दिल्ली ब्लास्टः 12 साल बाद फैसला...10 साल की सजा मगर रिहाई तुरंत

दिल्ली में 12 साल पहले हुए सीरियल ब्लास्ट केस में पटियाला हाउस कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए तीन आरोपियों में से दो को बरी करते हुए, एक को दोषी करार दिया है. इस मामले में मुख्य आरोपी तारिक अहमद डार को दोषी मानते हुए 10 साल जेल की सजा सुनाई गई है. वहीं, मोहम्मद हुसैन फाजिली और मोहम्मद रफीक शाह को बरी कर दिया गया है.

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पटियाला हाउस कोर्ट ने सुनाया फैसला पटियाला हाउस कोर्ट ने सुनाया फैसला

मुकेश कुमार / पूनम शर्मा / अनुषा सोनी

  • नई दिल्ली,
  • 16 फरवरी 2017,
  • अपडेटेड 5:32 PM IST

दिल्ली में 12 साल पहले हुए सीरियल ब्लास्ट केस में पटियाला हाउस कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए तीन आरोपियों में से दो को बरी करते हुए, एक को दोषी करार दिया है. इस मामले में मुख्य आरोपी तारिक अहमद डार को दोषी मानते हुए 10 साल जेल की सजा सुनाई गई है. वहीं, मोहम्मद हुसैन फाजिली और मोहम्मद रफीक शाह को बरी कर दिया गया है.

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जानकारी के मुताबिक, अक्टूबर 2005 में हुए इस सीरियल ब्लास्ट में कोर्ट ने तारिक अहमद डार को गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल रहने की वजह से सेक्शन 38 और 39 के तहत 10 साल की सजा सुनाई, लेकिन तारिक इस सजा से अधिक समय तक जेल में पहले ही रह चुका है. ऐसे में उसकी सजा पूरी होने की वजह से उसे आज रिहा कर दिया जाएगा.

कोर्ट को दो आरोपियों को पर्याप्त सबूतों के अभाव में बरी करना पड़ा. दिल्ली पुलिस मो. हुसैन फाजिली और मो. रफीक शाह पर लगाए अपने आरोप साबित करने मे नाकामयाब रही. पटियाला हाउस कोर्ट का ये फैसला दिल्ली पुलिस के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है. दिवाली से एक दिन पहले हुए इन धमाकों में 60 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 200 घायल हुए थे.

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ब्लास्ट के पीछे लश्कर-ए-तोएबा का हाथ
बताते चलें कि दिल्ली के सरोजनी नगर, पहाड़गंज और गोविंदपुरी में हुए इन धमाकों के पीछे आतंकी संगठन लश्कर-ए-तोएबा का हाथ माना गया. कोर्ट ने तारिक अहमद डार, मोहम्मद हुसैन फाजिली और मोहम्मद रफीक शाह पर देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने, आपराधिक साजिश रचने, हत्या, हत्या के प्रयास और हथियार जुटाने के आरोप तय किए थे.

आरोप साबित करने में असफल पुलिस
दिल्ली पुलिस ने तारिक के अलावा फाजिली और शाह पर ये आरोपी साबित करने में असफल रही. इस ब्लास्ट में पहाड़गंज में 9 लोगों की मौत हुई, जबकि 60 लोग घायल हुए. वहीं गोविंदपुरी में चार लोग घायल हुए थे. भीड़भाड़ वाले सरोजनी नगर में धमाके की वजह से 50 लोगों की मौत हो गई थी और करीब 130 लोग घायल हुए थे. 12 साल से केस चल रहा था.

 

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