मुनाफा कमा रहे बैंक, फिर भी लुढ़क रहे शेयर, जानिए कहां है दिक्कत

बीते कुछ दिनों से एक के बाद एक बैंकों के तिमाही नतीजों का ऐलान हो रहा है. लेकिन अधिकतर बैंकों के नतीजे आने के बाद इनके शेयर भाव में गिरावट देखने को मिल रही है.

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कई बैंकों का एनपीए बढ़ गया है कई बैंकों का एनपीए बढ़ गया है

दीपक कुमार

  • नई दिल्‍ली,
  • 23 अक्टूबर 2019,
  • अपडेटेड 3:11 PM IST

  • बैंकों को हुआ मुनाफा लेकिन एनपीए में भी इजाफा
  • इंडसइंड बैंक, कोटक बैंक और कर्नाटक बैंक का एनपीए बढ़ा

अक्‍टूबर का महीना भारतीय शेयर बाजार के लिए बेहद खास माना जाता है. दरअसल, इस महीने में अधिकतर कंपनियों के तिमाही नतीजे जारी होते हैं. ऐसे में यह तय माना जाता है कि तिमाही नतीजों का असर कंपनियों के शेयर पर भी पड़ता है. अगर बीते कुछ समय से बैंकों के नतीजों को देखें तो उन्‍हें मुनाफा तो हुआ है लेकिन शेयर भाव में गिरावट भी आई है. लेकिन सवाल है कि आखिर मुनाफे के बाद भी बैंकों के शेयर भाव में उतार-चढ़ाव क्‍यों देखने को मिल रही है. आइए समझते हैं..

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एनपीए होता है बड़ा फैक्‍टर

कोई भी बैंक जब अपनी तिमाही नतीजे जारी करते हैं तो उनके शेयर भाव को सबसे अधिक प्रभावित बैलेंसशीट करती है. इसके जरिए यह पता चलता है कि बैंक के कितने कर्ज फंस गए हैं या फिर कितना मुनाफा और घाटा हुआ है. हमारे देश के अधिकतर बैंकों के फंसे हुए कर्ज यानी एनपीए में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है. यही वजह है कि बैंकों के मुनाफे के बाद भी इसके शेयर भाव लुढ़क जाते हैं.

इंडसइंड बैंक के तिमाही नतीजे

बीते 10 अक्‍टूबर को इंडसइंड बैंक की ओर से तिमाही नतीजे जारी किए गए. बैंक ने बताया कि चालू वित्त वर्ष की सितंबर तिमाही में नेट प्रॉफिट 52.2 फीसदी बढ़कर 1,400 करोड़ रुपये पर पहुंच गया है. एक साल पहले के वित्त वर्ष की समान तिमाही में बैंक का नेट प्रॉफिट 920 करोड़ के करीब था. वहीं बैंक की कुल कमाई में भी इजाफा हुआ है और यह बढ़कर 8,877.53 करोड़ रुपये पर पहुंच गया है. इससे पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में बैंक की आय 6,755.37 करोड़ रुपये रही थी.

एनपीए की वजह से नुकसान

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हालांकि नॉन परफॉर्मिंग एसेट (एनपीए)  के मामले में बैंक की हालत बिगड़ी है. इंडसइंड बैंक के तिमाही नतीजों के तिमाही आंकड़े बताते हैं कि 30 सितंबर, 2019 तक बैंक का एनपीए कुल कर्ज का 2.19 फीसदी है. एक साल पहले इसी अवधि में एनपीए 1.09 फीसदी था. इसका मतलब यह हुआ कि बैंक के एनपीए में  1.11 फीसदी का इजाफा हुआ है. इस वजह से बैंक के शेयर प्राइस में भी गिरावट देखने को मिली. इस दिन बैंक ने तिमाही नतीजों का ऐलान किया और शेयर 6.15 फीसदी तक टूटकर 1300 अंक के नीचे बंद हुए. बता दें कि बैंक के तिमाही नतीजे आने से पहले शेयर भाव 1500 रुपये से ज्‍यादा था.   

कोटक बैंक के तिमाही नतीजे

इसी तरह कोटक महिंद्रा बैंक के तिमाही नतीजे भी आ गए हैं. चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में बैंक का नेट प्रॉफिट 38 फीसदी बढ़कर 2,407.25 करोड़ रुपये पर पहुंच गया है जबकि एक साल पहले इसी तिमाही में बैंक का नेट प्रॉफिट 1,747 करोड़ रुपये था. इस दौरान बैंक की कुल आय 12,543 करोड़ रुपये रही जबकि पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में यह 10,829 करोड़ रुपये थी.

हालांकि कोटक बैंक के भी नॉन परफॉर्मिंग एसेट यानी एनपीए में बढ़ोतरी हुई है. ताजा आंकड़ों के मुताबिक एनपीए 2.17 फीसदी पर है जो पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में 1.91 फीसदी था. इन नतीजों की वजह से बैंक के शेयर में गुरुवार को करीब 1 फीसदी तक की गिरावट आई. शेयर बाजार के एक्‍सपर्ट बताते हैं कि एनपीए बढ़ने की वजह से बैंक के शेयर भाव में आगे भी गिरावट देखने को मिल सकती है.

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कर्नाटक बैंक के तिमाही नतीजे

बीते 15 अक्‍टूबर को कर्नाटक बैंक ने 30 सितंबर को समाप्त तिमाही के नतीजे जारी किए. इसके मुताबिक बैंक का नेट प्रॉफिट 5.3 फीसदी घटकर 105.91 करोड़ रुपये रहा. वित्त वर्ष 2018-19 की जुलाई-सितंबर तिमाही में बैंक को 111.86 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ हुआ था. बैंक के इस हालात की वजह बैंक के फंसे कर्ज में वृद्धि होना है.

इस अवधि में बैंक का एनपीए उसके कुल कर्ज का 4.78 फीसदी रह जो इससे पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में 4.66 फीसदी था. इसका असर बैंक के शेयर पर देखने को मिला और नतीजों के अगले ही दिन करीब 3 रुपये टूटकर भाव 70 रुपये के नीचे आ गया.

इन बैंकों के एनपीए में सुधार

हालांकि इस बीच कुछ बैंकों के एनपीए में सुधार भी हुआ है. एक्सिस बैंक को चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में घाटे से जूझना पड़ा है. लेकिन बैंक की कर्ज में फंसी राशि यानी एनपीए सितंबर 2019 में घटकर 5.03 फीसदी रह गया. एक साल पहले इसी अवधि में यह 5.96 प्रतिशत था. नतीजों के ऐलान के अगले दिन यानी बुधवार को एक्‍सिस बैंक के शेयर में उतार-चढ़ाव देखने को मिला.

इसी तरह ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स (ओबीसी) का शुद्ध लाभ चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में 23.5 फीसदी बढ़कर 126 करोड़ रुपये पर पहुंच गया. ओबीसी का एनपीए 30 सितंबर 2019 को समाप्त तिमाही में घटकर 12.53 फीसदी पर आ गया जो सितंबर 2018 को समाप्त तिमाही में 17.24 फीसदी था. इसी तरह एचडीएफसी बैंक के भी एनपीए में कमी आई है.

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