आगामी लोकसभा चुनाव से पहले गुटों में बंटी हरियाणा कांग्रेस एकजुट दिख रही है. प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा को प्रदेश में कांग्रेस की समन्वय समिति की कमान सौंपी गई है. दरअसल, हरियाणा में कांग्रेस को ज्यादा उम्मीदें हैं. इन उम्मीदों को पूरा करने में हुड्डा परिवार की अहम भूमिकदा रहेगी. दो बार के मुख्यमंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने हरियाणा की खट्टर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला हुआ है. पार्टी के सभी दिग्गज नेता एक साथ राज्य में रोडशो कर रहे हैं.
देश के आजाद होने के ठीक एक महीने बाद 15 सितंबर को जन्मे भूपेंद्र सिंह हुड्डा को उनके चाहने वाले भूमि पुत्र के नाम से पुकारते हैं. राजनीतिक पृष्टभूमि उन्हें विरासत में मिली. उनके दादा और पिता, दोनों सक्रिय रूप से राजनीति में रहे हैं. उनके पिता रणबीर सिंह एक विख्यात स्वतंत्रता सेनानी थे. हरियाणा के कुंजपुरा स्थित सैनिक स्कूल में हुड्डा ने स्कूली शिक्षा ग्रहण की. इसके बाद उन्होंने पंजाब यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन किया. इसके बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी से लॉ की डिग्री हासिल की.
तीन बार देवी लाल को दी थी मात
भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने 1972 में राजनीति में कदम रखा और कांग्रेस की सदस्यता हासिल की. शुरुआत में हुड्डा को हरियाणा के ब्लॉक कांग्रेस समिति का अध्यक्ष बनाया गया. इस पद पर वो पांच साल तक (1972-1977) रहे. इसके बाद उन्हें 1980 में हरियाणा प्रदेश युवा कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष के पद पर नियुक्त किया गया, जिसपर वो 1987 तक रहे.इसी दौरान उन्हें रोहतक पंचायत समिति और हरियाणा पंचायत परिषद का अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी सौंपी गई. इसके बाद उन्होंने लगातार 4 बार (1991, 1996, 1998 और 2004) में लोकसभा का चुनाव जीता और संसद पहुंचे. 1996 से 2001 तक हुड्डा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भी बनाए गए. इस बीच वो हरियाणा विधानसभा में विपक्ष के नेता भी रहे. हुड्डा ने लगातार तीन लोकसभा चुनावों में हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री चौधरी देवी लाल को मात दी थी.
श्वेता मिर्धा से हुई दीपेंद्र की शादी
भूपेंद्र हुड्डा की शादी 1976 में आशा दहिया के साथ हुई. इनके दो बच्चे हैं और दोनों विवाहित हैं. गौर करने वाली बात यह है कि हरियाणा की रोहतक लोकसभा सीट मोदी लहर में भी कांग्रेस ने अपने नाम करने में सफलता हासिल की थी. दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने इस सीट पर 1.7 लाख वोटों के भारी अंतर से जीत हासिल की थी.
भूपेंद्र सिंह हुड्डा के बेटे दीपेंद्र हुड्डा की शादी राजस्थान के बड़े जाट नेता नाथूराम मिर्धा की बेटी श्वेता मिर्धा से हुई है. नाथूराम मिर्धा पांच बार सांसद रहे हैं वहीं उनकी पुत्री श्वेता अमेरिका से पढ़ाई की है. इसके बाद श्वेता ने कई इंटरनेशनल कंपनियों के लिए काम किया है.
भूपेंद्र सिंह हुड्डा एक टीवी इंटरव्यू में बताते हैं कि उनके दादा समाज सेवा में रहे. आजादी के राष्ट्रीय आंदोलन में उन्होंने कांग्रेस का दामन थाम लिया और कांग्रेस जिला कमेटी के अध्यक्ष रहे. 1923 में उन्होंने स्वराज पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा जिसमें उन्हें हार मिली. इसके बाद लोगों ने उन्हें कहा कि उनके साथ गलत हुआ है और उन्हें इस चुनाव के खिलाफ पिटिशन डालना चाहिए.
इसके बाद उन्होंने लाहौर कोर्ट में याचिका दायर की और इनका मुकदमा लाला लाजपत राय ने लड़ा. वो बताते हैं कि उनके दादा के छोटे भाई को लाला लाजपत राय के पिताजी ने पढ़ाया था. वो रोहतक में शिक्षक थे. उसी समय से दोनों परिवारों के बीच नजदीकियां बढ़ीं.
वो बताते हैं कि 1921 में महात्मा गांधी रोहतक पहुंचे और वहां उन्होंने एक शिक्षण संस्थान ‘वैश्य संस्था’ की आधारशिला रखी. महात्मा गांधी ने अपने जीवन में एक मात्र इसी संस्था की आधारशिला रखी. महात्मा गांधी ने उस समय यहां एक सभा को संबोधित किया जिसमें करीब 25 हजार लोग एकत्रित हुए. इस सभा का आयोजन हुड्डा के दादा ने किया था.
अजीत तिवारी