असम की लखीमपुर लोकसभा सीट पर बीजेपी प्रत्याशी प्रधान बरुआ की जीत हुई है. उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार अनिल बोरगोहेन को हराया है. बरुवा की जीत 350551 वोटों के बड़े अंतर से हुई है. 2014 में इस संसदीय क्षेत्र से सर्वानंद सोनोवाल सांसद थे. उन्होंने 292138 वोटों से जीत हासिल की थी. बरुआ 17वीं लोकसभा के लिए चुने गए हैं.
कब और कितनी हुई वोटिंग
इस सीट पर वोटिंग पहले चरण में 18 अप्रैल को हुई थी जिसमें क्षेत्र के कुल 17,04,447 वोटरों में से 12,79,119 यानी 75.05 फीसदी लोगों ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया था.
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कौन-कौन प्रमुख उम्मीदवार
सामान्य वर्ग वाली इस सीट पर कांग्रेस से अनिल बोरगोहेन, राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) से अनूप प्रतिम बोर बरुआ, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) से अमिय कुमार हंदिकी, सोशलिस्ट यूनिटी सेंटर ऑफ इंडिया (कम्युनिस्ट) से हेमकांत मिरि, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी से अरूप कलिता प्रत्याशी थे. भारतीय जनता पार्टी से प्रधान बरुआ, असम दृष्टि पार्टी से दिलीप मोरन, वोटर्स पार्टी इंटरनेशनल से भूपेन नारा प्रत्याशी थे. वहीं, अंबज उदीन और प्रभु लाल वैष्णव निर्दलीय उम्मीदवार थे. लखीमपुर लोकसभा सीट से कुल 11 प्रत्याशी चुनाव मैदान में थे.
2014 का चुनाव
पिछले चुनाव में इस सीट पर 77.71 फीसदी वोटिंग हुई थी. असम की लखीमपुर सीट पर 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी प्रत्याशी सर्वानंद सोनोवाल ने जीत दर्ज की थी. लेकिन 2016 में हुए विधानसभा चुनाव के बाद उन्हें बीजेपी हाईकमान ने राज्य का मुख्यमंत्री बनाया. इसके चलते उन्हें यह सीट छोड़नी पड़ी. इसके बाद हुए उपचुनाव में भी बीजेपी प्रत्याशी प्रधान बरुआ ने जीत दर्ज की. लखीमपुर संसदीय सीट में 9 विधानसभा सीटें हैं जिनमें से 5 पर बीजेपी का कब्जा है.
सामाजिक ताना-बाना
असम की लखीमपुर संसदीय सीट में 2011 की जनगणना के अनुसार जनसंख्या 24 लाख 22 हजार 695 है. इसमें 92 फीसदी से अधिक आबादी ग्रामीण और 7 फीसदी से अधिक आबादी शहरी इलाकों में रहती है. यहां 6.57 फीसदी आबादी एससी और 27.5 फीसदी आबादी एसटी है. 2014 में इस सीट पर कुल मतदाताओं की संख्या 14 लाख 31 हजार 80 थी. इसमें पुरुषों की संख्या 7 लाख 35 हजार 340 और महिलाओं की संख्या 6 लाख 95 हजार 740 थी. 2018 की वोटर लिस्ट के मुताबिक यहां 16 लाख 21 हजार 647 मतदाता हैं.
सीट का इतिहास
1967 में हुए पहले लोकसभा चुनाव में इस सीट पर कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी. अगले दो चुनावों यानी 1971 और 77 के चुनाव में भी कांग्रेस प्रत्याशियों ने यहां से जीत दर्ज की. 1984 में असम गण परिषद ने यहां से विजय हासिल की. इसके बाद फिर कांग्रेस ने अगल चार चुनावों में इस सीट पर कब्जा बरकरार रखा. 1999 के चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी रानी नाराह ने सर्वानंद सोनोवाल को 54 हजार 523 मतों से हराया था. सोनोवाल ने ये चुनाव असम गण परिषद के टिकट से लड़ा था. 2004 का चुनाव एजीपी प्रत्याशी अरुण कुमार सरमाह ने जीता. 2009 के चुनाव में कांग्रेस ने एक बार फिर रानी नाराह को टिकट दिया. रानी पार्टी के भरोसे पर फिर खरी उतरीं. उन्होंने तीसरी बार संसद का रुख किया. इसके बाद 2014 में बीजेपी प्रत्याशी सर्वानंद सोनोवाल को बंपर जीत मिली. भारी मतों से मिली जीत का उन्हें बड़ा ईनाम मिला. सोनोवाल को मोदी सरकार ने अपने मंत्रिमंडल में शामिल किया.
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