सामाजिक कार्यकर्ता वरवरा राव कोरोना पॉजिटिव, मुंबई के अस्पताल में भर्ती

सामाजिक कार्यकर्ता वरवरा राव कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं. देशभर में कोरोना के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए पिछले महीने जावेद अख्तर, नसीरुद्दीन शाह और अनुराग कश्यप समेत 375 से अधिक प्रख्यात हस्तियों ने करीब एक दर्जन सामाजिक कार्यकर्ताओं की तत्काल रिहाई की मांग करते हुए पत्र लिखा था.

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सामाजिक कार्यकर्ता वरवरा राव कोरोना पॉजिटिव (फाइल फोटो-PTI) सामाजिक कार्यकर्ता वरवरा राव कोरोना पॉजिटिव (फाइल फोटो-PTI)

साहिल जोशी

  • मुंबई,
  • 16 जुलाई 2020,
  • अपडेटेड 9:03 PM IST

  • 80 साल के वरवरा राव हॉस्पिटल में शिफ्ट
  • पिछले महीने रिहाई की गुहार लगाई गई थी
  • लंबे समय से गंभीर रूप से बीमार भी हैं वरवरा
सामाजिक कार्यकर्ता वरवरा राव कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं. राव की तबीयत ठीक नहीं होने की वजह से उन्हें तालोजा जेल से जेजे हॉस्पिटल शिफ्ट कर दिया गया है. पिछले महीने गीतकार जावेद अख्तर और नसीरुद्दीन शाह समेत देश के साढ़े तीन सौ से ज्यादा हस्तियों ने सरकार को पत्र लिखकर राव समेत दर्जनभर सामाजिक कार्यकर्ताओं की तत्काल रिहाई की मांग की थी.

प्रख्यात सामाजिक कार्यकर्ता और 80 साल के वरवरा राव के अलावा सुधा भारद्वाज, आनंद तेलतुम्बडे, गौतम नवलखा, वर्नोन गोंसाल्वेज, शोमा सेन, महेंद्र राउत, सुधीर धवले, अरुण फरेरा, सुरेंद्र गडलिंग और रोना विल्सन समेत कई अन्य लोगों के स्वास्थ्य को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए इन हस्तियों की तत्काल रिहाई की मांग की गई थी. तब पत्र मेें कहा गया था कि हिरासत में लिए गए 80 वर्षीय वरवारा राव गंभीर रूप से बीमार हैं.

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पिछले महीने देशभर में कोरोना के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए प्रख्यात गीतकार और लेखक जावेद अख्तर, अभिनेता नसीरुद्दीन शाह और फिल्मकार अनुराग कश्यप समेत 375 से अधिक प्रख्यात हस्तियों ने करीब एक दर्जन सामाजिक कार्यकर्ताओं की रिहाई की मांग की थी.

इन हस्तियों ने भारत सरकार से सार्वजनिक तौर पर अपील करते हुए अनुरोध किया कि कोरोना संकट को देखते हुए देश में वर्तमान में जिस तरह के हालात हैं, उसके आधार पर राजनीतिक कैदियों को तत्काल जमानत पर रिहा किया जाए.

सामाजिक कार्यकर्ता वरवरा राव, सुधा भारद्वाज, आनंद तेलतुम्बडे, गौतम नवलखा, वर्नोन गोंसाल्वेज, शोमा सेन, अरुण फरेरा, सुरेंद्र गडलिंग, महेंद्र राउत, सुधीर धवले और रोना विल्सन समेत कई अन्य लोगों के स्वास्थ्य को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए इन हस्तियों की तत्काल रिहाई की मांग की गई.

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कार्यकर्ता कोई अपराधी नहीं

पिछले महीने जून में 375 से अधिक हस्तियों की ओर से जारी बयान में कहा गया था कि इन सामाजिक कार्यकर्ताओं में से कई प्रतिष्ठित विद्वानों, लेखकों और कवियों ने, दशकों से भारत की गरीब जनता और हाशिए पर रहने को मजबूर लोगों के कल्याण के लिए काम किया है. उन्हें राजनीतिक कैदियों में बदल दिया गया, और उन्हें कैद कर लिया गया.

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बयान में सरकार से गुजारिश करते हुए आगे कहा गया कि महाराष्ट्र के कुछ कैदियों की कोरोना से मौत और कई अन्य के कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बावजूद इन सामाजिक कार्यकर्ताओं को जमानत नहीं दी जा रही है. इन कार्यकर्ताओं को अपराधी नहीं ठहराया गया है और न ही वे देश से भागने या फिर कानून से बचने की कोई योजना बना रहे हैं. ऐसे में हमारी मांग है कि उन्हें मानवीय आधार पर तुरंत जमानत दी जाए, क्योंकि देशभर में कोरोना महामारी फैलने पर उनके जीवन को खतरा है.

नसीरुद्दीन, प्रकाश राज, रोमिला थापर भी शामिल

जेलों में बंद कई सामाजिक कार्यकर्ताओं की रिहाई की मांग वाले बयान में जावेद अख्तर, शबाना आजमी, अनुराग कश्यप, रोमिला थापर, अदूर गोपालकृष्णन, अमोल पालेकर, सौमित्र चटर्जी, नसीरुद्दीन शाह, नंदिता दास, टीएम कृष्णा, अपर्णा सेन, रत्ना पाठक शाह, प्रकाश राज, नयनतारा सहगल, अमिताव घोष, अरुंधति रॉय, मल्लिका साराभाई, इंदिरा जयसिंह, हर्ष मांढेर और अरुणा रॉय ने हस्ताक्षर किए थे.

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