (फाइल फोटो)

aajtak.in / पुनीत सैनी

  • नई दिल्ली,
  • 27 मई 2019,
  • अपडेटेड 6:26 PM IST

लोकसभा चुनाव में विपक्षी पार्टियों का सूपड़ा साफ हो गया है. यहां तक कई राज्यों में सत्तारूढ़ पार्टियां भी कोई कमाल नहीं दिखा पाईं. ऐसी पार्टियों में सीपीएम भी है जिसका केरल में सफाया हो गया. राज्य की कुल 20 सीटों में से सीपीएम को सिर्फ एक सीट पर जीत प्राप्त हुई है.

सीपीएम महासचिव सीताराम येचुरी से जब हार की जिम्मेदारी के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि हम सबने एक साथ काम किया था. इसलिए इसके लिए कोई एक जिम्मेदार नहीं हो सकता. सबरीमाला विवाद पर उन्होंने कहा कि केरल सरकार के सबरीमाला पर स्टैंड पर भी विचार किया है अगर इस मुद्दे ने केरल में वामपंथ के खिलाफ काम किया है.

Advertisement

सीपीएम के बयान को पढ़ते हुए सीताराम येचुरी ने बताया कि बीजेपी पिछले 5 साल में गरीबी, भूखमरी से अलग बीजेपी एक अलग मुद्दा खड़ा करने में कामयाब रही है. आत्मनिरीक्षण करने के लिए 7 जून को दिल्ली में सीपीएम की सेंट्रल कमेटी मुलाकात करेगी. मोदी के व्यक्तित्व को स्थापित करने के लिए मीडिया भी काम कर रहा है, इसमें बड़े पैमाने पर पैसे का इस्तेमाल किया जा रहा है.

येचुरी ने कहा कि झूठी कहानी रचने में चुनाव आयोग की भी अहम भूमिका है. इस प्रक्रिया को रचने के लिए आरएसएस से जुड़े अन्य विशाल नेटवर्क के संगठनों ने भी मदद प्रदान की. त्रिपुरा और बंगाल में हिंसक माहौल के बीच चुनाव कराए गए. सीपीएम के मतदाताओं को मतदान नहीं करने दिया गया. नतीजों के बाद, अल्पसंख्यकों पर हमले की खबरें हरियाणा और मध्य प्रदेश से आने लगीं.

Advertisement

आगे बोलते हुए सीताराम येचुरी ने कहा कि पीएम मोदी ने कहा था कि नई सरकार सबके साथ चलेगी और सभी वर्गों में विश्वास कायम करेगी, लेकिन इस प्रकार की घटनाएं उनके बयान से बिल्कुल विपरीत हैं. इस चुनावों में कई विपक्षी पार्टियों को नुकसान हुआ. इसमें से वामपंथी पार्टियां भी एक हैं. बीजेपी ने रोजी-रोटी, गरीबी से अलग एक अन्य मुद्दा खड़ा कर दिया जो सांप्रदायिक राष्ट्रवाद पर आधारित था.

उन्होंने कहा कि गैर यादव ओबीसी और गैर जाटव दलितों को यूपी में अलग-थलग कर दिया गया. ये सब सिर्फ धन शक्ति के इस्तेमाल के सहारे पूरा किया जा सकता था. बीजेपी सरकार को 50 प्रतिशत वोट प्राप्त हुए इसलिए महागठबंधन काम नहीं कर सका. हम बीजेपी के एजेंडे को काउंटर करने में विफल रहे. ध्रुवीकरण भी हुआ.

दो दिवसीय बैठक में केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन, त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री माणिक सरकार, सीपीएम महासचिव सीताराम येचुरी और पार्टी के वरिष्ठ नेता प्रकाश करात समेत सभी राज्यों के पोलित ब्यूरो सदस्य शामिल हैं. लोकसभा चुनाव में सूपड़ा साफ होने के बाद सीपीएम के सामने अब राजनीतिक परिप्रेक्ष्य में अस्तित्व बचाने की चुनौती है और इस मंथन के जरिए पार्टी समझने की कोशिश कर रही है कि आखिर किन वजहों के चलते वह हाशिए पर चली गई.

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement