बदल गई MSME की परिभाषा, बड़ी इंडस्‍ट्री से अलग कैसे होती हैं ये कंपनियां?

बुधवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने करीब 6 लाख करोड़ के राहत पैकेज का ऐलान किया. ये कुल 20 लाख करोड़ के पैकेज का हिस्‍सा है, जिसकी घोषणा खुद पीएम नरेंद्र मोदी ने की थी.

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सूक्ष्म, लघु और मझोले कारोबार की परिभाषा में बदलाव सूक्ष्म, लघु और मझोले कारोबार की परिभाषा में बदलाव

दीपक कुमार

  • नई दिल्‍ली,
  • 14 मई 2020,
  • अपडेटेड 10:32 AM IST

  • 1 करोड़ रुपये तक के निवेश वाली इकाइयां माइक्रो कारोबार की कैटेगरी में
  • 10 करोड़ रुपये तक के निवेश वाली इकाइयां स्‍मॉल कारोबार की कैटेगरी में
  • 20 करोड़ रुपये तक के निवेश वाली इकाइयां मझोले यानी मीडियम कैटेगरी में

बीते मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 20 लाख करोड़ रुपये के राहत पैकेज का ऐलान किया था. इस पैकेज में से एक हिस्‍सा सूक्ष्म, लघु और मझोले कारोबार (MSME) को दिया गया है. वहीं सरकार ने सूक्ष्म, लघु और मझोले कारोबार की परिभाषा में भी बदलाव कर दिया है.

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इसके अलावा जो अहम फैसला हुआ है वो ई-मार्केट लिंकेज का है. निर्मला सीतारमण ने बताया कि MSME को ई-मार्केट लिंकेज किया जाएगा. इस पर रॉयल इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड सर्वेयर्स (RICS) दक्षिण एशिया के एमडी निमिष गुप्ता के मुताबिक ये एक शानदार फैसला है. इससे इस सेक्‍टर में बड़ा बदलाव आएगा.

परिभाषा में क्‍या हुआ है बदलाव ?

नई परिभाषा के तहत अब मैन्‍युफैक्‍चरिंग से जुड़े 1 करोड़ रुपये तक के निवेश वाली इकाइयां सूक्ष्म यानी माइक्रो कारोबार की कैटेगरी में आएंगी. वहीं, 10 करोड़ रुपये तक के निवेश वाली इकाइयां लघु यानी स्‍मॉल कारोबार की कैटेगरी में होंगी. इसी तरह, 20 करोड़ रुपये तक के निवेश वाली इकाइयां मझोले यानी मीडियम कैटेगरी में आएंगी. अब तक सूक्ष्म, लघु और मझोले कारोबार में निवेश के रकम की सीमा क्रमश: 25 लाख रुपये, 5 करोड़ रुपये और 10 करोड़ रुपये थी.

टर्नओवर में भी हुआ बदलाव?

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सरकार ने सालाना कारोबार यानी टर्नओवर के मानदंड को भी बदला है. इसके तहत 5 करोड़ रुपये तक के सालाना कारोबार वाली इकाइयां सूक्ष्म, 50 करोड़ रुपये के कारोबार वाली लघु और 100 करोड़ रुपये के कारोबार वाली मझोली इकाइयां कहलाएंगी.

क्‍या होगा असर?

निमिष गुप्ता ने बताया कि सूक्ष्म, लघु और मझोले कारोबार (MSME) लंबे समय से परिभाषा में बदलाव की मांग कर रहा था. दरअसल, सरकार इस सेक्‍टर को कई खास रियायतें देती है. यही वजह है कि अच्छा प्रदर्शन करने वाली MSME के बीच यह डर रहता था कि अगर उनका आकार बढ़ता है तो वे MSME के दायरे से बाहर हो जाएगी.

इससे उन्हें मिलने वाली छूट बंद हो जाएगी. ऐसे में कई MSME सिर्फ छूट की लालच में अपना करोबार नहीं बढ़ने देना चाहती थीं. अब परिभाषा में बदलाव के साथ उनका यह डर खत्म हो जाएगा. जाहिर सी बात है कि सरकार का नया फैसला राहत देने वाला है.

बड़ी कंपनियों से अलग कैसे ?

दरअसल, सरकार सूक्ष्म, लघु और मझोले कारोबार (MSME)को बढ़ाने के लिए अलग-अलग स्‍तर पर कई तरह की रियायतें देती है. इन्‍हें बड़ी इंडस्‍ट्री के मुकाबले लोन बेहद आसानी से मिल जाता है तो वहीं टैक्‍स में भी रियायत दी जाती है. देश के उद्योग की वैश्विक स्तर पर ले जाने के मकसद से यह छूट दी जाती है. आपको यहां बता दें कि यह सेक्टर भारतीय रोजगार की रीढ़ माना जाता है. इससे करीब 12 करोड़ लोगों को रोजगार मिलता है.

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MSME के लिए और कई बड़े ऐलान

बता दें कि बुधवार को निर्मला सीतारमण ने MSME के लिए कई बड़े ऐलान किए. इसके तहत अब MSME और कुटीर-गृह उद्यमों को 3 लाख करोड़ रुपये का बिना जमानत के लोन मिलेगा. इसकी समय सीमा भी चार वर्ष की होगी. पहले एक वर्ष में मूलधन वापस नहीं करना पड़ेगा.

ये पढ़ें- राहत की पहली किस्‍त में मिडिल क्‍लास को क्‍या मिला? जानें 5 बड़े ऐलान

वहीं दबाव में आ चुके MSME को 20,000 करोड़ रुपये का सब-आर्डिनेट डेट यानी कर्ज दिया जाएगा. इसके अलावा मदद के लिए फंड्स ऑफ फंड के द्वारा 50,000 करोड़ रुपये की इक्विटी सहयोग दी जाएगी.

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