इस बार संसदीय चुनाव में किसी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने के कयास के बीच कांग्रेस क्षेत्रीय दलों के साथ न केवल गठबंधन में सरकार बनाने की रणनीति पर काम कर रही है बल्कि उसने चुनाव पूर्व भी ऐसी पार्टियों के साथ गठजोड़ बनाने की कोशिश की.
मगर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एम वीरप्पा मोइली ने कहा है कि वह राहुल गांधी की अगुवाई वाले गठबंधन की मदद से क्षेत्रीय पार्टियों द्वारा सरकार गठन की संभावना से इनकार तो नहीं करते हैं, लेकिन ऐसी सरकार स्थिर नहीं होगी और लंबे समय तक नहीं चलेगी. उन्होंने कहा कि अतीत में छोटे दलों द्वारा सरकार की अगुवाई-चाहे वह वीपी सिंह की अगुवाई वाली सरकार रही हो या चरण सिंह या चंद्रशेखर की अगुवाई वाली, के साथ तीसरे मोर्चे का प्रयोग विफल रहा है.
मोइली ने समाचार एजेंसी पीटीआई-भाषा से कहा, 'कोई भी भावी सरकार एक राष्ट्रीय दल द्वारा क्षेत्रीय पार्टियों और सरकार की अगुवाई करने से ही स्थिर होगी.जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें कांग्रेस के समर्थन से क्षेत्रीय दलों के सरकार बनाने की संभावना नजर नहीं आती है तो पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा, मैं संभावना से इनकार नहीं कर रहा है, लेकिन यह मजबूत सरकार नहीं होगी. उस सरकार में स्थिरता नहीं होगी.'
इस चुनाव से त्रिशंकु जनादेश आने की कुछ खबरों के बीच उन्होंने दलील दी कि कोई भी सरकार तब स्थिर होगी जब उसकी कमान किसी राष्ट्रीय दल के हाथों में हो. कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, अन्यथा (तीसरा मोर्चा) सरकार स्थिर नहीं हो सकती है, यह कभी स्थिर नहीं रही है, वी पी सिंह, चंद्रशेखर जैसे मजबूत नेताओं की भी ऐसी सरकार स्थिर नहीं रही. बस कुछ महीने या एक दो साल की बात होती है कि (सरकार गिर जाती है).
जब उनसे इन चर्चाओं के बारे में पूछा गया कि यूपीए और एनडीए से इतर क्षेत्रीय दल कांग्रेस से अधिक सीटें जीत सकते हैं तो उन्होंने कहा कि सवाल है कि उन्हें एकजुट रखेगा कौन. उन्होंने कहा, उन्हें एक साथ रखने के लिए साझा कारक होना चाहिए अन्यथा वह बिखरा हुआ समूह होगा. क्षेत्रीय दलों को एकजुट रखने के लिए एक राष्ट्रीय दल होगा.
मोइली ने दावा किया, क्षेत्रीय दलों को बीजेपी के खिलाफ एकजुट होने की बाध्यत होगी. ऐसे में क्षेत्रीय दलों के साथ अच्छी (यूपीए) सरकार की संभावना बिल्कुल है. उन्होंने कहा, यदि कांग्रेस नीत यूपीए को बहुमत नहीं मिलता है तो भी पार्टी को राष्ट्र के खातिर और स्थिर सरकार देने के लिए (ऐसे दल जो भले यूपीए का हिस्सा नहीं है लेकिन सरकार गठन के लिए उसके साथ आने को इच्छुक हों, के साथ मिलकर) सरकार बनानी होगी.
कांग्रेस नेता ने कहा कि सरकार गठन करना बाध्यता होगी, आखिरकार, राहुल गांधी...हमारी विचाराधारा का ऐसे गठजोड़ (की विचारधारा) के साथ मिलान नहीं होता है लेकिन देश की एकता की खातिर मैं समझता हूं कि राहुल गांधी को राजी होना ही होगा.
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