तिमारपुर विधानसभा सीट दिल्ली (Delhi Elections 2020) की 70 सदस्यीय विधानसभा सीटों में से एक है और यह क्षेत्र उत्तर-पूर्वी दिल्ली संसदीय क्षेत्र में पड़ता है. शीला दीक्षित के राज में तिमारपुर पर कांग्रेस का कब्जा रहा है और यह सीट भी उन चंद सीटों में शामिल है जहां पर दिल्ली की 3 प्रमुख दलों का कम से कम एक बार कब्जा रहा है.
उत्तरी दिल्ली जिले के तहत पड़ने वाली तिमारपुर विधानसभा सीट पर 2015 के चुनाव में 1,88,956 वोटर्स हैं जिसमें 1,04,007 पुरुष और 84,929 महिला मतदाता शामिल हैं. इनके अलावा 20 वोटर्स थर्ड जेंडर के थे. 1,88,956 वोटर्स में से 1,26,297 (66.8%) ने अपने मतदान अधिकार का इस्तेमाल किया. हालांकि 555 वोट नोटा के पक्ष में भी पड़ा.
600 वोट को भी तरसे 10 उम्मीदवार
2015 के विधानसभा चुनाव की बात करें तो उस चुनाव में आम आदमी पार्टी के पंकज पुष्कर ने जीत हासिल की थी. उन्होंने चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की रजनी अब्बी को 20,647 मतों के अंतर से हराया था.
आम आदमी पार्टी के पंकज को 64,477 वोट मिले तो बीजेपी की रजनी अब्बी को 43,830 वोट हासिल हुए. कांग्रेस के सुरिंदर पाल सिंह तीसरे स्थान पर रहे और उनके खाते में 14,642 वोट आए. चुनाव मैदान में कुल 13 उम्मीदवार मैदान में थे जिसमें सिर्फ 3 उम्मीदवारों को ही 600 से ज्यादा वोट मिले और शेष 10 उम्मीदवार अपने खाते में 600 वोट भी नहीं डलवा सके थे.
1998 में कांग्रेस का बदला
1993 में दिल्ली को पूर्ण विधानसभा का दर्जा मिलने के बाद यहां पहला चुनाव कराया गया तो तिमारपुर विधानसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी ने पहली जीत हासिल की. तब के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के राजिंदर गुप्ता ने कांग्रेस के हरिशंकर गुप्ता को हराया था. 1998 के चुनाव में कांग्रेस के जगदीश आनंद ने भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार रघुवंश सिंघला को हराते हुए पिछली हार का बदला ले लिया.
2003 के विधानसभा चुनाव में तिमारपुर विधानसभा सीट से कांग्रेस के सुरिंदर पाल सिंह ने पूर्व विधायक और बीजेपी उम्मीदवार राजिंदर गुप्ता को हरा दिया था. 2008 के चुनाव में भी सुरिंदर पाल सिंह ने अपनी जीत का जलवा कायम रखते हुए लगातार दूसरी जीत हासिल की.
2013 में आम आदमी पार्टी के अभ्युदय के बाद दिल्ली की राजनीति में मुकाबला त्रिकोणीय हो गया. अपने पहले ही चुनाव में 28 सीट जीतने वाली आम आदमी पार्टी ने तिमारपुर विधानसभा सीट से भी जीत हासिल की. 2015 के चुनाव में आम आदमी पार्टी के पंकज पुष्कर ने बीजेपी की उम्मीदवार रजनी अब्बी को हराया. रजनी अब्बी लगातार 2 बार चुनाव हार चुकी हैं.
बीजेपी को मिल रही लगातार हार
तिमारपुर विधानसभा चुनाव में जीत से शुरुआत करने वाली भारतीय जनता पार्टी को 1993 के बाद से हर बार चुनाव में यहां से हार ही मिली है. 1998 से लेकर आज तक हुए लगातार 5 विधानसभा चुनावें में भारतीय जनता पार्टी को शिकस्त का सामना करना पड़ा है. इस तरह से तिमारपुर सीट से कांग्रेस ने 3, आम आदमी पार्टी ने 2 और बीजेपी ने 1 जीत हासिल की है.
तिमारपुर के विधायक पंकज पुष्कर की बात की जाए तो 2015 के विधानसभा चुनाव में दाखिल हलफनामे के अनुसार उन पर एक भी आपराधिक केस दर्ज नहीं है. 47 वर्षीय पंकज पुष्कर पोस्ट ग्रेजुएट हैं और 2015 के हलफनामे के अनुसार उनके पास 1,48,80,949 रुपये की संपत्ति है.
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कब होगी मतगणना?
दिल्ली की पहली विधानसभा का गठन 1993 में हुआ था और इस बार यहां पर सातवां विधानसभा चुनाव कराया जा रहा है. पहले राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में मंत्रीपरिषद हुआ करती थी. 70 सदस्यीय दिल्ली विधानसभा में एक चरण में मतदान हो रहा है. 8 फरवरी को वोट डाले जाएंगे जबकि 11 फरवरी को मतगणना होगी. छठी दिल्ली विधानसभा का कार्यकाल 22 फरवरी 2020 को समाप्त हो जाएगा.
सुरेंद्र कुमार वर्मा