ओडिशा में दादी की हत्या के जुर्म में पोते को मिली उम्रकैद की सजा

ओडिशा के मयूरभंज जिले की एक अदालत ने मंगलवार को 28 वर्षीय एक व्यक्ति को अपनी दादी की हत्या के लिए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सत्यनारायण पात्रा ने दोषी लक्ष्मण टुडू पर 50 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है.

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एक व्यक्ति को अपनी दादी की हत्या के लिए आजीवन कारावास की सजा... एक व्यक्ति को अपनी दादी की हत्या के लिए आजीवन कारावास की सजा...

aajtak.in

  • मयूरभंज,
  • 06 अगस्त 2024,
  • अपडेटेड 6:55 PM IST

ओडिशा के मयूरभंज जिले की एक अदालत ने मंगलवार को 28 वर्षीय एक व्यक्ति को अपनी दादी की हत्या के लिए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सत्यनारायण पात्रा ने दोषी लक्ष्मण टुडू पर 50 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है.

अतिरिक्त लोक अभियोजक कृष्ण चंद्र दास ने कहा कि फैसला 15 गवाहों के बयानों और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर लिया गया. यह घटना 19 नवंबर, 2021 को कुलियाना थाना क्षेत्र के बौंसकांटिया गांव में हुई थी. आरोपी लक्ष्मण ने अपनी दादी संबारी हेम्ब्रम की हत्या कर दी थी.

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उन्होंने बताया कि आरोपी के घर पर संपत्ति को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था. उसे लगता था कि उसकी दादी की वजह से उसे अपनी संपत्ति पर कब्जा नहीं मिल पा रहा है. एक दिन झगड़े के दौरान उसने अपनी दादी पर जानलेवा हमला कर दिया, जिसमें उनकी मौत हो गई.

बताते चलें कि दो दिन पहले ही ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में एक अदालत ने एक हत्यारे को मौत की सजा सुनाई है. हत्यारे ने दो साल पहले अपनी पत्नी को 33 बार चाकू घोंपने और उसे बेरहमी मारने के बाद अपनी छह साल की बेटी की गला काटकर हत्या करने की कोशिश की थी. 

अभियोजन पक्ष के अनुसार, 9 जून 2022 को दोषी 46 वर्षीय संजीत दाश ने उस वक्त अपनी पत्नी सरस्वती को भुवनेश्वर के घाटिकिया इलाके में उनके घर पर 33 बार चाकू घोंप कर मार डाला था, जब उसने अपनी दूसरी बेटी को जन्म दिया था. सरस्वती एक निजी अस्पताल में हेड नर्स थी. 

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आरोपी ने उस दिन अपनी पहली बेटी का भी गला घोंट दिया था, लेकिन 6 साल की बच्ची किसी तरह से बच गई. इस संगीन वारदात के अगले दिन आरोपी संजीत को गिरफ्तार कर लिया गया था और अक्टूबर, 2022 में उसके खिलाफ आरोप-पत्र दाखिल किया गया था. 

भुवनेश्वर के द्वितीय अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश बंदना कर की अदालत ने इस मामले में फैसला सुनाते हुए अपराध को "दुर्लभतम" की श्रेणी में रखा और कहा कि इस प्रकार दोषी के प्रति कोई नरमी नहीं बरती जानी चाहिए. इसलिए, यह अदालत दोषी को मौत की सजा सुनाती है. 

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