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बजट 2018: आम आदमी को इन 10 घोषणाओं का है इंतजार

विकास जोशी
  • 01 फरवरी 2018,
  • अपडेटेड 8:41 AM IST
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वित्त मंत्री अरुण  जेटली आज आम बजट पेश करेंगे. कुछ ही देर में जब बजट भाषण शुरू होगा, तो पूरे देश को पता चल जाएगा  कि वह जो उम्मीदें बजट से पाले बैठा था, वे पूरी हुई कि नहीं.आगे हम बात कर रहे हैं 10 ऐसी उम्मीदों के बारे में, जो आम आदमी ने इस  बजट से पाली हुई हैं.

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टैक्स:
आयकर पर मिलने वाली छूट की सीमा मौजूदा 2.5 लाख से बढ़ाकर 3 लाख रुपये किया जाए. आयकर के मौजूदा टैक्स स्लैब्स में बदलाव कर छूट को बढ़ाया जाए. इसके लिए जहां फिलहाल 10 फीसदी टैक्स लगता है, उसे 5 से 7 फीसदी किया जाए.

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सस्ता घर:
होम लोन पर मिलने वाली टैक्स छूट को बढ़ाया जाए ताकि घर खरीदने में होने वाला खर्च कम हो सके. स्टांप ड्यूटी में भी राहत मिले. रियल इस्टेट जीएसटी के तहत आए. इससे घर खरीदना सस्ता हो सकता है.

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नये रोजगार:
देश में रोजगार के ज्यादा मौके पैदा हों. इसके लिए रोजगार नीति लाई जाए. नया कारोबार शुरू करने के लिए प्रोत्साहन मिले, ताकि नये रोजगार पैदा हों

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पेट्रोल-डीजल हो सस्ता:
पेट्रोल-डीजल पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी घटाई जाए ताकि बढ़ती कीमतों से राहत मिले. पेट्रोल और डीजल को जीएसटी के तहत लाने का पुख्ता इंतजाम बजट में हो.

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बचत हो फायदे का सौदा:
सेक्शन 80सी के तहत निवेश पर मिलने वाली छूट को 2 लाख से ज्यादा कर दिया जाए. इस स्कीम में मौजूदा स्कीम के अलावा लो रिस्क बॉन्ड स्कीम्स को भी शामिल किया जाए.

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ड्रीम कार खरीदना हो सस्ता:
कारों पर लगने वाले जीएसटी रेट को कम किया जाए. ताकि इन्हें खरीदना सस्ता हो. इलेक्ट्र‍िक कारों को बढ़ावा देने के साथ ही इन पर लगने वाले जीएसटी रेट को 5 फीसदी रखें.

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सस्ता हो रेल ट‍िकट:
रेलवे से सफर सुरक्ष‍ित करने के लिए आधुनिक तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देने के अलावा अन्य इंतजाम किए जाएं.  सस्ता हो रेल टिकट बुक करना. ऑनलाइन बुक करने पर कुछ इंसेंटिव मिले.

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श‍िक्षा लेना हो सस्ता:
एजुकेशन लोन की ब्याज दर पर मिलने वाली छूट को मौजूदा 8 साल से बढ़ाने की जरूरत है. देश में श‍िक्षा क्षेत्र की हालत सुधारने के लिए बजट आवंटन बढ़े ताकि सर्व श‍िक्षा अभ‍ियान जैसे अभियानों को रफ्तार मिल सके.

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स्वास्थ्य सेवाएं न हों महंगी:
कंपनियों की तरफ से दिए जाने वाले मेडिकल अलाउंस पर टैक्स छूट बढ़े. ताकि कंपनियां कर्मचारियों को ज्यादा अलाउंस दें. निजी अस्पतालों को जवाबदेह बनाया जाए और बेतहाशा स्वास्थ्य खर्च को नियंत्रित करने के लिए कदम उठाए जाएं.

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पेंशन पर मिले ज्यादा छूट:
पेंशन प्लान को टैक्स फ्रेंडली बनाया जाए और एनपीएस पर मिलने वाली टैक्स छूट का दायरा बढ़े. वरिष्ठ नागरिकों के लिए आयकर सीमा को बढ़ा दिया जाए.

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