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युक्रेन-रूस युद्ध की दहला देने वाली इन तस्वीरों के ज़िम्मेदार कौन हैं?

युद्ध केवल विनाश करता है. युद्ध बस हिंसा देता है. युद्ध से मिलते हैं सिर्फ आंसू और बाकी रह जाते हैं बिखरी हुई चीज़ों के निशान. चाहे वो बिखरा हुआ शहर हो या बिखरे हुए लोग. शरीर, मन, सोच, जीवन, भविष्य और जीविका...क्या कुछ नहीं बिखेर देता ये युद्ध. लड़ने वालों के लिए यह जीत-हार का खेल होता है लेकिन हर लड़ा गया युद्ध केवल एक ही सबक देकर जाता है- दोबारा आऊंगा तो फिर से विध्वंस देकर जाऊंगा. लोगों के हिस्से में घाव होते हैं. दर्द होता है. खोने और खत्म होने के किस्से होते हैं. ऐसी ही तस्वीरें इस नए युद्ध ने भी हमें दी हैं. यूक्रेन और रूस की जंग का एक हासिल यूक्रेन की ये तस्वीरें भी हैं. यूक्रेन में फरवरी के आखिरी हफ्ते से 10 मई, 2022 तक लगभग 3400 आम लोगों की युद्ध में मौत हो चुकी थी और लगभग 4000 बुरी तरह से घायल थे.

युद्ध का सबसे कुरूप सच यह है कि युद्ध किसी का सगा नहीं होता. राजसत्ताएं लड़ती हैं और अपने हितों के लिए हिंसा के सबसे विकृत तरीकों का इस्तेमाल करती हैं. नतीजा भुगतती है जनता और लोग. एक बड़ी आबादी खून से सनी यादों को लेकर बाकी का जीवन जीने के लिए अभिशप्त होती है. 11 साल की याना को लीव, यूक्रेन के एक सरकारी अस्पताल में ले जा रहा ये डॉक्टर दरअसल एक दर्दनाक कहानी को गोद में उठाए है. 8 अप्रैल को याना और उसकी मां एक हमले में बुरी तरह से जख्मी हो गए थे.

ओलेना विटर, 45, का 14 साल का बेटा इवान हमेशा के लिए सो चुका है. इवान को संगीत का शौक था और वो एक ऑर्केस्ट्रा में संगीत बजाता था. संगीत के उन तारों को युद्ध ने निगल लिया है. पीछे रह गई है एक बिलखती मां जो अपना बायां पैर गंवा चुकी है और जीवन की सबसे प्यारी चीज भी. 10 मई को एक हमले ने इस परिवार के सारे संगीत को सदा के लिए छीन लिया. इवान के पिता ने अपने बेटे को घर के बगीचे में उगे गुलाबों की क्यारी में दफना दिया है.

11 साल की याना 12 मई को अपनी मां नताशा के साथ सीमा पार करने के लिए एक ट्रेन पकड़ने जा रही थी. इसी दौरान वहां भारी बमबारी हुई और दोनों बुरी तरह से घायल हो गईं. युद्ध क्या देकर जाता है इसका अंदाज़ा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि अकेले दूसरे विश्वयुद्ध में करोड़ों लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी. इससे भी बड़ी तादाद घायलों की रही. अफसोस यह है कि युद्ध के इन विकृततम दृश्यों के बावजूद दुनिया युद्ध का कुछ नहीं बिगाड़ सकी.

याना का एक जुड़वा भाई है- यारिक. याना और उसकी मां के घायल होने के बाद अब यारिक ही दोनों की देखरेख कर रहा है. याना का बचपन बहुत कुछ सीखने के लिए था. लेकिन अब उसको सीखना है अपने दोनों पैरों के बिना जी पाने का कौशल. उसे सीखना है आंसुओं के आगे की कठोर दुनिया में आगे बढ़ पाने का तरीका. और यारिक... यारिक को अब आगे बढ़ने से पहले पीछे छूट रही अपनी बहन की मदद करनी है. ताकि वो जी सके. जीना सीख सके.

ओक्साना महज 23 साल की हैं. 27 मार्च को उनके घर के पास एक भीषण धमाका हुआ. बमबारी में ओक्साना के दोनों पैर चले गए और एक हाथ भी बेकार हो गया. चलती-दौड़ती ओक्साना की ज़िंदगी हमेशा के लिए जैसे थम गई. अब बस आंसू हैं जो चेहरे पर चलते नज़र आते हैं. और चलते हैं डॉक्टरों के हाथ, ओक्साना के घावों से रिसता खून पोंछते हुए.

ओक्साना बताती हैं- हमने एक जोर का धमाका सुना और उसके बाद मुझे महसूस हुआ कि मेरे तो पैर ही नहीं हैं. बस एक खालीपन है, दर्द है और आगे पसरी लाचारी है. विक्टर ओक्साना के पति हैं और अब वही उसका आखिरी सहारा हैं. विक्टर और ओक्साना केवल एक-दूसरे को नहीं, अपने सपनों और जिंदगी को लाचार होता देखने के लिए मजबूर हैं. युद्ध का इतिहास ऐसे ही करोड़ों विक्टर और ओक्साना के करुण क्रंदनों से भरा पड़ा है.

साशा हरोख्विस्की की उम्र 38 साल है. 22 मार्च को एक हमले में साशा को अपनी एक टांग इसलिए गंवानी पड़ी क्योंकि उन्हें सैनिकों ने गलती से जासूस समझ लिया. अब साशा का एक पैर नहीं है. दर्द इतना ज्यादा है कि उसे बर्दाश्त कर पाना साशा के लिए मुश्किल हो रहा है. साशा को पैर के घाव का भी दर्द है और एक पैर के चले जाने का भी. डॉक्टर अब साशा को मिरर थैरेपी दे रहे हैं ताकि झूठा ही सही, लेकिन एक पैर की छवि शीशे में देखकर वो दूसरे पैर के होने का गुमान कर सकें और दर्द को आहिस्ता-आहिस्ता झेलना सीख सकें. यह कितना विचित्र है कि शीशे में पैर देखना पड़ रहा है ताकि दर्द की शक्ल को सही किया जा सके.

नास्तिया कुजिक अभी केवल 21 साल की हैं. 17 मार्च को नास्तिया अपने भाई के घर चेरनीव गई हुई थीं. युद्ध के समय एक-दूसरे से मिलना, मिल पाना और हौसला देते रहना बहुत ज़रूरी होता है. लेकिन हौसला बांटने गई नास्तिया खुद भाई के घर से निकलकर लाचार हो चुकी थीं. बमबारी में नास्तिया का दाहिना पैर खत्म हो गया. बायां पैर भी बुरी तरह से जख्मी है. लोहे की सलाखों से उनके पैर के बचे-खुचे को बचाने की कोशिश की जा रही है. यह बचा हुआ पैर अब उसकी ज़िंदगी की अधूरी कहानी है.

आन्तोन ग्लादुन एक 22 वर्षीय स्वास्थ्यकर्मी हैं. वो पूर्वी यूक्रेन की सीमा पर राहत सेवाओं का हिस्सा थे. 27 मार्च को एक माइन के धमाके में आन्तोन के दोनों पैर चले गए. बायां हाथ भी अब साथ नहीं है. आन्तोन कितने ही लोगों के लिए इलाज-दवा का चेहरा थे. अब वे खुद दवाओं और सेवा के भरोसे हैं. युद्ध की यह एक बड़ी विकृति है. वो चीजों को वैसा रहने ही नहीं देता, जैसी वो होती हैं. कल्पना कीजिए कि आपके हाथ में एक गुलाब हो और उससे आपको केवल बारूद और खून की बू आए...ऐसा ही होता है युद्ध. ऐसे ही होते हैं युद्ध के बाद के बचे हुए दृश्य.

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Credits

Creative Director: Rahul Gupta