अजीम प्रेमजी ने इसी साल अपनी संपत्ति का बड़ा हिस्सा परोपकारी कार्यो में लगाने का ऐलान किया था. इसके लिए अब अजीम प्रेमजी और उनकी इकाइयों ने 7,300 करोड़ रुपये के शेयर बेचे दिए हैं. शेयर बायबैक कार्यक्रम के तहत प्रेमजी ने प्रमोटर्स को यह शेयर बेचे हैं.
स्टॉक एक्सचेंजों को दी गई जानकारी में कंपनी ने बताया है कि उसने 32 करोड़ पूर्ण पेड-अप इक्विटी शेयरों के लिए 21 जून को 325 रुपये प्रति शेयर के हिसाब से पोस्ट बायबैक ऑफर की घोषणा की थी. इसका मतलब यह है कि कंपनी ने अजीम प्रेमजी और उनकी इकाइयों को जारी शेयर खरीद लिए हैं.
इस साल अप्रैल में विप्रो के बोर्ड ने 325 रुपये प्रति शेयर के भाव पर 32.30 करोड़ शेयर बायबैक करने का ऐलान किया था. यह ऑफर पिछले महीने ही खत्म हुआ है.
अजीम प्रेमजी और उनके स्वामित्व वाली इकाइयों ने करीब 32.2 करोड़ शेयर बेचे हैं. कंपनी में अजीम प्रेमजी और और उनकी इकाइयों की 3.96 फीसदी हिस्सेदारी है. इस बायबैक के पहले प्रमोटर और ग्रुप फर्म की हिस्सेदारी 73.83 फीसदी थी, जो अब बढ़कर 74.04 फीसदी पहुंच गई है. इस बिक्री से हासिल रकम का बड़ा हिस्सा अजीम प्रेमजी फाउंडेशन के द्वारा जनकल्याणकारी कार्यों पर खर्च किया जाएगा. अजीम प्रेमजी फाउंडेशन दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी और एशिया की सबसे बड़ी परोपकारी संस्था है.
अजीम प्रेमजी ने जुलाई महीने में विप्रो के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन पद से इस्तीफा दे दिया था और कंपनी की कमान अपने पुत्र रिशद प्रेमजी को सौंप दी थी. ब्लूमबर्ग बिलियनरीज इंडेक्स के मुताबिक अजीम प्रेमजी के पास 18 अरब डॉलर की संपत्ति है. मार्च में प्रेमजी ने विप्रो में अपने 67 प्रतिशत शेयरों से होने वाली सारी आमदनी अजीम प्रेमजी फाउंडेशन को देने की घोषणा की थी. उस वक्त इसकी वैल्यू 1,45,000 करोड़ यानी करीब 21 अरब डॉलर लगाई गई थी.
प्रेमजी इस तरह बिल गेट्स, जॉर्ज सोरोस और वॉरेन बफेट जैसे दुनिया के उन नामचीन लोगों की कतार में पहुंच गए हैं, जिन्होंने समाज कल्याण के कार्यों के लिए बड़ी रकम दान की है.
प्रेमजी फाउंडेशन चैरिटेबल ट्रस्ट है, जो सरकार के साथ मिलकर कई राज्यों में प्राथमिक शिक्षा की क्वॉलिटी बेहतर बनाने के लिए काम कर रही है. इस फाउंडेशन ने देश के कई पिछड़े इलाकों में शिक्षा के लिए काफी काम किया है. फाउंडेशन द्वारा बेंगलुरु में अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी की स्थापना की गई है.
अजीम प्रेमजी उस फैमिली से आते हैं, जिसने बंटवारे के दौर में पाकिस्तान के फाउंडर मुहम्मद अली जिन्ना के ऑफर को ठुकरा दिया था. दरअसल, जिन्ना ने अजीम प्रेमजी के पिता मोहम्मद हाशिम प्रेमजी को पाकिस्तान का फाइनेंस मिनिस्टर बनाने का ऑफर दिया था. लेकिन उन्होंने इस ऑफर को ठुकरा कर भारत में रहना पसंद किया था.
(www.businesstoday.in के इनपुट पर आधारित)
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