Tankara Assembly Seat: टंकारा पडधरी में क्या बीजेपी हासिल कर पाएगी अपना खोया वर्चस्व?

टंकारा मोरबी जिले का एक छोटा सा शहर है. यह डेमी नदी के तट पर और मोरबी-राजकोट राजमार्ग पर स्थित है. राजकोट से 40 किलोमीटर और मोरबी से 20 किलोमीटर की दूरी पर यह स्थित है. टंकारा को आर्य समाज के लोगों के लिए एक पवित्र शहर माना जाता है क्योंकि टंकारा आर्य समाज के संस्थापक स्वामी दयानंद सरस्वती का जन्म स्थल है.

Advertisement
टंकारा में स्वामी दयानंद सरस्वती का हुआ था जन्म टंकारा में स्वामी दयानंद सरस्वती का हुआ था जन्म

aajtak.in

  • टंकारा,
  • 06 अप्रैल 2022,
  • अपडेटेड 3:31 PM IST
  • टंकारा पडधरी में बीजेपी का रहा है वर्चस्व
  • पाटीदार आंदोलन ने पिछली बार पहुंचाया था नुकसान

आर्य समाज के संस्थापक, महान चिंतक, समाज सुधारक और देशभक्त स्वामी दयानंद सरस्वती का जन्म गुजरात के टंकारा में हुआ था. दयानंद सरस्वती की जन्म भूमि टंकारा होने के बावजूद आज दिन तक इस पवित्र भूमि को यात्रा धाम का दर्जा नहीं मिला है. टंकारा में खेती मुख्य व्यवसाय है और कुछ कॉटन मिल यहां पर हैं जिसके चलते लोगों को रोजगार मिल जाता है. टंकारा पहले राजकोट जिले का हिस्सा था पर मोरबी अलग जिला बनने के बाद टंकारा मोरबी जिले का हिस्सा हो गया.  

Advertisement

गुजरात के टंकारा पडधरी विधानसभा सीटों पर ढाई दशक से भी ज्यादा समय से बीजेपी का दबदबा रहा है. इस सीट पर भाजपा के एक विधायक लगातार पांच बार चुनाव जीत कर विधायक रह चुके हैं. बीजेपी का गढ़ मानी जानी वाली इस सिट पर पिछले चुनाव में कांग्रेस ने बाजी मारी थी.

राजनीतिक पृष्ठभूमि

1990 से लेकर 2017 तक इस सीट पर भाजपा का दबदबा रहा है. 1990 में स्वर्गीय केशुभाई पटेल इस सीट से चुनाव लड़े, जीते और राज्य के मुख्यमंत्री बने. 1995 से 2012 तक लगता पांच बार जीत हासिल कर मोहनभाई कुंडारिया विधायक बने. लगातार पांच बार विधायक बनने के बाद मोहनभाई सौराष्ट्र के कद्दावर नेता बन गए.

2014 के लोकसभा चुनाव में मोहनभाई को राजकोट से बीजेपी ने मैदान में उतारा. मोहनभाई के सांसद बन जाने से यह सीट खाली हुई जिस पर 2014 में उपचुनाव हुए थे. 2014 उपचुनाव में भाजपा के प्रत्याशी बावनजीभाई मेतलिया को 65833 वोट मिले जबकि कांग्रेस के प्रत्याशी ललित कगथरा को 54102 वोट मिले थे. भाजपा प्रत्याशी ने 11731 वोटों से जीत दर्ज की थी.

Advertisement

2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के प्रत्याशी राघवजीभाई गडारा को 64320 वोट मिले जबकि कांग्रेस प्रत्याशी ललित कगथरा को 94090 वोट मिले थे. दो बार हार चुके ललित कगथरा को पाटीदार आंदोलन का लाभ हुआ और 29770 वोटों के भारी अंतर से उन्होंने जीत दर्ज की थी.

राजनीतिक स्थिति 

1967 में इस सीट पर पहला चुनाव हुआ तब से लेकर 1985 तक यहां व्यक्ति विशेष को वोट मिलते थे यानि पार्टी के आधार पर नहीं बल्कि चुनाव में खड़े प्रत्याशी की छवि के आधार पर लोग उसे अपना वोट देते थे. 1990 से लेकर अबतक पार्टी के आधार पर लोग उम्मीदवार को वोट दे रहे हैं.

1990 के चुनाव में भाजपा के प्रत्याशी केशुभाई पटेल ने टंकारा समेत दो जगह से चुनाव लडे़ और जीत दर्ज करने के बाद वो गुजरात के मुख्यमंत्री बने. 1995 से लेकर 2012 तक लगातार पांच टर्म तक बीजेपी के प्रत्यासी मोहनभाई कुडारीया इस सीट से चुनाव जीतते रहे. 
  
