भीमा-कोरेगांव मामले में NIA ने आठ लोगों के खिलाफ दायर की चार्जशीट

एनआईए ने गृह मंत्रालय के आदेश पर 24 जनवरी 2020 को यह केस लिया था. गृह मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, एल्गार परिषद के कई सदस्य सीपीएम के संपर्क में थे, जो यूएपीए के तहत प्रतिबंधित है.

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NIA ने 8 लोगों के ख‍िलाफ दायर की चार्जशीट (फाइल फोटो) NIA ने 8 लोगों के ख‍िलाफ दायर की चार्जशीट (फाइल फोटो)

कमलजीत संधू

  • नई दिल्ली,
  • 09 अक्टूबर 2020,
  • अपडेटेड 5:29 PM IST
  • NIA ने 8 लोगों के ख‍िलाफ दायर की चार्जशीट
  • भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में चार्जशीट दायर
  • NIA ने आठ महीने पहले संभाला था केस

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने भीमा कोरेगांव मामले की जांच अपने हाथ में लिए जाने के करीब आठ महीने बाद आठ लोगों के खिलाफ चार्जशीट फाइल किया है. चार्जशीट में जिन लोगों का नाम है, वह इस प्रकार हैं- गोवा इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट के प्रोफेसर आनंद तेलतुंबडे, सामाजिक कार्यकर्ता गौतम नवलखा, दिल्ली विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर हनी बाबू, कबीर कला मंच के तीन कलाकार- सागर गोरखे, रमेश गाइछोर और उनकी पत्नी ज्योति जगताप, सामाजिक कार्यकर्ता फादर स्टेन स्वामी और मिलिंद तेलतुंबडे (आनंद तेलतुंबड़े के भाई). 

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एनआईए के मुताबिक, प्रोफेसर हानी बाबू नक्सल गतिविधियों और नक्सली विचारधारा का लगातार समर्थन कर रहे थे. बाबू को इसी साल जुलाई में गिरफ्तार किया गया था. उसके बाद एनआईए ने 14 अप्रैल को गौतम नवलखा और आनंद तेलतुंबड़े को गिरफ्तार किया था.

एनआईए की चार्जशीट में शाम‍िल गौतम नवलखा ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर इसी साल अप्रैल महीने में राष्ट्रीय जांच एजेंसी के सामने आत्मसमर्पण किया था. उन्हें 2018 के भीमा कोरेगांव मामले में कथित संलिप्तता को लेकर अवैध गतिविधि रोकथाम अधिनियम के तहत आरोपी बनाया गया है.

गाइछोर, जगताप और गोरखे को सितंबर के शुरू में गिरफ्तार किया गया था. इन सभी के खिलाफ आईपीसी की विभिन्न धाराओं के अलावा कड़े गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत मामला दर्ज किया गया है.

बता दें, एनआईए ने गृह मंत्रालय के आदेश पर 24 जनवरी 2020 को यह केस लिया था. गृह मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, एल्गार परिषद के कई सदस्य सीपीआई (माओवादी) के संपर्क में थे, जो यूएपीए के तहत प्रतिबंधित है. सूत्रों का मानना है कि भीमा कोरेगांव की साजिश बड़े स्तर पर रची गई थी. गृह मंत्रालय को यह भी शक है कि भीमा कोरेगांव में पैन इंडिया षड्यंत्र रचा गया. बड़ी साजिश की जांच के लिए अब एनआईए को केस सौंपा गया है.

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क्या है मामला?

1 जनवरी 2018 को पुणे के समीप कोरेगांव-भीमा गांव में दलित समुदाय के लोगों का एक कार्यक्रम आयोजित हुआ था, जिसका कुछ दक्षिणपंथी संगठनों ने विरोध किया था. एल्गार परिषद के सम्मेलन के दौरान इस इलाके में हिंसा भड़की थी, जिसके बाद भीड़ ने वाहनों में आग लगा दी और दुकानों-मकानों में तोड़फोड़ की थी. इस हिंसा में एक शख्स की जान चली गई और कई लोग जख्मी हो गए थे. जिसके बाद महाराष्ट्र पुलिस ने इस मामले में कई लोगों को गिरफ्तार किया था. 

क्यों होता है हर साल कार्यक्रम?

दरअसल एक जनवरी 1818 को ब्रिटिश आर्मी और पेशवा सेना के बीच जंग हुई, जिसमें ब्रिटिश आर्मी की जीत हुई थी. दलित जाति के 500 से अधिक सैनिकों ने तब पेशवाओं की सेना में शामिल होने का आग्रह किया था, लेकिन पेशवाओं ने उन्हें शामिल नहीं किया. फिर दलित और महार जाति के जवान ब्रिटिश सेना में शामिल हो गए और पेशवाओं को इस जंग में मात दी थी. तभी से एक जनवरी के दिन भीमा कोरेगांव में जश्न मनाया जाता है.

 

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