MIT के ट्रैकर इंडेक्स पर आरोग्य सेतु ऐप 5 में से 3 इंडीकेटर्स पर रहा नाकाम

MIT ने दुनिया भर में कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग ऐप्स को लेकर अपने निष्कर्ष जारी किए हैं. इसके लिए ऐप्स को अमल में लाने के तरीके, डेटा की हैंडलिंग, गोपनीयता और पारदर्शिता से जुड़ी डायनामिक्स पर गौर किया गया.

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आरोग्य सेतु ऐप (फाइल फोटो) आरोग्य सेतु ऐप (फाइल फोटो)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 10 मई 2020,
  • अपडेटेड 1:00 PM IST

दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के सार्वजनिक और निजी सेक्टर्स के कर्मचारियों के लिए आरोग्य सेतु ऐप अनिवार्य है. भारत का ये ऐप Covid-19 ट्रैकिंग ऐप्स के लिए डेटा-प्राइवेसी और पारदर्शिता के पांच इंडीकेटर्स में से तीन में नाकाम रहा है. अमेरिका स्थित मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) की ओर से ग्लोबल टेक्नोलॉजी की समीक्षा से ये तथ्य सामने आया है.

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MIT ने दुनिया भर में कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग ऐप्स को लेकर अपने निष्कर्ष जारी किए हैं. इसके लिए ऐप्स को अमल में लाने के तरीके, डेटा की हैंडलिंग, गोपनीयता और पारदर्शिता से जुड़ी डायनामिक्स पर गौर किया गया.

गुरुवार को लॉन्च किए गए MIT ट्रैकर में 25 ऐसे टूल्स को डॉक्यूमेंट किया गया है. विश्लेषण में देखा गया, "वे क्या हैं, कैसे काम करते हैं और उनके आसपास किन नीतियों और प्रक्रियाओं को रखा गया है.”

MIT विशेषज्ञों के मुताबिक, भारत का आरोग्य सेतु जिन दो पैमानों पर खरा साबित हुआ वो हैं- समय से यूजर्स का डेटा डिलीट करना और सिर्फ उपयोगी डेडा मानदंडों का कलेक्शन.

वहीं आरोग्य सेतु स्वैच्छिक इस्तेमाल, डेटा उपयोग की सीमाएं और पारदर्शी मानदंडों पर स्कोर करने में नाकाम रहा.

वो देश, जिन्होंने पूरे मार्क्स हासिल किए

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जिन देशों के Covid ऐप्स ने इस ट्रैकर पर पांच में से पांच अंक हासिल किए उनमें सिंगापुर, ऑस्ट्रेलिया, नॉर्वे, इजराइल, चेक गणराज्य, आइसलैंड और ऑस्ट्रिया शामिल हैं.

वो देश, जिन्हें भारत से कम मार्क्स मिले

चीन पांच मापदंडों पर किसी एक में भी स्कोर करने में नाकाम रहा, जबकि फ्रांस, आयरलैंड और ईरान सिर्फ एक मापदंड पर स्कोर करने में सफल रहे.

भारत के बराबर जर्मनी

भारत की तरह जर्मनी भी पांच में से केवल दो मापदंडों पर स्कोर कर पाया. MIT ट्रैकर में दक्षिण कोरिया को शामिल नहीं किया गया जो Covid-19 मौत के आंकड़े को काफी हद तक काबू में रखने में सफल रहा है.

मेथेडोलॉजी

इंडेक्स हर ऐप को लेकर पांच बुनियादी सवालों पर काम करता है. अगर जवाब हां में आता है तो ऐप को एक स्टार मिलता है. अगर जवाब हां में नहीं है तो या तो वो नकारात्मक है या उसके बारे में जानकारी नहीं है, ऐसी स्थिति में रेटिंग को खाली छोड़ दिया जाता है.

ये सवाल ऐप के स्वैच्छिक या अनिवार्य होने, डेटा के उपयोग, कलेक्ट किए डेटा को समय से डिलीट किया जाना, डेटा की किस्म और मात्रा, ऐप से जुड़ी समग्र पारदर्शिता से जुड़े हैं.

ट्रैकर इंडेक्स टीम से जुड़े सदस्यों ने कहा, "डेटाबेस किसी ऐप को डाउनलोड करने या न करने की सिफारिश से जुड़ा नहीं है. इसका इरादा आप तक उस डेटा को लाना है जो आपको ये फैसला लेने में मदद करे कि किसी सर्विस का इस्तेमाल किया जाए या नहीं. और क्या आप सरकार की किसी एप्रोच में बदलाव चाहते हैं.”

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MIT टीम का कहना है कि वह यह समझने के अलग-अलग विशेषज्ञों के साथ काम कर रही है कि उनका नजरिया क्या है. MIT ने समीक्षा में लिखा है, “जब हमने दुनिया भर के ऐप्स की तुलना करना शुरू किया, तो हमें महसूस हुआ कि सूचना का कोई केंद्रीय भंडार नहीं था; केवल अधूरे, लगातार बदलते हुए डेटा ही सोर्सेज की विस्तृत रेंज में फैले हैं.”

समीक्षा में कहा गया है कि डेटाबेस डायनामिक इंडेक्स है, जिसे निर्माता अपडेट रखने का इरादा रखते हैं. ऐसा जैसे-जैसे इन ऐप्स के अमल को लेकर स्पष्टता और अधिक जानकारी सामने आएगी, किया जाएगा.

इसी जर्नल के एक अन्य लेख में कहा गया है कि भारत एकमात्र ऐसा लोकतंत्र है, जिसने लाखों लोगों के लिए कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग ऐप का उपयोग अनिवार्य कर दिया है.

अलग राय

आरोग्य सेतु सिस्टम में पर्याप्त पारदर्शिता की कमी की ओर विशेषज्ञों के लगातार इंगित करने के बावजूद Google के प्ले स्टोर प्लेटफॉर्म पर इसे 5 में से 4.4 रेटिंग मिली है. यानी इसे काफी सकारात्मक फीडबैक मिला है. आरोग्य सेतु ऐप के लिए ऐप्पल के ऐप स्टोर पर एप्रूवल रेंटिंग भी 5 में से 4.2 के साथ बहुत सकारात्मक है. भारत में मौजूदा स्थिति में एप्लिकेशन के 9.63 करोड़ यूजर्स हैं.

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इस बीच नीति आयोग के प्रमुख अमिताभ कांत ने शनिवार को एक अपडेट पोस्ट किया. इसमें उन्होंने एक एथिकल हैकर फ्रैंक लियाऊ की ओर से की गई कोड समीक्षा का हवाला दिया, इसमें ऐप को सकारात्मक प्रतिक्रिया दी गई है.

कांत ने ट्वीट किया, "#आरोग्यसेतु सुरक्षा फीचर को सिंगापुर के एथिकल हैकर @frankvolke की ओर से मान्य ठहराया गया है. ऐप डिजाइन के नाते ‘प्राइवेसी-फर्स्ट’ है. ”

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