Shahjahanpur Lok Sabha Chunav Result 2019: भाजपा के अरुण कुमार विजयी

Lok Sabha Chunav Shahjahanpur Result 2019: भाजपा के अरुण कुमार सागर ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी गठबंधन उम्मीदवार बसपा के अमर चंद्र जौहर को 268418 वोटों से परास्त किया.

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aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 23 मई 2019,
  • अपडेटेड 2:32 PM IST

17वीं लोकसभा चुनाव के तहत उत्तर प्रदेश की शाहजहांपुर सीट से भाजपा के अरुण कुमार सागर ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी गठबंधन उम्मीदवार बसपा के अमर चंद्र जौहर को 268418 वोटों से परास्त किया है. इस सीट पर सपा, बीजेपी और कांग्रेस के बीच त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिला.

कब  और  कितनी  हुई  वोटिंग

शाहजहांपुर  सीट  पर  वोटिंग चौथे चरण  में 29 अप्रैल  को  हुई  थी,  इस सीट पर 56.07  फीसदी लोगों ने अपने मताधिकार  का  इस्तेमाल  किया  था. इस सीट पर कुल  2112860 मतदाता हैं, जिसमें से 1184665 मतदाताओं ने अपने वोट डाले हैं.

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प्रमुख  उम्मीदवार

अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित इस सीट पर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी अरुण कुमार सागर लड़ रहे थे, जिनका मुख्य मुकाबला बसपा के  बहुजन समाज पार्टी के अमर चंदर जौहर और कांग्रेस के कांग्रेस ने ब्रह्मस्वरूप सागर से था. इस सीट पर कुल 14 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे थे.

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2014 का चुनाव

2014 के लोकसभा चुनाव में शाहजहांपुर सीट पर 57.09 फीसदी वोटिंग हुई थी, जिसमें बीजेपी प्रत्याशी कृष्ण राज को 46.45 फीसदी (5,25,132) वोट मिले थे और और उनके निकटतम बसपा प्रत्याशी उमेद सिंह कश्यप को  25.62 फीसदी (2,89,603)  मिले थे. इसके अलावा सपा के मिथलेश कुमार 21.49 फीसदी (2,42,913) वोट मिले थे. इस सीट पर बीजेपी की कृष्ण राज ने 2,35,529 मतों से जीत दर्ज की थी.

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शाहजहांपुर का इतिहास

शाहजहांपुर लोकसभा सीट के राजनीतिक पृष्ठभूमि की बात करें तो 1962 के लोकसभा चुनाव के दौरान यह संसदीय सीट अस्तित्व में आई. शुरुआती तीन चुनाव में कांग्रेस ने जीत हासिल की, लेकिन 1977 में सरकार विरोधी लहर में कांग्रेस को यहां से भी हार का सामना करना पड़ा और जीत जनता दल के खाते में गई. हालांकि 3 साल बाद 1980 में जब देश में फिर चुनाव हुए तो कांग्रेस ने जीत के साथ यहां वापसी की. 1980 के बाद 1984 में भी कांग्रेस के टिकट पर जितेंद्र प्रसाद ने जीत हासिल की.

90 के दशक में राम लहर के दौर में बीजेपी ने तेजी से यूपी में अपने पैर पसारे और बड़ी पार्टी के रूप में उभरकर सामने आई. 1989 और 1991 के चुनाव में बीजेपी ने जीत हासिल की. हालांकि समाजवादी पार्टी ने 1996 के चुनाव में जीत दर्ज कर बीजेपी को झटका दिया. 2 साल बाद 1998 में बीजेपी फिर यहां से जीत गई, लेकिन 1999 में चुनाव में कांग्रेस के जितेंद्र प्रसाद वापसी करने में कामयाब हो गए. 2001 में उनके निधन के बाद 2004 के आम चुनाव में उनके बेटे जितिन प्रसाद इस सीट से चुनाव जीते. 2009 के लोकसभा चुनाव में जीत समाजवादी पार्टी के खाते में गई, लेकिन 2014 के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने फिर इस सीट पर जीत हासिल की.

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