कोरोना संकट: जिनपिंग ने एंजेला मर्केल से की बात, WHO को नया रूप देने पर सहमति

चीन लगातार कोरोना वायरस के कारण दुनिया में आलोचना का सामना कर रहा है. इस बीच शी जिनपिंग ने एंजेला मर्केल से बात की है और दोनों नेता WHO को नया रूप देने पर सहमत हुए हैं.

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चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग (PTI) चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग (PTI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली ,
  • 05 जून 2020,
  • अपडेटेड 1:44 PM IST
  • कोरोना संकट के बीच चीन-जर्मनी की बात
  • WHO को नया रूप देने पर सहमति
  • कोरोना की वजह से घेरे में है चीन

कोरोना वायरस महासंकट के बीच गुरुवार को चीनी राष्ट्रपति शी चिनपिंग ने जर्मन चांसलर एंजेला मर्केल के साथ फोन पर बातचीत की. बातचीत के दौरान राष्ट्रपति शी ने कहा कि जब से कोविड-19 महामारी फैली तब से हमारे बीच तीसरी बार बातचीत हो रही है, जिससे दोनों पक्षों के बीच उच्च राजनीतिक विश्वास और घनिष्ठ सामरिक संचार जाहिर हुई.
चीन की ओर से कहा गया कि वह जर्मनी के साथ विश्व स्वास्थ्य संगठन का समर्थन करने तथा संयुक्त राष्ट्र और जी 20 समूह के ढांचे में सहयोग करने को तैयार है, और दोनों देश महामारी की रोकथाम में अफ्रीकी देशों का साथ-साथ समर्थन करेंगे. 
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शी ने कहा कि चीनी अर्थव्यवस्था की दीर्घकाल के लिए सकारात्मक प्रवृत्ति नहीं बदली है. हम अविचल तौर पर खुलेपन और सहयोग का विस्तार करेंगे. चीन जर्मन कारोबारों के निवेश के लिए बेहतरीन माहौल बनाने को तैयार है. 
चीन और जर्मनी तथा यूरोप के बीच राजनीतिक संपर्क के सिलसिले पर विचार विनिमय किया जा रहा है. चीन अपने जर्मन और यूरोपीय सहपाठियों के साथ घनिष्ठ तौर पर संपर्क रखकर इन गतिविधियों की सफलता की गारंटी देगा. 
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जर्मनी ने दिया चीन के साथ का भरोसा
दूसरी ओर जर्मन चांसलर एंजेला मर्केल ने इस बातचीत में कहा कि जर्मनी चीन की राष्ट्रीय जन प्रतिनिधि सभा में निर्धारित विकास योजना को महत्व देता है और चीन के साथ महामारी की रोकथाम के साथ आर्थिक बहाली को आगे बढ़ाएगा. महामारी को रोकने की वर्तमान स्थिति में अंतर्राष्ट्रीय एकता और बहुपक्षवाद को मजबूत करना विश्व के लिए महत्वपूर्ण है.
जर्मनी चीन के साथ सहयोग कर विश्व स्वास्थ्य संगठन की भूमिका का समर्थन करेगा और अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य सहयोग को बढ़ाएगा. जर्मनी चीन के साथ बातचीत कर व्यापक विषयों और मुद्दों पर सहयोग करेगा.
गौरतलब है कि दोनों नेताओं के बीच ये बातचीत इसलिए भी अहम है क्योंकि अब WHO से अमेरिका बाहर निकल गया है. 

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