कोलकाता: लॉकडाउन में बच्चे बने मास्क डिजाइनर्स! कोरोना से फाइट के लिए बनाए 'ढिशूम मास्क'

कोरोना लॉकडाउन के दौरान अनिका घर पर पढ़ाई के साथ अपने खाली वक्त का सदुपयोग मास्क बनाने में कर रही है. अनिका का छोटा भाई भी इस काम में उसका साथ देता है.

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कोरोना लॉकडाउन में डिजाइनर मास्क तैयार करते बच्चे (Photo- मनोज्ञा) कोरोना लॉकडाउन में डिजाइनर मास्क तैयार करते बच्चे (Photo- मनोज्ञा)

मनोज्ञा लोइवाल

  • कोलकाता ,
  • 13 अप्रैल 2020,
  • अपडेटेड 4:54 PM IST

  • बोरिंग लॉकडाउन में डिजाइनर मास्क बनाते बच्चे
  • सादे मास्क को बना रहे क्रिएटिव और फैशनेबल

11 साल की अनिका गोयनका चमकदार और बेहतर मास्क बनाने में व्यस्त है. जैसे ही वो सितारों को मास्क से चिपकाने के लिए सोल्यूशन की बूंद डालती है, उसकी आंखों की चमक भी बढ़ जाती है.

अनिका घर पर पढ़ाई के साथ अपने खाली वक्त का सदुपयोग मास्क बनाने में कर रही है. अनिका का छोटा भाई भी इस काम में उसका साथ देता है.

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अनिका कहती है, 'मुझे डूडलिंग बहुत पसंद है. मैं कागज पर उसे करते-करते बोर हो गई थी. इसलिए मैंने इसे इन प्लेन मास्क पर करने की ठानी. मैंने मास्क पर डूडलिंग्स, कट आउट फ्लावर्स, मैटेलिक ब्रश पेंट, क्रिस्टल स्टोंस और अन्य सजावटी चीजों का सहारा लिया. इन मास्क का कपड़ा सुरक्षित है जो मेरे पापा की फैक्ट्री का है. ये मास्क सिर्फ सजावटी ही नहीं इस्तेमाल भी किए जा सकते हैं.'

अनिका के पिता शांतनु गोयनका साड़ी-लहंगा कलेक्शंस के जाने माने फैशन डिजाइनर हैं. वो भी अपने बच्चों के इस टेंलेंट को देखकर हैरान हैं. शांतनु कहते हैं कि 'लॉकडाउन में देश में सभी के लिए मुश्किल वक्त है. सब कारोबार, फैक्ट्रिया बंद पड़ी हैं. ऐसे में बच्चों को ऐसे फैंसी प्रोजेक्ट में व्यस्त रखना बड़ा गेम चेंजर है.'

शांतनु गोयनका के मुताबिक, वो सभी क्रिएटिव लोगों को सलाह देना चाहते हैं कि वो भी बच्चों के साथ ऐसे प्रोजेक्ट करें और उन्हें व्यस्त रखें. शांतनु ने बताया कि उनकी बेटी अनिका पास आकर बोलीं...'डैड, हम इन्हें क्या और दिलचस्प नहीं बना सकते? ये बोरिंग मास्क जो आप रोज पहन रहे हैं. इन्हें क्या थोड़ा फैशनेबल नहीं बनाया जा सकता?'

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ऐसे डिजाइनर मास्क तैयार कर रहे बच्चे

ना सिर्फ अनिका, बल्कि उसके चचेरे भाई-बहनों ने भी इस पहल को अपनाया है. वो भी घर पर फैंसी मास्क बनाने में लगे हैं. अनिका का चचेरा भाई और इस क्रिएटिव पहल में साथी प्रतिनव अग्रवाल का कहना है, " मैंने इस बोरिंग लॉकडाउन का सही इस्तेमाल करने का सोचा. मास्क के साथ क्रिएटिविटी में सुरक्षा का भी पूरा ध्यान रख रहे हैं. मैंने सादे मास्क को देखा तो उस पर अपने प्रिय कैरेक्टर वेनम को उकेरा.'

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घर के सबसे छोटे सदस्य यशवंत जालान में सबसे ज्यादा विश्वास नजर आया. यशवंत ने कहा, 'मैंने ढिशूम कोरोना मास्क बनाया है...इससे कोरोना को मारने और मात देने का संदेश है...मास्क बनाने का मेरा यही मकसद है...जो इन्हें पहनें वो भी कोरोना के साथ ढिशूम करें और कोरोना को मार गिराएं.'

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आपको कहीं भी जाना है तो मास्क पहनना जरूरी है. सादा मास्क पहनने की जगह ऐसे क्रिएटिव मास्क पहनने से जिंदादिली का अहसास होता है. ऐसे में इन बच्चों का दिखाया रास्ता सुरक्षित होने के साथ तारीफ के काबिल है.

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