पीलीभीत लोकसभा सीट: कौन-कौन है उम्मीदवार, किसके बीच होगी कड़ी टक्कर

पीलीभीत लोकसभा सीट पर इस बार कुल 13 उम्मीदवार मैदान में हैं, लेकिन मुख्य मुकाबला बीजेपी के वरुण गांधी, समाजवादी पार्टी के हेमराज वर्मा और जनता दल यूनाइटेड के डॉक्टर भरत के बीच है. यहां से 6 निर्दलीय उम्मीदवार भी चुनावी मैदान में हैं. बीजेपी ने इस बार लोकसभा चुनाव में सीटों की अदला-बदली करते हुए मेनका गांधी को पीलीभीत की जगह सुल्तानपुर से जबकि वरुण गांधी को सुल्तानपुर की जगह पीलीभीत से मैदान में उतारा है.

Advertisement
प्रतीकात्मक तस्वीर प्रतीकात्मक तस्वीर

सुरेंद्र कुमार वर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 14 अप्रैल 2019,
  • अपडेटेड 3:28 PM IST

उत्तर प्रदेश में अमेठी और रायबरेली के अलावा पीलीभीत वो लोकसभा सीट है जिसे देश के सबसे बड़े राजनीतिक परिवार गांधी परिवार का गढ़ माना जाता है और एक बार फिर यह गांधी परिवार जनता के बीच है. पीलीभीत लोकसभा सीट पर पिछले तीन दशक से इंदिरा गांधी के दूसरे बेटे संजय गांधी की पत्नी मेनका गांधी और बेटे वरुण गांधी का ही राज रहा है. पिछली बार मेनका गांधी ने यहां से चुनाव लड़ा था और इस बार उनके बेटे वरुण गांधी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं.

Advertisement

पीलीभीत लोकसभा सीट पर इस बार कुल 13 उम्मीदवार मैदान में हैं, लेकिन मुख्य मुकाबला बीजेपी के वरुण गांधी, समाजवादी पार्टी के हेमराज वर्मा और जनता दल यूनाइटेड के डॉक्टर भरत के बीच है. यहां से 6 निर्दलीय उम्मीदवार भी चुनावी मैदान में हैं. बीजेपी ने इस बार लोकसभा चुनाव में सीटों की अदला-बदली करते हुए मेनका गांधी को पीलीभीत की जगह सुल्तानपुर से जबकि वरुण गांधी को सुल्तानपुर की जगह पीलीभीत से मैदान में उतारा है.

1984 के बाद कांग्रेस नहीं

पीलीभीत लोकसभा सीट के संसदीय इतिहास की बात करें तो 1951 में लोकसभा चुनाव में भले ही कांग्रेस ने यहां से जीत हासिल की हो, लेकिन उसके बाद 1957, 1962, 1967 के चुनाव में प्रजा सोशलिस्ट पार्टी ने जीत दर्ज की थी. 1971 में कांग्रेस को फिर से यहां पर जीत मिली, लेकिन 1977 में चली सरकार विरोधी लहर में कांग्रेस की करारी हार हो गई.

Advertisement

1980 और 1984 के चुनाव में कांग्रेस ने एक बार फिर यहां से बड़ी जीत हासिल की, लेकिन उसके बाद कांग्रेस यहां कभी वापसी नहीं कर सकी. संजय गांधी की मौत के बाद गांधी परिवार से अलग हुई मेनका गांधी ने 1989 में जनता दल के टिकट पर यहां से चुनाव लड़ा और जीता. लेकिन दो साल बाद 1991 में हुए चुनाव में बीजेपी ने यहां से जीत की शुरुआत की.

मेनका गांधी ने 1996 से 2004 तक लगातार चार बार यहां से चुनाव जीता, इनमें दो बार निर्दलीय और 2004 में बीजेपी के टिकट से चुनाव में जीत हासिल की थी. 2009 में उन्होंने अपने बेटे वरुण गांधी के लिए यह सीट छोड़ दी और वरुण यहां से सांसद चुने गए. लेकिन 2014 में एक बार फिर वह यहां वापस आईं और छठीं बार यहां से सांसद चुनी गईं. वह केंद्र में मंत्री भी बनीं.

पीलीभीत लोकसभा क्षेत्र में हिंदू वोटरों के साथ-साथ मुस्लिम वोटरों का भी खास प्रभाव है. पीलीभीत में 30 फीसदी आबादी मुस्लिमों की है. 2014 के चुनाव में पीलीभीत में 16 लाख से अधिक वोटर थे, जिनमें 9 लाख पुरुष और 7 लाख से अधिक महिला मतदाता शामिल थे. इस लोकसभा क्षेत्र में 5 विधानसभा सीटें बहेड़ी, पीलीभीत, बड़खेड़ा, पूरनपुर और बिसालपुर शामिल हैं. 2017 के विधानसभा चुनाव में सभी पांच सीटों पर बीजेपी ने ही बाजी मारी थी.

Advertisement

2014 के लोकसभा चुनाव में पीलीभीत में कुल 62.9% मतदान हुआ जिसमें बीजेपी की मेनका गांधी को 52 फीसदी से भी ज्यादा वोट मिले और उन्होंने चुनाव में एकतरफा जीत हासिल की. मेनका गांधी को 52.1% और समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार को 22.8% वोट हासिल हुए थे.

चुनाव की हर ख़बर मिलेगी सीधे आपके इनबॉक्स में. आम चुनाव की ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए सब्सक्राइब करें आजतक का इलेक्शन स्पेशल न्यूज़लेटर

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement