मुजरिमों के लिए पैरोल एक वरदान की तरह होती है. इसके तहत पारिवारिक जरूरतों को देखते हुए सजा पूरी होने से पहले मुजरिमों को जेल से कुछ दिनों की रिहाई मिलती है. इसके लिए एक ही शर्त है कि सजा काट रहे शख्स का चरित्र और व्यवहार उत्तम होना चाहिए. कई बार कुछ कैदी पैसों और रसूख के दम पर भी पैरोल हासिल कर लेते हैं. आज से पांच साल पहले ऐसे ही एक पैरोल पर दिल्ली का मोस्ट वॉन्टेड क्रिमिनल विजय सिंह उर्फ पहलवान जेल से बाहर आया था. उसे दो दिन के लिए रिहा किया गया था. लेकिन पैरोल की अवधि पूरी होने के बाद पुलिस जब उसे लेने पहुंची तो वो घर से फरार हो चुका था. दिल्ली पुलिस विजय पहलवान की तलाश में लग गई.
विजय पहलवान साल 2018 को अपने घर से फरार हुआ था. चार महीनों तक दिल्ली पुलिस उसकी तलाश में खाक छानती रही. इसके बाद उसके सिर पर दो लाख रुपए के इनाम का ऐलान करते हुए एक स्पेशल टीम बनाई गई. इस टीम में एक डीसीपी, एक एसीपी, एक एसआई, एएसआई और तीन सिपाही शामिल थे. पांच साल की तलाशी के बाद 19 नवंबर को पुलिस टीम को पता चला कि पहलवान मध्य प्रदेश के जबलपुर में रह रहा है. सूचना मिलते ही टीम दिल्ली से जबलपुर के लिए रवाना हो गई. वहां पहुंचने के बाद उसका रसूख देखकर पुलिस हैरान रह गई. पहलवान चार हथियारबंद बॉडीगार्ड की सुरक्षा में रह रहा था. पुलिस ने जाल बिछाकर उसे उसके घर से गिरफ्तार कर लिया.
भतीजे की 13वीं में पैरोल, 2 दिन बाद हुआ फरार
दिल्ली पुलिस के मुताबिक, विजय पहलवान के भतीजे का निधन हो गया था. इसकी वजह से 5 अप्रैल 2018 को उसे पैरोल पर रिहा किया गया. लेकिन दो दिन बाद ही वो अपने घर से भाग निकला. सबसे पहले उसने महाराष्ट्र के कोल्हापुर में अपने गुरु के अखाड़े में शरण ली. इस दौरान उसकी मुलाकात एक महिला से हुई. दोनों के बीच दोस्ती हो गई. महिला ने उसे कारोबार का सुझाव दिया, तो दोनों कुछ साल बाद छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर चले आए. वहां उन्होंने प्रॉपर्टी का धंधा शुरू कर दिया. इसी दौरान किसी ने बताया कि जबलपुर इस धंधे के लिए ज्यादा मुफीद है, तो वो वहां चले गए. वहां उसका धंधा चल निकला. उसने प्रॉपर्टी डिलिंग का काम करके करोड़ों रुपए कमाए. अकूत संपत्ति अर्जित कर डाली.
जबलपुर में अकूत संपत्ति, करोड़ों के फॉर्म हाऊस
बताया जा रहा है कि जबलपुर उसकी करोड़ों की प्रॉपर्टी है. प्राइम लोकेशन पर उसका एक फॉर्म हाऊस भी हैं. वहां वो अपनी महिला मित्र का साथ रहता था. उसने अपनी सुरक्षा की चाक-चौबंद व्यवस्था कर रखी थी. घर पर दो दर्जन से ज्यादा कर्मचारी काम करते थे. एक दर्जन सिक्योरिटी वाले उसकी घर की रखवाली करते थे. चार हथियारबंद बॉडीगार्ड उसकी खुद की सुरक्षा में लगे रहते थे. महज दो साल में उसकी इतनी तरक्की देखकर पुलिस भी हैरान रह गई. लेकिन ये सबकुछ अवैध और गैर-कानूनी तरीके अर्जित की गई हैं. उसके खिलाफ 24 से ज्यादा केस दर्ज हैं. इनमें दिल्ली, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, गुजरात और मध्य प्रदेश में भी उसके खिलाफ केस दर्ज किया गया है. उसके गुनाहों के फेहरिस्त काफी लंबी है.
DU से पढ़ाई, वेटलिफ्टिंग में नेशनल चैंपियन
विजय पहलवान दिल्ली के वसंत कुंज के किशनगढ़ का रहने वाला है. उसने दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैम्पस में स्थित मोती लाल नेहरू कॉलेज से पढ़ाई की है. कॉलेज में पढ़ाई के साथ ही वो स्पोर्ट्स में भी बहुत आगे था. वो वेटलिफ्टिंग किया करता था. इसमें नेशनल चैंपियन भी था. लेकिन कहते हैं ना कि ताकत कई बार गलत दिशा में ले जाती है. पहलवान के साथ भी वही हुआ. अपने बाहुबल के दम पर उसने गैर-कानूनी काम करना शुरू कर दिया. पहले लोगों के लिए काम करता था. लेकिन बाद में उसने अपने लिए शुरू कर दिया. वो लोगों की प्रॉपर्टी जबरन कब्जा कर लेता या फिर कम पैसों में रजिस्ट्री करा लेता था. जो लोग विरोध करते उन्हें मारता-पिटता, कई बार उनकी हत्या तक कर देता था.
दो बेटों को अपनी पैरवी के लिए बनाया वकील
साल 2011 की बात है. विजय पहलवान की नजर किशनगढ़ के एक प्लॉट पर थी. वो उसे लेना चाहता था. उसने प्लॉट मालिक रघुवीर सिंह के सामने अपना प्रस्ताव रखा, लेकिन उन्होंने बेचने से मना कर दिया. एक दिन किसी बहाने से उसने रघुवीर को अपनी कार में बिठा लिया. रास्ते में प्लॉट बेचने के लिए कहा, जब उन्होंने दोबारा इंकार किया, तो उसने उन्हें गोली मार दी. इस बात खुलासा तब हुआ जब मृतक के परिजनों ने पुलिस को बताया कि विजय पहलवान उनके पिता को लेकर गया हुआ था. पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर कड़ाई से पूछताछ की तो उसने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया. उसकी निशानदेही पर गुड़गां से रघुवीर का शव बरामद कर लिया गया. साल 2018 में उसे सजा मिली थी. विजय के दो बेटे हैं. दोनों को उसने वकालत की पढ़ाई कराई है. दिलचस्प बात ये है कि उसके दोनों बेटे उसके सारे केसेज की पैरवी करते हैं.
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उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार बनने के बाद से ही बाहुबलियों और माफियाओं के बुरे दिन शुरू हो गए. पहले अमरमणि त्रिपाठी, मुख्तार अंसारी, अतीक अहमद और विजय मिश्रा के साम्राज्य को ध्वस्त करने के बाद सरकार की नजरें पूर्वांचल के सबसे बड़े बाहुबली नेता दिवंगत हरिशंकर तिवारी की ओर पड़ चुकी हैं. इसकी शुरूआत हरिशंकर तिवारी के परिवार से संबंधित करोड़ों की संपत्तियों को जब्त करने के साथ हुई है. ईडी ने बाहुबली नेता के बेटे विनय शंकर तिवारी पर शिकंजा कसते हुए उनके परिवार की 72 करोड़ से अधिक की संपत्ति जब्त कर ली है. उनकी ये संपत्तियां लखनऊ, गोरखपुर और महराजगंज जिले में स्थित हैं. इसे तिवारी परिवार पर गहरी चोट माना जा रहा है.
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