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अमेरिका चुनाव: कल से प्रेसिडेंशियल डिबेट, जानें किन मुद्दों पर भिड़ेंगे ट्रंप-बिडेन, ये क्यों अहम?

अमेरिका में 3 नवंबर को चुनाव के लिए वोट डाले जाएंगे. उससे पहले अब प्रेसिडेंशियल डिबेट का सिलसिला शुरू हो रहा है जहां जो बिडेन और डोनाल्ड ट्रंप आमने-सामने होंगे.

जो बिडेन बनाम डोनाल्ड ट्रंप में जंग जो बिडेन बनाम डोनाल्ड ट्रंप में जंग
स्टोरी हाइलाइट्स
  • अमेरिका में बढ़ी चुनावी हलचल
  • मंगलवार से प्रेसिडेंशियल डिबेट
  • डोनाल्ड ट्रंप बनाम जो बिडेन

कोरोना वायरस संकट काल के बीच अब दुनिया पटरी पर आ रही है. भारत में हर किसी की नज़र बिहार में होने वाले विधानसभा चुनाव हैं, जो इन परिस्थितियों में होने वाले पहले चुनाव होंगे. लेकिन इसी बीच अब पूरी दुनिया की नज़र टिकी है अमेरिका में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव पर. 

अब ये अपने अंतिम मोड़ पर आ गए हैं और शुरुआत होने जा रही है ऐतिहासिक प्रेसिडेंशियल डिबेट की. जहां डोनाल्ड ट्रंप और जो बिडेन कई मुद्दों पर अपना विज़न रखेंगे और आमने-सामने होंगे. अमेरिका में तीन नवंबर को वोट डाले जाने हैं.  

इस बार की डिबेट कब से हैं ?
रिपब्लिकन पार्टी की ओर से एक बार फिर डोनाल्ड ट्रंप राष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार हैं तो वहीं डेमोक्रेट्स की ओर से जो बिडेन उम्मीदवार हैं. प्राइमरी चुनाव से शुरू हुई जंग अब प्रचार के अंतिम चरण में हैं और टीवी डिबेट्स उनका ही हिस्सा हैं. इस बार तीन राष्ट्रपति लेवल की बहस होंगी और एक उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवारों के बीच बहस होगी. 

डोनाल्ड ट्रंप बनाम जो बिडेन
•    पहली डिबेट: 29 सितंबर, क्लीवलेंड, ओहियो 
•    दूसरी डिबेट: 15 अक्टूबर, मियामी, फ्लोरिडा
•    तीसरी डिबेट: 22 अक्टूबर, नेशविली, तेनेसी

माइक पेंस बनाम कमला हैरिस (उपराष्ट्रपति पद की डिबेट)
•    7 अक्टूबर, साल्ट लेक सिटी, उटाह

ये सभी डिबेट एक घंटे की होंगी, जिनमें अलग-अलग मुद्दों पर उम्मीदवार आमने-सामने होंगे. अमेरिकी वक्त के हिसाब से ये सभी डिबेट रात नौ बजे से शुरू होंगी और 90 मिनट के लिए बिना ब्रेक के होंगी. वहीं, भारतीय वक्त के अनुसार ये डिबेट अगले दिन सुबह 6.30 बजे दिखाई देंगी. यानी अगर 29 को पहली डिबेट है तो भारतीय समयानुसार वो 30 सितंबर की सुबह 6.30 बजे होगी.

कौन करा रहा है डिबेट?
अमेरिका में शुरुआत से ही राष्ट्रपति पद के उम्मीदवारों के बीच डिबेट का प्रावधान है. शुरुआत में ये दो पार्टियों के बीच समझौते के आधार पर होता था, इसके लिए रिपब्लिकन और डेमोक्रेट्स के बीच MoU भी साइन हुआ था. लेकिन 90 के दशक के दौरान एक कमीशन बना (कमिशन फॉर प्रेसिडेंशियल डिबेट्स) जिसके अंतर्गत अब सभी बहस होती हैं.

हर बहस को अब स्पॉन्सर किया जाता है, यानी कोई भी बड़ा न्यूज चैनल, यूनिवर्सिटी, प्राइवेट कंपनी इस डिबेट को अपने स्थान, चैनल और एंकर से आयोजित करवा सकते हैं. इस बार पहली डिबेट में फॉक्स न्यूज़ के क्रिस वैलेस, सी-स्पैन के स्टीव स्कली, एनबीसी की क्रिस्टियन वेल्कर एंकरिंग करेंगे. जबकि VP डिबेट के लिए USA टुडे की सुज़ैन होंगी. 

पहली डिबेट में होंगे ये अहम मुद्दे
मंगलवार को होने वाली पहली डिबेट के लिए 90 मिनट का वक्त है और 6 मुद्दों पर बहस की जाएगी. हर मुद्दे के लिए 15 मिनट का वक्त है, जहां एक उम्मीदवार अपना पक्ष रखेगा और फिर दूसरा उसे जवाब देगा. ओहियो में होने वाली पहली डिबेट में ये 6 मुद्दे होंगे.
•    डोनाल्ड ट्रंप और जो बिडेन का रिकॉर्ड
•    सुप्रीम कोर्ट का विषय
•    कोरोना संकट से निपटना
•    अर्थव्यवस्था की हालत
•    शहरों में हो रही हिंसा
•    चुनाव का महत्व

इसके अलावा अन्य डिबेट के लिए भी 90 मिनट का वक्त मिलेगा, लेकिन मुद्दों का खुलासा डिबेट से कुछ वक्त पहले ही किया जाता है. इस दौरान होस्ट भी अपनी ओर से सवाल दाग सकता है. 

2016 की प्रेसिडेंशियल डिबेट (फोटो: AP)


अमेरिकी चुनाव में क्यों अहम हैं डिबेट?
अमेरिका के चुनाव में प्रेसिडेंशियल डिबेट एक पुरानी परंपरा है, 1858 में अब्राहम लिंकन ने भी ऐसी सात डिबेट में हिस्सा लेने के बाद ही जीत दर्ज की थी. ऐसा माना जाता है कि जिन वोटरों तक उम्मीदवार प्रचार के दौरान सीधे नहीं पहुंच पाते या फिर वो वोटर जो अबतक ये तय नहीं कर पाए हैं कि किसे वोट दिया जाए उनपर ये डिबेट बड़ा असर डालती हैं. 

ऐसे में दोनों उम्मीदवार क्या बोलते हैं, कैसे दिखते हैं, स्क्रीन पर कितना एक्टिव हैं और क्या सोचते हैं डिबेट के दौरान सबकुछ मायने रखता है. इसका अंदाजा इसी हिसाब से लगाया जा सकता है कि 1960 के चुनाव में जब जॉन एफ. कैनेडी और रिचर्ड निक्सन के बीच मुकाबला था, तब टीवी डिबेट में भरपूर मेकअप लगाकर आने, थका और बीमार दिखने के कारण निक्सन की रेटिंग्स में काफी गिरावट आई थी और वो अंत में चुनाव हार गए थे. 


 

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