लोकसभा चुनाव 2019 के लिए ओडिशा की कालाहांडी लोकसभा सीट पर 23 मई को मतगणना हुई. इस सीट पर बीजेपी के बसंत कुमार पांडा ने बीजेडी के पुष्पेंद्र सिंह को 26 हजार 814 वोटों से हराया.
इस सीट पर पहले चरण के तहत 11 अप्रैल को मतदान हुआ था. यहां 2014 में बीजद ने कब्जा किया था. इस सीट पर कांग्रेस के उम्मीदवार पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस नेता भक्त चरण दास भी मैदान में थे. बीजेपी की तरफ से बसंत कुमार पांडा अपनी किस्मत आजमा रहे थे. इस सीट पर 2014 में पहली बार बीजू जनता दल ने खाता खोला था.
| O.S.N. | Candidate | Party | EVM Votes | Postal Votes | Total Votes | % of Votes |
| 1 | PUSPENDRA SINGH DEO | Biju Janata Dal | 405641 | 619 | 406260 | 33.08 |
| 2 | PREMANANDA BAG | Bahujan Samaj Party | 10416 | 32 | 10448 | 0.85 |
| 3 | BASANTA KUMAR PANDA | Bharatiya Janata Party | 429710 | 3364 | 433074 | 35.26 |
| 4 | BHAKTA CHARAN DAS | Indian National Congress | 317915 | 1287 | 319202 | 25.99 |
| 5 | KAMALINI YADAV | Bahujan Mukti Party | 15833 | 31 | 15864 | 1.29 |
| 6 | CHHABILAL NIAL | Ambedkarite Party of India | 12391 | 18 | 12409 | 1.01 |
| 7 | HATIRAM DURGA | Independent | 9828 | 8 | 9836 | 0.8 |
| 8 | NOTA | None of the Above | 21172 | 27 | 21199 | 1.73 |
| Total | 1222906 | 5386 | 1228292 |
इस बार कितनी हुई वोटिंग
2019 लोकसभा चुनाव में इस सीट पर 75.82% वोटिंग हुई. 2014 लोकसभा चुनाव में इस सीट पर 14 लाख 74 हजार 135 मतदाता थे. यहां पर पुरुष मतदाताओं की संख्या 7 लाख 50 हजार 694 है, जबकि महिला मतदाताओं की संख्या 7 लाख 23 441 है. 2014 के लोकसभा चुनाव में इस सीट पर 75.81 फीसदी मतदान हुआ था.
Lok Sabha Election Results 2019 LIVE: देखें पल-पल का अपडेट
कौन-कौन हैं प्रमुख उम्मीदवार
कांग्रेस के भक्त चरण दास, बीजू जनता दल (बीजद) के पुष्पेंद्र सिंह देव और बीजेपी के बसंत कुमार पांडा के बीच त्रिकोणीय मुकाबला था. इसके अलावा बहुजन समाज पार्टी, अंबेडकराइट पार्टी ऑफ इंडिया सहित एक निर्दलीय उम्मीदवार भी मैदान थे.
2014 का जनादेश
इस सीट पर 2014 में पहली बार बीजू जनता दल ने खाता खोला. हालांकि 2014 में इस सीट पर चुनाव जीतने वाले अर्का केशरी देव के पिता बिक्रम केशरी देव बीजेपी के टिकट पर कालाहांडी से 3 बार सांसद रह चुके थे. बिक्रम केशरी देव का 7 अक्टूबर 2009 में निधन हो गया था. इसके बाद अर्का केशरी देव 2013 में बीजेडी में शामिल हो गए.
सामाजिक ताना-बाना
ज्यादा साल नहीं गुजरे जब कालाहांडी का नाम सुनते ही दिमाग में एक ऐसी तस्वीर उभरती थी, जहां भूख, अभाव और बेचारगी पसरी हुई थी. लेकिन पिछले 10 से 15 सालों में कालाहांडी इस धारणा को तोड़ने में सफल हुआ है. अब यहां से भूखमरी की खबरें सुनने को नहीं मिलती हैं. पर आदिवासी बहुल ओडिशा जिले की अधिकतर आबादी आज भी लाल कार्ड के तहत मिलने वाले अनाज से ही अपना पेट भरती है. यहां के लोग अभी भी गरीबी के दुष्चक्रसे बाहर नहीं निकल पाए हैं.
कालाहांडी जिले की अर्थव्यवस्था खेती पर आधारित है. यहां पर धान और कपास की फसल प्रमुख रुप से होती है. अगर मॉनसून के महीने को छोड़ दें तो इस क्षेत्र का मौसम लगभग गरम ही रहता है. भारतीय कृषि मानसून का जुआ है. ये कहावत यहां एक दम सटीक बैठती है. बारिश ना होने की वजह से किसानों को अक्सर नुकसान उठाना पड़ता है. यहां पर वन से मिलने वाले उपज भी किसानों के आय का जरिया है. इनमें महुआ, केंदु पत्ता, लकड़ी और बांस प्रमुख है. कालाहांडी से पेपर की मिल के लिए कच्चे माल की सप्लाई होती है.
कालाहांडी की जनसंख्या लगभग 21 लाख 87 हजार है. यहां की लगभग 93 फीसदी जनसंख्या गांवों में रहती है. पूरी आबादी का 16.86 प्रतिशत अनुसूचित जाति है, जबकि लगभग 30 प्रतिशत अनुसूचित जनजाति है. कालाहांडी जिले की साक्षरता 59.22 प्रतिशत है.
सीट का इतिहास
बहरहाल, कालाहांडी लोकसभा सीट पर 1990 के बाद बीजेपी, कांग्रेस और बीजू जनता दल का दबदबा रहा है. इससे पहले इस सीट पर गणतंत्र परिषद और स्वतंत्र पार्टी के उम्मीदवार जीतते रहे हैं. आजादी के बाद पहली बार 1952 में हुए लोकसभा चुनाव में गणतंत्र परिषद का प्रत्याशी चुनाव जीता. 1957 में भी गणतंत्र परिषद के उम्मीदवार को जीत मिली. इसके बाद 1962 से लेकर 1971 तक स्वतंत्र पार्टी के प्रताप केशरी देव चुनाव जीतते रहे. 1977 में स्वतंत्र देव ही निर्दलीय चुनाव जीते. 1980 और 1984 के चुनाव में कांग्रेस को जीत मिली. 89 में जनता दल के टिकट पर भक्त चरण दास चुनाव जीते. 1991 में कांग्रेस के सुभाष चंद्र नायक ने जीत हासिल की. 1996 में भक्त चरण दास फिर चुनाव जीते, लेकिन इस बार वे समाजवादी जनता पार्टी (राष्ट्रीय) के सीट पर चुनाव लड़े थे.
1998 में भारतीय जनता पार्टी ने पहली बार इस सीट पर जीत हासिल की. विक्रम केशरी देव इस सीट से सांसद बने. इसके बाद मतदाताओं ने लगातार दो और बार उन्हें सांसद चुना. विक्रम केशरी देव बीजेपी के टिकट पर 1999 और 2004 का भी चुनाव जीते. 2009 के लोकसभा चुनाव में इस सीट पर कांग्रेस के टिकट पर भक्त चरण दास ने फिर वापसी की और चुनाव जीत गए.
चुनाव की हर ख़बर मिलेगी सीधे आपके इनबॉक्स में. आम चुनाव की ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए सब्सक्राइब करें आजतक का इलेक्शन स्पेशल न्यूज़ लेटर
aajtak.in