किसी इंटरनेशनल ख‍िलाड़ी से कम नहीं, कैंसर को हराने वाली कोलकाता टीम की ये क्र‍िकेटर

एक वो दौर था जब क्र‍िकेटर जयश्री की जीभ में कैंसर हो गया था. बमुश्किल बोल पाने वाली जयश्री ने फिर भी उम्मीद नहीं खोई. इलाज के बाद दोबारा मैदान वह अपने सभी फैन और फॉलोअर्स के लिए उम्मीद की किरण बनकर लौटीं. इनकी कहानी हर किसी को जीवन से हार न मानने का, सपने पूरे करने का हौसला देती है.

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क्र‍िकेटर जयश्री क्र‍िकेटर जयश्री

aajtak.in

  • नई दिल्ली ,
  • 08 मार्च 2023,
  • अपडेटेड 7:37 AM IST

आपने दुनिया के कई स्टार खिलाड़ियों को देखा होगा जो कैंसर से बचे हैं. इनमें युवराज सिंह, लांस आर्मस्ट्रांग, लुई वान गल और कई अन्य नाम हैं. लेकिन आज हम आपको एक ऐसी महिला की कहानी बताने जा रहे हैं जिसने कैंसर से जंग लड़ी और अब बंगाल क्रिकेट में दूसरों के लिए प्रेरणा बन गई है. 

ये फाइटर महिला ख‍िलाड़ी बंगाल की पूर्व महिला क्रिकेटर और कोच जयश्री सरकार हैं. वो महिला जिसने न सिर्फ रूढ़ियों को तोड़ा, बल्कि मौत से भी जंग लड़ी और एक नया मुकाम बनाया.  34 साल की जयश्री अब क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बंगाल (CAB) की वर्तमान पर्यवेक्षक और कोच हैं. बता दें कि जयश्री को नवंबर 2020 में जीभ के कैंसर का पता चला था. रोग का पता लगने के बाद उनके मन में बस एक सवाल यही था कि क्या वो फिर से मैदान पर वापसी कर पाएंगी? जीवित रहने के बाद यानी अगर ठीक भी हो जाती हैं तो क्या कुछ भी अतिरिक्त कर पाएंगी? 

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लेकिन, जयश्री ने यह असंभव काम कर दिखाया. जी हां, जो बंगाल क्रिकेट बिरादरी की इस सबसे मजबूत महिला ने खुद को साबित कर दिया. जयश्री मैदान पर वापस आ गई हैं और अब वह CAB की ऑब्जर्वर की भूमिका निभा रही हैं. उन्होंने एक कोच की भूमिका भी निभाई है. उन्होंने इतनी कठिन बीमारी को कैसे दूर किया? आइए इसका जवाब उन्हीं से जानते हैं. 

जयश्री ने बताया कि उन्हें जीभ का कैंसर था. जिससे वो बमुश्किल बोल पाती थीं. फिर भी वह अपने सभी फॉलोअर्स  के लिए खुद को एक उम्मीद की किरण बनाकर खड़ी रहीं. आज, जयश्री ने अपनी ये लंबी जंग जीत ली है. 

कैसा रहा सफर?

जयश्री ने साल 2007-08 तक बंगाल महिला क्रिकेट टीम में खेला. खेल छोड़ने के बाद, उसने कोच और पर्यवेक्षक की भूमिका निभाई. उन्हें 2020 में अचानक कैंसर हो गया. फिर दिसंबर 2020 में ओरल सर्जरी से गुजरने के बाद से उनके लिए कठिन समय रहा. कीमोथेरेपी से लेकर राइस ट्यूब से खाने-पीने तक कई बाधाएं रहीं, लेकिन आखिरकार, वह अभी स्वस्थ हैं और एक साधारण जीवन जी रही हैं. उनके लिए सबसे भावनात्मक आघात क्र‍िकेट मैदान से बाहर होना था, पूर्व महिला क्रिकेटर ने कहा. जयश्री ने कहा कि मैं करीब एक साल तक मैदान से बाहर रही. 

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अब वो विवेकानंद पार्क के दक्षिण कोलकाता में पाल एंड चटर्जी क्रिकेट कोचिंग सेंटर में एक क्रिकेट कोचिंग सेंटर में एक कोच की भूमिका भी निभा रही हैं. बंगाल के सभी पूर्व खिलाड़ी और उनमें से झूलन गोस्वामी, मिठू मुखर्जी, गार्गी बनर्जी और शिब शंकर पॉल जैसे भारतीय खिलाड़ी जीवन की इस सबसे क्रूर लड़ाई के लिए उनके साथ खड़े रहे. 

एक स्टूडेंट ने नौकरी छोड़कर की देखरेख

जयश्री अपने निदान और उपचार के पूरे समय को 'पिछला जीवन' कहते हुए बताती हैं कि मैंने इस पूरे दौर में अपने 22 गज के पूजा स्थल में लौटने की उम्मीद कभी नहीं छोड़ी थी. तमाम अनिश्चितता के बावजूद, जयश्री एक सर्वाइवर के तौर जीने को तैयार थीं. उनके छात्रों में से एक, जिन्होंने कठिन समय में उनका साथ दिया, सौमी मजुमदार हैं. जयश्री की सेवा और इलाज के लिए सौमी ने नौकरी छोड़ दी. कैंसर के ख‍िलाफ जंग के दिनों में जयश्री को बंगाल क्रिकेट संघ (CAB) सहित कई पूर्व क्रिकेटरों की मदद भी मिली. 

जयश्री बताती हैं कि आखिरकार, दो साल के बाद, मैं मैदान में वापस आ गई. अब सीएबी ने उन्हें ऑब्जर्वर के तौर पर मौका दिया और वह कोचिंग भी कर रही हैं. वह अपने छात्रों को जो एकमात्र प्रेरणा प्रदान कर रही हैं, वह है 'कभी भी किसी भी स्थिति में मुसीबतों के सामने सरेंडर न करें न करें' और यही बात जयश्री ने साबित कर दी है. 

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