जानिए- देश का नाम 'इंडिया' पड़ने के पीछे की कहानी, अब NCERT ने क्यों की चेंज की बात?

NCERT पैनल के प्रस्ताव को स्वीकृति मिलने के बाद अब किताबों में इंडिया का नाम भारत कर दिया जाएगा. अगर यह बदलाव होता है तो आने वाली नई पीढ़ी अब किताबों में तमाम बदलावों के साथ ही देश के नाम में भी बदलाव देखेगी. क्या आपको पता है कि आख‍िर भारत का नाम इंडिया पड़ने की कहानी क्या है?

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प्रतीकात्मक तस्वीर  प्रतीकात्मक तस्वीर

aajtak.in

  • नई दिल्ली ,
  • 25 अक्टूबर 2023,
  • अपडेटेड 2:43 PM IST

नई पीढ़ी को स्कूलों में इंडिया की जगह भारत का इतिहास पढ़ाने की बात हो रही. एनसीईआरटी ने पैनल के प्रस्ताव को स्वीकृति मिलने के बाद  इस नये बदलाव को अपनाने की तैयारी कर रहा है. इसके बाद अब किताबों में इंडिया की जगह भारत पढ़ाया जा सकता है. आइए जानते हैं कि आख‍िर इंडिया की जगह भारत करने के पीछे का उद्देश्य क्या है. साथ ही वो कहानी भी जानते हैं कि आख‍िर किन हालातों में देश को इंडिया नाम मिला.  

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दरअसल प्राचीन काल से ही हमारे देश के अलग-अलग नाम रहे हैं. प्राचीन ग्रंथों में देश के अलग-अलग नाम लिखे गए- जैसे जम्बूद्वीप, भारतखंड, हिमवर्ष, अजनाभ वर्ष, आर्यावर्त तो वहीं अपने-अपने जमाने के इतिहासकारों ने हिंद, हिंदुस्तान, भारतवर्ष, इंडिया जैसे नाम दिए. लेकिन इनमें भारत सबसे ज्यादा लोकप्रिय रहा.

विभ‍िन्न स्रोतों से पता चलता है कि विष्णु पुराण में इस बात का जिक्र है कि 'समुद्र के उत्तर से लेकर हिमालय के दक्षिण तक भारत की सीमाएं निहित हैं. विष्णु पुराण कहता है कि जब ऋषभदेव ने नग्न होकर गले में बांट बांधकर वन प्रस्थान किया तो अपने ज्येष्ठ पुत्र भरत को उत्तराधिकार दिया जिससे इस देश का नाम भारतवर्ष पड़ गया. हम भारतीय आम बोलचाल में भी इस तथ्य को बार-बार दोहराते हैं कि कश्मीर से कन्याकुमारी तक हमारा पूरा राष्ट्र बसता है. ये भारत का एक छोर से दूसरा छोर है. 

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इंडिया नाम कैसे मिला?
अंग्रेज जब हमारे देश में आए तो उन्होंने सिंधु घाटी को इंडस वैली कहा और उसी आधार पर इस देश का नाम इंडिया कर दिया. यह इसलिए भी माना जाता है क्योंकि भारत या हिंदुस्तान कहने में मुश्किल लगता था और इंडिया कहना काफी आसान. तभी से भारत को इंडिया कहा जाने लगा. 

'इंडिया' शब्द हटाने के मांग क्यों?
भारतीय संविधान के अनुच्छेद-1 में भारत को लेकर दी गई जिस परिभाषा में 'इंडिया, दैट इज भारत' यानी ' इंडिया अर्थात भारत' के जिन शब्दों का इस्तेमाल किया गया है, उसमें से सरकार 'इंडिया' शब्द को निकालकर सिर्फ 'भारत' शब्द को ही रहने देने पर विचार कर रही है. साल 2020 में भी इसी तरह की कवायद शुरू हुई थी. संविधान से 'इंडिया' शब्द हटाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दायर की गई थी. याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई थी कि इंडिया शब्द गुलामी की निशानी है और इसीलिए उसकी जगह भारत या हिंदुस्तान का इस्तेमाल होना चाहिए. अंग्रेजी नाम का हटना भले ही प्रतीकात्मक होगा, लेकिन यह हमारी राष्ट्रीयता, खास तौर से भावी पीढ़ी में गर्व का बोध भरने वाला होगा. हालांकि तब कोर्ट ने ये कहकर याचिका खारिज कर दी थी कि हम ये नहीं कर सकते क्योंकि पहले ही संविधान में भारत नाम ही कहा गया है.

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NCERT पैनल ने क्यों इंडिया की जगह 'भारत' की सिफारिश की

पैनल के सदस्यों में से एक सीआई आइजैक ने कहा कि प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद एनसीईआरटी किताबों के अगले सेट में इंडिया का नाम बदलकर भारत कर दिया जाएगा. असल में इंडिया शब्द का आमतौर पर इस्तेमाल ईस्ट इंडिया कंपनी और 1757 के प्लासी के युद्ध के बाद होना शुरू हुआ था. वहीं भारत शब्द का जिक्र विष्णु पुराण जैसे प्राचीन लेखों में मिलता है, जो 7 हजार साल पुराने हैं. ऐसे में समिति ने आम सहमति से सिफारिश की है कि सभी कक्षाओं की किताबों में भारत के नाम का इस्तेमाल होना चाहिए.

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