पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी ने इंडिया टुडे कॉन्क्लेव ईस्ट 2021 के चौथे संस्करण में केंद्र की मोदी सरकार और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) पर जमकर निशाना साधा.
बंगाल में टीएमसी को मिल रही चुनौती पर ममता बनर्जी ने कहा कि जिसके पास हिम्मत है वो लड़ता जाता है. 99 फीसदी लोगों को हमने किसी न किसी स्कीम में जरूर कवर किया है. हमारी पार्टी लोगों के लिए काम करती है. हम कभी टैक्स नहीं बढ़ाते, मजदूरों की इंडस्ट्री बंद नहीं करते हैं, डीजल-पेट्रोल का रेट भी नहीं बढ़ाते हैं.
कोलकाता में विक्टोरिया मेमोरियल में आजोजित नेताजी सुभाष चंद्र बोस से जुड़े कार्यक्रम में हुई नारेबाजी पर ममता बनर्जी ने कहा कि बीजेपी ने नारेबाजी करवाकर सुभाष चंद्र बोस के कद को छोटा कर दिया. उन्होंने कहा कि बीजेपी वालों को किसी बात की जानकारी नहीं होती फिर भी उन्हें कुछ भी बोलना होता है.
ममता बनर्जी ने कहा, 'मेरी आपत्ति श्रीराम के नारे पर नहीं थी. राजनीतिक नारों पर मेरी नाराजगी थी. विवेकानंद ठाकुर नहीं हैं. ये लोग (बीजेपी नेता) कैसे हिंदू हैं. उन्हें हिंदू धर्म के बारे में ठीक जानकारी नहीं. मुझे हिंदी नहीं आती है, लेकिन जो मुझे जानकारी नहीं होती है उसके बारे में किसी से पूछ लेते हैं. मैं उर्दू और पंजाबी में भी बात कर सकती हूं.'
ममता बनर्जी ने कहा कि मेरी पार्टी की ऑडियोलॉजी जनवादी है. हमारी सरकार हर रोज किसी चीज का दाम नहीं बढ़ा देती है. हम मजदूर को भी लेकर चलते हैं और उद्योगपतियों को भी साथ लेकर चलते हैं.
धर्म और जाति के नाम पर चुनाव के सवाल पर ममता बनर्जी ने कहा कि बंगाल में कभी जाति के नाम पर चुनाव नहीं हुए. लेकिन बीजेपी ने इसकी शुरुआत की है. पहले धर्म के नाम पर किया और अब जाति के नाम पर बांट रहे हैं. वो लोग यहां भी बंगालियों को ही आपस में बांटने का काम कर रहे हैं.
बकौल ममता बनर्जी वो कहते हैं कि वो बांग्लादेश का बंगाली है और ये बंगाल का बंगाली है. साथ ही वो हमेशा सीबीआई और ईडी का डर दिखाते रहते हैं. ये लोग बंगाल में भी आकर बांट दिया है. ये लोग बंगाली के साथ बंगाली को भी लड़ाते हैं. ये लोग विकास के मुद्दे पर लड़ें तो पूरी तरह हार जाएंगे. सबको केंद्रीय एजेंसियों के जरिये डराते हैं. ये पत्रकारों को डराते हैं. ये न्यूज चैनल वालों को डराते हैं.
ममता बनर्जी ने कहा कि हमें धमका रहे हैं. हिम्मत है तो हमसे लड़ के देखिए. अगर डरोगो तो मरोगे. हमें हर भाषा को सम्मान देना चाहिए. आंदोलनकारी बोलने से मुझे गर्व होता है. किसानों को खालिस्तानी बोल देता है.
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