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अमेरिकी प्रेसिडेंशियल डिबेट में धमकी, झगड़ा और धौंस, अगली बार बदलेंगे नियम

अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के लिए हुए डिबेट में जिस तरह की काट, धमकी, झगड़ा और धौंस (अधिकतर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से) का इस्तेमाल किया गया कि प्रेसिडेंशियल डिबेट्स वाले आयोग को कहना पड़ा है कि अगली दो बहस के लिए नियम बदले जाएंगे.

यूएस प्रेसिडेंशियल डिबेट से लोगों को निराशा हुई (फोटो-एपी) यूएस प्रेसिडेंशियल डिबेट से लोगों को निराशा हुई (फोटो-एपी)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • प्रेसिडेंशियल डिबेट को लेकर अमेरिकी नाखुश
  • डिबेट के गिरते स्तर पर को लेकर लोगों में चिंता
  • डिबेट के आयोजकों की हो रही है आलोचना

अमेरिका के इतिहास की संभवत: सबसे खराब प्रेसिडेंशियल डिबेट के बाद अमेरिकी लोग हैरानी जता रहे हैं कि 90 मिनट तक जो उन्होंने सहा, क्या वैसी ही सजा उन्हें और भुगतनी पड़ेगी.

डिबेट में जिस तरह की काट, धमकी, झगड़ा और धौंस (अधिकतर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से) का इस्तेमाल किया गया कि प्रेसिडेंशियल डिबेट्स वाले आयोग को कहना पड़ा है कि अगली दो बहस के लिए नियम बदले जाएंगे. ट्रंप और डेमोक्रेटिक उम्मीदवार जो बिडेन के अराजक फेस-ऑफ के बाद आयोग ने बदलाव का फैसला किया है. निर्धारित समय सीमा के बाद माइक को कट कर देने का भी एक सुझाव है.  

दरअसल, आयोजकों और मॉडरेटर की इस बात के लिए काफी आलोचना हो रही है कि ट्रंप को शो चलाने दिया गया. इसके बाद ही आयोग ने नियमों में बदलाव का वादा किया है.

मंगलवार की रात का कार्यक्रम अमेरिकी लोकतंत्र के लिए अच्छा विज्ञापन नहीं था. देर रात लोकप्रिय कॉमेडी शो के एंकर ट्रेवर नोआ (जो मूल रूप से दक्षिण अफ्रीका के हैं)  ने कहा- "जितना अधिक मैं अमेरिकी लोकतंत्र के बारे में सीखता हूं, उतना ही मैं सोचता है कि  आप अन्य देशों पर आक्रमण कर रहे हैं, उन्हें यह देने के लिए?” नोआ ने ये शो के उस सेगमेंट में कहा, जहां डाक मतपत्रों को लेकर ट्रंप के कई आपत्तियां जताने का मखौल उड़ाया गया.  

दिलचस्प है कि ट्रंप की “झुलसी हुई धरती’’ रणनीति वो बात हासिल नहीं कर सकी, जो कि उसका मकसद था. यानि डेमोक्रेटिक पार्टी के चैलेंजर, जो बिडेन को ऐसे कमतर, दयनीय प्रतिद्वंद्वी के तौर पर पेश करना जिसके पास वृद्धावस्था की वजह से शब्दों का अकाल है. ट्रंप ऐसा करने में नाकाम रहे क्योंकि उन्होंने अपना हाथ ऊपर रखने की कोशिश की. ऐसे में बिडेन को बचने का मौका मिल गया और उन्होंने राष्ट्रपति से चिढ़ पैदा करने वाले व्यक्ति के तौर पर बर्ताव किया और सीधे अमेरिकी लोगों से संवाद करने पर अपना फोकस रखा. 

डिबेट के दौरान ऐसे कई अहम पहलू थे जो चुनाव से पहले के आखिरी चार हफ्तों में उम्मीदवारों के फायदे या नुकसान के लिए प्ले करेंगे. ये 15 अक्टूबर और 22 अक्टूबर को होने वाली बाकी दो प्रेसिडेंशियल डिबेट्स पर भी असर डालेंगे. 

अधिकतर सर्वेक्षणों और चुनाव जानकारों के मुताबिक, बिडेन ने डिबेट को ‘जीत’ लिया तो इसकी बड़ी वजह उनका ट्रंप की तुलना में अधिक ‘सामान्य’ रहना था. ऐसा व्यक्ति जो चार साल की निरंतर अशांति के बाद शांति की बहाली के लिए तैयार है. हालांकि फॉक्स न्यूज के इकोसिस्टम ने असहमति जताई और ट्रंप को विजेता घोषित किया. 

 कुछ ज्यादा ही दिखाने की कोशिश की ट्रंप ने  

ट्रंप ने मॉडरेटर को टोकते हुए, बुलडोज़ करते हुए लगातार "ट्रम्प लाइन" को क्रॉस किया. यह राष्ट्रपति के चिरपरिचित स्वभाव के मुताबिक था जो कोई भी मौका हो स्टेज को कंट्रोल करने की कोशिश करते हैं. लेकिन उनका डिबेट के दौरान प्रदर्शन ऐसा था जो ऐसे मतदाताओं को खास लुभाने वाला नहीं था जिन्होंने अभी तक मन नहीं बनाया है कि किसे वोट देना है. 

डिबेट के दौरान एक समय बिडेन जब अमेरिकी सैनिकों के बारे में ट्रंप की अपमानजनक टिप्पणियों को उजागर करने के लिए अपने दिवंगत बेटे ब्यू की मिलिट्री सर्विस का हवाला दे रहे थे, तो ट्रंप ने बिडेन के दूसरे बेटे हंटर के कोकीन इस्तेमाल करने का जिक्र छेड़ा. लेकिन ट्रंप का प्रयास बुरी तरह नाकाम रहा. बिडेन ने माना कि उनके बेटे को बहुत से अन्य लोगों की तरह ड्रग समस्या थी लेकिन उसने उस पर काबू पा लिया. 

बिडेन ने सीधे कैमरे की ओर देखते हुए कहा, "मुझे उस पर गर्व है."  

यह एक मार्मिक क्षण था और ऐसी स्थिति का अनुभव कर चुके अभिभावकों को बिडेन ने जो कहा, उससे सहानुभूति रही होगी. 

दूसरी तरफ, सीधा सवाल होने के बावजूद ट्रंप श्वेत वर्चस्ववादियों (व्हाईट सुप्रीमेसिस्ट्स) की निंदा करने में विफल रहे. इसके बजाय, उन्होंने उनसे "स्टैंड बैक एंड स्टैंड बाई" के लिए कहा.  

बिडेन भी परफेक्ट नहीं रहे 

बिडेन ने भी डिबेट के दौरान कई मौकों को खोया और कई बार बोलने में लड़खड़ाए लेकिन अधिकतर अपनी जमीन बनाए रखी. उन्होंने कोविड-19 महामारी से हुई मौतों को लेकर लगभग गलत आंकड़ा दिया. कुछ मौकों पर वो सही शब्दों के लिए भी संघर्ष करते दिखे. हालांकि, उन्होंने बोलने में उन्होंने कोई बड़ी चूक नहीं की. 

ट्रंप ने बिडेन के लिए बेंचमार्क इतना नीचे सेट किया था कि पूर्व उपराष्ट्रपति को केवल दिखने और बोलने में खुद को स्थिर रखना था, जो उन्होंने किया. ट्रंप ने अपने प्रतिद्वंद्वी को ऐसे व्यक्ति के तौर पर पेश किया था जो "प्रदर्शन बढ़ाने वाली दवाओं" के सहारे है जो टेलीप्रॉम्प्टर के बिना धराशायी हो जाएगा. दूसरी तरफ बिडेन तुलना में अधिक गरिमामयी दिखे, भले ही उन्होंने ट्रंप के लिए "विदूषक" शब्द का इस्तेमाल किया. एक मौके पर ट्रंप के लगातार बोलना जारी रखने पर बिडेन ने ये भी कहा, "विल यू शटअप, मैन?"  

ट्रम्प ने अपने आधार को मजूबत नहीं किया 

हालांकि सर्वेक्षण नेशनल पोल्स में बिडेन को लगातार आरामदायक बढ़त लिए दिखा रहे हैं, ये डिबेट मुख्य तौर पर उन मतदाताओं के छोटे प्रतिशथ को लेकर लक्षित थी जिन्होंने अभी तक फैसला नहीं ले पाए हैं कि किसे वोट देना है. अधिकतर अमेरिकियों - लगभग 90% - ने पहले ही तय कर लिया है कि वे किसे 3 नवंबर को वोट देंगे. बाकी बचा हिस्सा ट्रंप की मदद कर सकता है अगर वो उसे लुभाने की कोशिश करते हैं.  

ट्रंप ने उपनगरों में रहने वालीं श्वेत महिलाओं को लुभाने का एक मौका गंवा दिया जिन्होंने 2016 में आंशिक रूप से उन्हें जीतने में मदद की थी. लेकिन अब उनका खासा हिस्सा ट्रम्प से छिटक चुका है.  अधिकतर विश्लेषकों के मुताबिक, ट्रंप की ओर से "कानून और व्यवस्था" के बारे में बात करना और उपनगरीय महिलाओं को डरा कर वापस अपनी ओर मोड़ने की कोशिश नाकाम रही. 

लेफ्ट की कठपुतली बताने पर बिडेन का करारा जवाब 

ट्रंप के बार-बार बिडेन को "कट्टरपंथी वामपंथियों" की कठपुतली के रूप में चित्रित करने और नीचा दिखाने के जवाब में जो बिडेन ने कहा वो शायद उनके लिए सबसे अहम क्षण रहा. उदारवादी माने जाने वाले बिडेन ने कहा, "मैं डेमोक्रेटिक पार्टी हूं." यह एक ऐसा बयान है जो समाजवादी बर्नी सैंडर्स या एलिजाबेथ वॉरेन के युवा समर्थकों को शायद रास न आए, लेकिन बिडेन को वामपंथियों के साथ खुद को कुछ दूरी पर रखना समझा जा सकता है. 

जब ट्रंप ने यह कहने की कोशिश की कि अमेरिकी शहरों में व्यापक सामाजिक न्याय प्रदर्शनों के पीछे डेमोक्रेटिक पार्टी में कट्टरपंथी तत्वों का हाथ रहा है जो पुलिस की मौजूदगी नहीं चाहते थे, तो बिडेन ने "कानून और व्यवस्था" के पक्ष में खुद को बताया लेकिन न्याय और निष्पक्षता के साथ. 

अगली डिबेट तक 

रिपब्लिकन रणनीतिकारों से अपेक्षित है कि वे ट्रम्प को अपनी डिबेट स्टाइल को मॉडरेट करने के लिए कहेंगे या फिर और समर्थन खोने का खतरा है. चुनावों को ट्रैक करने वाली वेबसाइट FiveThirtyEight.com के मुताबिक, बिडेन लगभग सभी सर्वेक्षणों में 6 से 8% के अंतर से आगे हैं लेकिन ट्रंप अभी भी कुछ परिस्थितियों में इलेक्टोरल कॉलेज के भरोसे रह सकते हैं. 

अगले चार हफ्ते दोनों उम्मीदवारों के लिए मेक या ब्रेक जैसी स्थिति वाले होंगे, क्योंकि दोनों अपने अभियान को तेज करेंगे. साथ ही बैटलग्राउंड राज्यों में मतदाताओं के छोटे से छोटे हिस्से तक पहुंचने के लिए अपने तरीकों को परिष्कृत करेंगे. 

डिबेट के अगले दिन, दोनों उम्मीदवारों ने डिबेट के आधार पर बने माहौल को भुनाने के लिए कैम्पेनिंग की. ट्रंप को वरिष्ठ रिपब्लिकन नेताओं के दबाव का सामना करना पड़ा कि व्हाइट सुप्रीमेसिस्ट्स की स्पष्ट शब्दों में निंदा की जानी चाहिए थी, न कि जैसा डिबेट में ट्रंप ने इससे बचने की कोशिश की.   

ट्रंप फंडरेजर कार्यक्रम और एक रैली के लिए मिनेसोटा गए. इस राज्य की उनकी यह तीसरी यात्रा थी. मिनेसोटा के अहम शहर मिन्नियापोलिस को अफ्रीकी-अमेरिकी जार्ज फ्लायड की पुलिस के हाथों मौत के बाद अशांति और विरोध प्रदर्शनों ने हिला कर रख दिया था. इस घटना के बाद गर्मियों में देश भर में लोगों में आक्रोश देखने को मिला था. 

दूसरी ओर, बिडेन ट्रेन से ओहियो और पेंसिल्वेनिया के दौरे पर गए. ये दोनों बैटलग्राउंड राज्य चुनावी नतीजों के लिए बहुत अहम माने जाते हैं. ओहियो में बिडेन और ट्रम्प में नेक टू नेक फाइट है जबकि पेंसिल्वेनिया में बिडेन आगे है. पेंसिल्वेनिया में 2016 में हिलेरी क्लिंटन को हार का मुंह देखना पड़ा था. 

औसत अमेरिकियों के साथ ट्रंप का संपर्क न होने पर बिडेन ने कटाक्ष किया कि राष्ट्रपति लोगों की पीड़ा नहीं समझते हैं या परवाह नहीं करते हैं क्योंकि वह विशेषाधिकार जैसे माहौल में बड़े हुए हैं. उन्होंने ट्रंप के आचरण को "एक राष्ट्रीय शर्मिंदगी" करार दिया. 

आने वाले दिनों में इस जुबानी जंग के और तीखा होने की उम्मीद करें.

(वाशिंगटन से सीमा सिरोही की रिपोर्ट)

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