दिल्ली: डीडीयू में जमाती दे रहे डॉक्टर्स को गाली, अस्पताल के दो स्टाफ भी कोरोना पॉजिटिव

दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल के आइसोलेशन सेंटर में काम करने वाले दो वार्ड ब्वॉय कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए हैं. वहीं अस्पताल में तबलीगी जमात के लोग डॉक्टर्स को परेशान भी कर रहे हैं.

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तबलीगी जमात से जुड़े कई लोग कोरोना पाॉजिटिव (फोटो-पीटीआई) तबलीगी जमात से जुड़े कई लोग कोरोना पाॉजिटिव (फोटो-पीटीआई)

पुनीत शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 04 अप्रैल 2020,
  • अपडेटेड 7:30 AM IST

  • डॉक्टर्स को परेशान कर रहे हैं जमाती
  • दो वार्ड ब्वॉय कोरोना वायरस से संक्रमित
देश में कोरोना वायरस के संक्रमित मरीजों का आंकड़ा लगातार बढ़ता ही जा रहा है. इस बीच दिल्ली के दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल के आइसोलेशन सेंटर में काम करने वाले दो वार्ड ब्वॉय के कोरोना वायरस से संक्रमित होने का मामला सामने आया है. वहीं अस्पताल में तबलीगी जमात के लोग डॉक्टर्स को परेशान भी कर रहे हैं.

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दिल्ली के दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल के आइसोलेशन सेंटर में काम करने वाले दो वॉर्ड ब्वॉय कोरोना वायरस से पॉजिटिव पाए गए हैं. ऐसे में अब हॉस्पिटल स्टाफ को खुद की सुरक्षा की चिंता सताने लगी है. हॉस्पिटल स्टाफ का कहना है कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की ओर से मेडिकल स्टाफ के लिए 1 करोड़ रुपये के मुआवजे की घोषणा की गई है. हॉस्पिटल स्टाफ इसे सही नहीं मान रहा है.

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दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के जरिए मेडिकल स्टाफ को एक करोड़ रुपये के मुआवजे की बात पर हॉस्पिटल स्टाफ सवाल उठा रहा है. उनका कहना है कि ऐसे हालात ही क्यों पैदा हो कि कोई मरे और सरकार को एक करोड़ रुपये देने पड़ें. स्टाफ का कहना है कि हॉस्पिटल में जरूरी सामानों की सप्लाई नहीं हो रही. सरकार ठीक से सप्लाई दे. पीपी किट, मास्क, सैनिटाइजर, ग्लव्ज आदि की हॉस्पिटल में कमी बनी हुई है.

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डॉक्टर्स को परेशान कर रहे जमाती

दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल के स्टाफ का कहना है कि तबलीगी जमात के 35 लोगों को आइसोलेशन में रखा गया है. ये लोग डॉक्टर्स को परेशान कर रहे हैं. साथ ही इन लोगों को भाषा की परेशानी है. इन्हें हिंदी और अंग्रेजी ठीक से समझ नहीं आती है. इस वजह से ये लोग पैनिक हो जाते हैं. जिसके कारण ये लोग डॉक्टर्स और स्टाफ से झगड़ते हैं.

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स्टाफ का कहना है कि ये लोग डॉक्टरों और स्टाफ को गाली देते हैं और मारपीट करने पर उतारू हो जाते हैं. ऐसे में डॉक्टर और स्टाफ की सुरक्षा के लिए महज एक गार्ड रखा गया है. हालांकि सरकार को यहां एक ट्रांसलेटर रखना जरूरी है जो इन लोगों की बातें समझकर डॉक्टरों को बता सके और डॉक्टरों की बातें समझकर इनको समझा सके. तबलीगी जमात के इन लोगों को लगता है कि इनको जबरन यहां लाकर बंद कर दिया गया है.

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