मुंबई कैसे बन गया ग्लोबल कोरोना वायरस हॉटस्पॉट? न्यूयॉर्क भी छूटा पीछे

9 मई के बाद से मुंबई में हर दिन दुनिया में सबसे बुरी तरह प्रभावित न्यूयॉर्क सिटी से भी ज्यादा नए केस रिकॉर्ड हो रहे हैं.

भारत में कोरोना के बढ़ते मामले (Photo- PTI)
aajtak.in
  • चेन्नई,
  • 15 मई 2020,
  • अपडेटेड 4:03 PM IST

  • न्यूयॉर्क सिटी में अस्पतालों में नए मरीजों का भर्ती होना मुंबई की तुलना में कम
  • मुंबई में हर दिन कोरोना के दर्ज होने वाली मौतों की संख्या लगातार बढ़ रही है

मुंबई में बुधवार को Covid-19 के 800 नए केस और 40 मौतें दर्ज हुईं. इसी के साथ मुंबई कोरोना वायरस के लिए ग्लोबल हॉटस्पॉट बन गया है. अस्पताल पहले से ही पूरी क्षमता से काम कर रहे हैं और शहर को तत्काल भविष्य में बदतर स्थिति के लिए तैयार रहना होगा.

9 मई के बाद से मुंबई में दुनिया के सबसे बुरी तरह प्रभावित न्यूयॉर्क सिटी से भी ज्यादा हर दिन नए केस रिकॉर्ड हो रहे हैं. न्यूयॉर्क कोरोना वायरस संकट में अपना सबसे बुरा दौर अब देख चुका लगता है.

न्यूयॉर्क सिटी में अस्पतालों में नए मरीजों का भर्ती होना मुंबई की तुलना में कम है, क्योंकि सभी पॉजिटिव टेस्ट वाले मरीज अस्पताल में नहीं भर्ती हो रहे हैं. मई की शुरुआत से ही ये स्थिति है कि न्यूयॉर्क में मुंबई से कम नए मरीज हर दिन अस्पताल में भर्ती हो रहे हैं.

मुंबई में अस्पताल पहले से ही अपनी पूरी क्षमता के साथ काम कर रहे हैं. शहर प्रशासन का दावा है कि वो हर दिन बेड्स (बिस्तर) की संख्या बढ़ा रहा है. यह अपने आप में मुंबई के हेल्थ केयर सेक्टर पर बढ़ते दबाव का संकेत है.

न्यूयॉर्क सिटी में दुनिया के किसी भी शहर की तुलना में मौतों का आंकड़ा ज्यादा है, लेकिन वह भी घटता दिखाई दे रहा है. वहीं मुंबई में हर दिन दर्ज होने वाली मौतों की संख्या लगातार बढ़ रही है.

बेशक, न्यूयॉर्क की कुल मिलाकर तस्वीर अधिक खराब दिखती है, क्योंकि यह शहर अपने शिखर पर बहुत जल्दी ही पहुंच गया. मुंबई में जितने कुल केस हैं, न्यूयॉर्क उतनी मौतें देख चुका है. ये अपने आप में बताता है कि न्यूयॉर्क में संकट कितने बड़े स्तर का रहा.

लेकिन बुधवार को दर्ज किए गए 800 नए केसों के साथ, मुंबई इस समय दुनिया के हॉटस्पॉट शहरों में से एक के रूप में उभर रहा है. लंदन और न्यूयॉर्क ने सबसे ज्यादा मौत के आंकड़े देखे, लेकिन ये दोनों शहर अपना सबसे खराब दौर करीब-करीब देख चुके हैं. वहीं साओ पाउलो और मॉस्को अब भी संकट के ऊंचे दौर में हैं.

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