महिषी विधानसभा सीटः गफूर के गढ़ में RJD को नए चेहरे की तलाश, JDU की भी नजर

सहरसा जिले का महिषी विधानसभा क्षेत्र गफूर का गढ़ कहा जाता है. ऐसा इसलिए, क्योंकि डॉक्टर अब्दुल गफूर ने एक या दो नहीं, चार बार महिषी का विधानसभा में प्रतिनिधित्व किया.

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प्रतीकात्मक तस्वीर प्रतीकात्मक तस्वीर

aajtak.in

  • सहरसा ,
  • 02 अक्टूबर 2020,
  • अपडेटेड 7:46 PM IST
  • चार बार विधायक रहे थे अब्दुल गफूर
  • 2015 में जीते थे आरजेडी के गफूर
  • आरएलएसपी उम्मीदवार को दी थी मात

सहरसा जिले का महिषी विधानसभा क्षेत्र गफूर का गढ़ कहा जाता है. ऐसा इसलिए, क्योंकि डॉक्टर अब्दुल गफूर ने एक या दो नहीं, चार बार महिषी का विधानसभा में प्रतिनिधित्व किया. डॉक्टर गफूर  के निधन के बाद लालू प्रसाद यादव की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के सामने किसी मजबूत नए चेहरे की तलाश करने की चुनौती होगी. वहीं, महिषी सीट पर वर्षों से 'तीर' चलाने के प्रयास में जुटी जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) भी जीत के लिए कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाहेगी.

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डॉक्टर गफूर साल 1995 में महिषी विधानसभा सीट से पहली बार विधायक निर्वाचित हुए थे. तब वे जनता दल के टिकट पर चुनाव मैदान में उतरे थे. लालू प्रसाद यादव ने जब राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) का गठन किया तब गफूर उनके साथ हो लिए. अब्दुल गफूर साल 2000 में आरजेडी के टिकट पर चुनाव मैदान में उतरे. गफूर को जनता ने दूसरी बार भी विधानसभा भेज दिया. आरजेडी ने गौतम कृष्णा और जेडीयू ने गुंजेश्वर साह को चुनाव मैदान में उतारा है.

इस सीट से 26 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं. साल 2005 के चुनाव में आरजेडी ने महिषी विधानसभा सीट से सुरेंद्र यादव को चुनाव मैदान में उतारा. लेकिन यादव आरजेडी की जीत का क्रम बरकरार रखने में असफल रहे. जेडीयू के गुंजेश्वर साह, सुरेंद्र यादव को हराकर विधायक निर्वाचित हुए. साल 2010 के चुनाव में आरजेडी ने फिर से डॉक्टर गफूर पर दांव लगाया और गफूर ने महिषी विधानसभा क्षेत्र से चुनावी बाजी जीतकर यह सीट फिर से आरजेडी की झोली में डाल दी.

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पिछले विधानसभा चुनाव में आरजेडी उम्मीदवार गफूर ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (आरएलएसपी) के चंदन कुमार साह को हराकर जीत का चौका लगाया. गफूर से पहले महिषी के चुनावी अतीत की बात करें तो साल 1977 के विधानसभा चुनाव में जनता पार्टी (जेपी) के कुमार ने कांग्रेस के लहटन चौधरी को मात दी थी. 1980 में कांग्रेस के लहटन चौधरी कांग्रेस (यू) के सत्य नारायण यादव और 1985 में लोक दल के देवानंद यादव को मात देकर विधानसभा में पहुंचे.

साल 1990 के विधानसभा चुनाव में जनता दल के आनंद मोहन ने कांग्रेस के लहटन चौधरी को पराजित कर दो चुनाव से चले आ रहे जीत के सिलसिले पर ब्रेक लगा दिया था. महिषी विधानसभा क्षेत्र के मतदाता बिहार विधानसभा चुनाव के तीसरे और अंतिम चरण में 7 नवंबर को 58.59 फीसदी मतदाताओं ने अपना प्रतिनिधि चुनने के लिए वोट किया. वोटों की गिनती 10 नवंबर को होगी.

 

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