सामाजिक ताना बाना

टंकारा मोरबी जिले का शहर है जबकि पडधरी राजकोट जिले का शहर है. मोरबी और राजकोट जिले के दो शहर को मिलकर यह विधानसभा सीट बनती है. टंकारा कपास के उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है. टंकारा और उसके आसपास के इलाके में 25 से कॉटन मिल हैंय कॉटन का उत्पादन अच्छा होने के कारन टंकारा में कई कपास तेल मिल भी 
खुल चुके हैं.

Advertisement

टंकारा कपास तेल मिल के कारण बड़ा व्यापारिक केंद्र बना हुआ है. मोरबी, मालिया, वांकानेर, टंकारा और हलवद मोरबी जिले के तहसील है. अगर हम विधानसभा क्षेत्र के बारे में बात करें तो विधानसभा की तीन सीटें मोरबी जिले में आती है.

2017 के अनुसार मतदाता की संख्या 
कुल मतदाता - 220862
पुरुष - 106079
महिला - 114782
अन्य - 1 

मोरबी जिले की कुल जनसंख्या 960329 है जबकि टंकारा-पडधरी  विधानसभा सीट पर अभी तक़रीबन तीन लाख से अधिक जनसंख्या है जिसमें से ढाई लाख वोटर होंगे. 
मोरबी जिले में कुल तीन विधानसभा सीट पड़ती है. 65-मोरबी-मालिया, 66-टंकारा-पडधरी और 67-वांकानेर-कुवाडवा  विधानसभा सीट है. 

मोरबी सीट पर अभी बीजेपी का कब्ज़ा है जबकि बाकी के दो टंकारा और वांकानेर सिट पर कांग्रेस का कब्ज़ा है. मोरबी मालिया सीट पर पिछले 35 सालों से बीजेपी का दबदबा रहा है. 

टंकारा सीट पर कांग्रेस का कब्जा है. पिछले 27 सालों से टंकारा सीट पर बीजेपी का दबदबा रहा है. यह सीट बीजेपी की मानी जाती है. पाटीदार, अनामत आंदोलन के बाद बीजेपी को इस सीट पर हार का सामना करना पड़ा था.

विधायक का परिचय 
नाम: ललितभाई करमशीभाई कगथरा 
उम्र: 63 साल 
जाती: कड़वा पाटीदार 
शिक्षण: बी. कॉम. सौराष्ट्र यूनिवर्सिटी 
संपत्ति: 9.75 करोड़ 
वयवसाय: खेती और बिजनेस 

Advertisement

सामाजिक स्थिति 
पाटीदार - 1,20,000
दलित-  12,000 से 13,000 तक 
मालधारी -  8,000 से 9,000
क्षत्रिय -  12,000 से 14,000
कोली - 8,000 

2022 की रेस में कौन-कौन 
         
टंकारा-पडधरी में बीजेपी हो या कांग्रेस दोनों ही पार्टियां जाती को ध्यान में रख कर अपना प्रत्याशी मैदान में उतारती हैं. हालांकि कांग्रेस को जो बीते चुनाव में पाटीदार आंदोलन का लाभ मिला था वो इस बार नहीं मिलने वाला है. इस सीट पर अपना कब्ज़ा बरक़रार रखने के लिए कांग्रेस को भारी मसक्कत करनी पड़ेगी.

समस्या 
        
टंकारा में प्राथमिक सुविधाओं का अभाव है. टंकारा के आसपास के गावों में किसानों को सिंचाई का पानी नहीं मिलता और स्थानीय लोगों को अपनी जरूरत के हिसाब से भी पीने का पानी तक नहीं मिलता है. टंकारा के लोगों की सालों से बस स्टैंड बनाने की मांग थी जो अभी भी पूरी नहीं हुई है.

कई सालों तक बीजेपी का इस सीट पर कब्ज़ा था लेकिन वो स्थानीय लोगों की मांग पूरी नहीं कर पाए. स्थानीय लोगों ने कोंग्रेस को भी एक मौका दिया पर अब उन्हें लगता है की यह उनकी सबसे बड़ी भूल थी.  टंकारा महर्षि दयानंद सरस्वतीजी की जन्मभूमि होने के बावजूद राज्य सरकार की उपेक्षा का शिकार रहा है. (टंकारा से राजेश अंबालिया की रिपोर्ट)

Advertisement

ये भी पढ़ें:


 

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement