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इजरायल-हमास जंग एक नजर

इजरायल-हमास संघर्ष में तबाही, त्रासदी और पीड़ा की दास्तान

यहूदियों के पवित्र दिन योम किप्पुर से ठीक एक दिन पहले इजरायली इस उम्मीद में सोए थे कि अगली सुबह सिमचैट तोराह की छुट्टी मनाएंगे. ये एक मुस्कुराती सुबह होगी. लेकिन अगले दिन वे रॉकेट की गूंज, गोलियों की तड़तड़ाहट और चीख-पुकार की आवाज के साथ उठे. हमास के आतंकियों ने हमला कर 1,200 निर्दोष इजरायली नागरिकों की हत्या कर दी. ये बर्बरता इतनी थी कि आतंकी संगठन ISIS भी शर्मसार हो जाए. इस अटैक में 5,600 लोग घायल भी हुए. हमले के बाद इजरायल कहां खामोश बैठने वाला था. उसने अभूतपूर्व ताकत के साथ जवाब दिया, लेकिन इजरायल के जवाब से गाजा में गंभीर मानवीय संकट पैदा हो गया है, जिसने पूरे विश्व की चिंता बढ़ा दी है.

chapter 1
काला शनिवार
हमास के हमले ने तोड़ा इजरायल का सुरक्षाचक्र. इजरायल की अभेद्य सुरक्षा का भ्रम टूटा.
कैमरे, सेंसर और रडार
रेजर वायर
20 फीट ऊंची मेटल फेंसिंग
अंडरग्राउंड कंक्रीट बैरियर
हमास की टनल ढूंढने के लिए अंडरग्राउंड सेंसर
ब्रीच 3
ब्रीच 2
ब्रीच 1
इजरायल का सिक्योरिटी सिस्टम जैसे ही कमजोर हुआ, हमास इजरायल में नरसंहार पर उतारू हो गया. उसने बच्चों का कत्ल किया, महिलाओं को भी नहीं छोड़ा, बस्तियां जला दीं और बच्चों-बुजुर्गों को बंदी बना लिया.
chapter 2
दुनिया के सामने आई इजरायल की त्रासदी
क्रूरता की अभूतपूर्व करतूतों का आकलन.
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लौटते समय हमास के आतंकी करीब 245 लोगों को गाजा ले गए. पूरे इजरायल में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए.
हमास ने ऐसे भयानक हमले को कैसे दिया अंजाम?
इजरायली सेना और खुफिया एजेंसी को सर्वश्रेष्ठ माना जाता है. लेकिन यह धारणा 7 अक्टूबर को हवा हो गई जब हमास ने 2200 रॉकेटों की बौछार कर उसकी आड़ में 3,000 लड़ाकों को इजरायल में दाखिल करा दिया. ताकि पिछले 50 सालों में सबसे भयानक हमले को अंजाम दिया जा सके.
इंडिया टुडे ओपन सोर्स इंटेलिजेंस टीम (OSINT) ने हमास के प्रोपेगैंडा फुटेज के जियोलोकेशन की स्टडी की, जिससे गाजा में ट्रेनिंग का पता चला. ऐसी भी रिपोर्ट आईं जहां ईरानी समर्थन का जिक्र था, तेल अवीव ने अपनी खुफिया नाकामी भी स्वीकार की.
रिपोर्ट में इजरायल की इस धारणा का भी जिक्र था कि वह हमास के साथ एक व्यावहारिक संतुलन बना सकता है. हमास भी इजरायल के साथ सीधे सशस्त्र संघर्ष को अंजाम देने के पक्ष में नहीं है. कई एक्सपर्ट्स का यह मानना है कि हमास बड़े पैमाने पर संघर्ष नहीं करना चाहता.
कुछ लोगों का तो यह भी कहना है कि हमास ने इजरायल की तकनीक से संचालित इंटेलिजेंस से बचने के तरीके ढूंढ लिए हैं. इसलिए इजरायल को हमास के इरादों की आधी-अधूरी जानकारी ही मिल पा रही है.
जंग की जमीन से इंडिया टुडे की रिपोर्ट
इजरायल
गाजा
लेबनान
chapter 3
भड़के इजरायल का करारा जवाब
लक्ष्य: गाजा से हमास का सफाया

इजरायली नागरिको, हम जंग लड़ रहे हैं. यह कोई ऑपरेशन या कोई राउंड नहीं है. हम युद्ध में हैं!

-- बेंजामिन नेतन्याहू
जैसे ही इजरायली वायुसेना ने गाजा पर बमबारी शुरू की तेल अवीव ने गाजा पट्टी की पूरी तरह से घेराबंदी का ऐलान कर दिया. दुनिया के सबसे घनी आबादी वाले इलाकों में से एक में भोजन, ईंधन और बिजली की सप्लाई रोक दी गई.
इजरायल ने अपनी नियमित सेना में शामिल होने के लिए 3.6 लाख रिजर्व सैनिकों का ड्राफ्ट तैयार कर लिया. उसने हवा, जमीन और समुद्र से हमले शुरू कर दिए. गाजा ऑपरेशन के पहले 6 दिन में ही इजरायल ने करीब 4 हजार टन वजन के 6 हजार बम गिरा दिए. ये बम उतने ही हैं जितने बम अमेरिका ने एक साल में अफगानिस्तान पर गिराये.
बीस दिन के अंदर गाजा पर करीब 10 हजार बम गिराने के बाद इजरायली सेना ने गाजा के अंदर प्रवेश किया. इतना ही नहीं इजरायली सेना ने गाजा पट्टी को दो हिस्सों में बांट दिया है.
IDF ने हमास के 2500 ठिकानों पर निशाना बनाया
इजरायली सेना की मदद के लिए अमेरिका ने भूमध्य सागर में 12 हजार सैनिकों के साथ दो कैरियर स्ट्राइक ग्रुप को तैनात किया है. इतना ही नहीं अमेरिका गाजा के ऊपर सर्विलांस ड्रोन भी उड़ा रहा है.
तब और अब: सैटेलाइट में दिखा गाजा का विनाश
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Satellite image ©2023 Maxar Technologies’
Satellite image ©2023 Maxar Technologies’
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chapter 4
एक 'अभूतपूर्व विनाश'
अकल्पनीय कष्ट में जी रहे फिलिस्तीनी
कोई भी स्थान सुरक्षित नहीं. अस्पताल, स्कूल, यहां तक कि शरणार्थी शिविर भी नहीं. इजरायल ने गाजा के लोगों से दक्षिण की तरफ जाने के लिए कहा है, लेकिन हमले वहां भी हुए हैं. करीब 16 लाख लोग दक्षिणी गाजा में 20 किमी लंबे और 6-8 किमी चौड़े इलाके में दुबके हुए हैं. इन के पास बिजली नहीं है. भोजन और पानी भी बहुत कम मात्रा में. अनुमान के मुताबिक 4 लाख लोग अभी भी उत्तरी गाजा में हैं. यहां लड़ाई करीबी है. बमों की बारिश सी हो रही है. इस घेरेबंदी को लोग 'खुली जेल' भी कह रहे हैं.
संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक गाजा के 20 लाख लोगों में से 80 फीसदी अंतरराष्ट्रीय सहायता पर निर्भर हैं. ये मदद जंग शुरू होने के 15 दिन बाद तक बंद रही, अभी भी राहत की किस्त थोड़ी बहुत ही पहुंच पा रही है.
गाजा में इन दिनों भोजन और पानी सबसे कीमती चीज है. पीने लायक पानी एक छोटी सी आबादी को ही मयस्सर है. कई लोग प्लास्टिक की बोतलें भरने के लिए मीलों पैदल चलते हैं तो वहीं एक बड़ी आबादी गंदा पानी पीने को मजबूर है.
मृतकों और घायलों की बढ़ती संख्या के बीच, ईंधन और रसद की कमी के कारण 35 अस्पतालों में से 16 और 72 प्राथमिक क्लीनिकों में से 51 ने काम करना बंद कर दिया है.
दुनिया की प्रतिक्रिया?
अमेरिका अमेरिका ने इजरायल का खुला समर्थन किया है, लेकिन गाजा में मदद पहुंचाने के लिए अमेरिका जंग में 'मानवीय युद्ध विराम' चाहता है. राष्ट्रपति जो बाइडेन इजरायल का दौरा भी कर चुके हैं.
फ्रांस फ्रांस इजरायल के 'आत्मरक्षा के अधिकार' का समर्थन करता है, लेकिन अमेरिका की तरह फ्रांस भी 'मानवीय युद्ध विराम' चाहता है.
ब्रिटेन प्रधानमंत्री ऋषि सुनक समर्थन जाहिर करने के लिए इजरायल का दौरा कर चुके हैं. इंसानियत का हवाला देकर युद्ध में विराम मांग में ब्रिटेन भी अपने पश्चिमी साथियों के साथ शामिल हो गया है.
जर्मनी बर्लिन का कहना है कि इजरायल को अपनी रक्षा करने का अधिकार है और फिलिस्तीन बनाकर ही लंबे समय से चले आ रहे विवाद को खत्म किया जा सकता है.
रूस इस जंग में रूस का रुख जिज्ञासा पैदा करने वाला है. रूस ने 7 अक्टूबर को इजरायली नागरिकों पर हुए हमले की निंदा की, लेकिन इसे 'आतंकवादी' घटना नहीं माना. इसके बाद 26 अक्टूबर को मॉस्को ने हमास के एक प्रतिनिधिमंडल की मेजबानी की. रूस ने गाजा पर इजरायली घेराबंदी का भी विरोध किया है.
चीन बीजिंग हमास को आतंकी संगठन नहीं मानता. चीन ने हमास का नाम लिए बिना 'इजरायली नागरिकों को नुकसान पहुंचाने' वाले कृत्यों की निंदा की. चीन ने यह भी कहा कि इजरायल जो कर रहा है वह आत्मरक्षा से कहीं आगे है.
भारतहमास के हमले के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इजरायल के प्रति फौरन समर्थन जाहिर किया था. भारत ने 'मानवीय संघर्ष विराम' के आह्वान को लेकर संयुक्त राष्ट्र में हुए मतदान में भाग नहीं लिया. भारत टू-स्टेट सॉल्यूशन का समर्थन करता है. भारत ने गाजा की मदद के लिए राहत सामग्री भी भेजी है.
अरब देश ज्यादातर अरब देशों ने हमास के हमले की निंदा नहीं की. अरब देश अब युद्ध विराम के लिए भी दबाव बना रहे हैं.
यूरोपियन यूनियन यूरोपीय संघ ने हमास के हमले की निंदा की और सर्वसम्मति से गाजा पर बमबारी को मानवीय आधार पर रोकने का आह्वान किया.
अब आगे का रास्ता क्या?
एक्सपर्ट्स का मानना है कि हमास के पूरी तरह से खात्मे के लक्ष्य को पाने के लिए इजरायली सेना को कई महीने और साल भी लग सकते हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि हमास के पास एक तरफ तो जमीन के अंदर बुनियादी सैन्य ढांचे का विशाल नेटवर्क है तो वहीं दूसरी तरफ हमास के लड़ाकों में गुरिल्ला युद्ध छेड़ने की क्षमता भी है.
इजरायल के पूरे ज़ोर से हमले और इससे पैदा हुए मानवीय संकट ने युद्ध के क्षेत्रीय जंग में तब्दील होने की चिंता पैदा कर दी है क्योंकि ईरान ने धमकियां जारी की हैं और हिज्बुल्लाह ने इजरायल में रॉकेट दागे हैं, और अरब राष्ट्र युद्ध विराम की मांग कर रहे हैं.
इन सब के बीच अमेरिकी डिप्लोमेसी बीच का रास्ता निकालने में लगी हुई है. कोशिश है कि मानवीय आधार पर युद्ध विराम हो ताकि गाजा में मदद पहुंचाई जा सके, लेकिन इजरायल इसके लिए एक शर्त रखता है कि हमास पहले उसके बंधकों को रिहा करे.
इस बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के वॉर प्लान को लेकर वहां के लोगों में गुस्सा बढ़ रहा है. वहीं, अमेरिकी जनता के बीच अब यह चर्चा हो रही है कि उनकी अर्थव्यवस्था की धीमी रफ्तार एक साथ दो-दो जंगों (गाजा-यूक्रेन) को सपोर्ट नहीं कर सकती. इसके अलावा ताइवान पर चीनी आक्रमण की धमकी को अमेरिका हल्के में नहीं ले सकता है.
इस जंग को लेकर दो हिस्सों में बंट चुकी दुनिया में पश्चिमी देशों पर इजरायल को बिना शर्त समर्थन देने की रणनीति को खत्म करने का दबाव बढ़ता जा रहा है.
इजरायल-हमास जंग की मानवीय लागत अत्यधिक है. अमेरिका और उसके सहयोगी देश इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष का समाधान खोजने के लिए पहले से कहीं अधिक बेताब हैं.
Chapter 1
काला शनिवार
Chapter 2
दुनिया के सामने आई इजरायल की त्रासदी
Chapter 3
भड़के इजरायल का करारा जवाब
Chapter 4
एक 'अभूतपूर्व विनाश'
Conclusion
अब आगे का रास्ता क्या?
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Credits
Story : Ankit Kumar
Reporting : Subham Tiwari, Bidisha Saha
Creative director : Rahul Gupta
Infographic : Sarfaraz
UI/UX Developers:Vishal Rathour, Ravi Kumar, Mohd. Naeem Khan