जानें 'राइट टू प्राइवेसी' में आपको मिले हैं क्या-क्या अधिकार...

राइट टू प्राइवेसी यानी निजता के अधिकार को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को बड़ा फैसला सुनाया है. कोर्ट ने निजता को मौलिक अधिकार माना है.

Advertisement
Representational Image Representational Image

राइट टू प्राइवेसी यानी निजता के अधिकार को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को बड़ा फैसला सुनाया है. कोर्ट ने निजता को मौलिक अधिकार माना है. नौ जजों की बेंच ने सर्वसम्मति से ये फैसला लिया है. माना जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट ने ये फैसला संविधान के आर्टिकल 21 के आधार पर दिया है.

क्‍या है आर्टिकल 21

संविधान का ये आर्टिकल देश के हर नागरिक को जीवन जीने की आजादी और व्यक्तिगत आजादी के संरक्षण की व्‍याख्‍या करता है. इसमें कहा गया है, 'किसी भी व्यक्ति को विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया के अतिरिक्त उसके जीवन और शरीर की स्वतंत्रता के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता'.

Advertisement

राइट टू प्राइवेसी

हालांकि इस आर्टिकल में 'निजता' के अधिकार की व्‍याख्‍या नहीं की गई है, ना ही इसका सीधा उल्‍लेख है लेकिन आर्टिकल 21 में शामिल 'जीवन' शब्‍द की व्‍याख्‍या में इस पहलू को भी शामिल किया गया है.

गांधी, अंबेडकर भी रहे हैं पक्ष में  

आपको जानकर हैरानी होगी कि 1895 में ये मुद्दा उठाया गया था. उस सयम कहा गया था कि भारतीय संविधान बिल में निजता के अधिकार को शामिल किया जाए. इसके बाद 1925 में 'कॉमनवेल्‍थ ऑफ इंडिया बिल' में भी निजता के अधिकार पर जोर दिया गया था. इस समिति के सदस्‍य महात्‍मा गांधी भी थे. फिर 1947 में  खुद अंबेडकर ने कहा था कि निजता लोगों का अधिकार है. इसका उल्‍लंघन ना हो, इसके लिए कड़े नियम बनाने होंगे.

 

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement