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रूस ने नाकाम किया यूक्रेन का ड्रोन अटैक! क्रीमिया में मार गिराए दो UAV, अलर्ट पर एयर फोर्स

रूस और यूक्रेन के बीज जारी जंग कम होने का नाम नहीं ले रही है. अब रूस ने क्रीमिया पर ड्रोन अटैक का दावा किया है. रूसी अधिकारियों ने कहा है कि यूक्रेन के 3 ड्रोन ने क्रीमिया पर हमला किया, जिसे रूस की एयरफोर्स ने नाकाम कर दिया. इसमें से 2 ड्रोन मार गिराए गए, जबकि एक वापस चला गया.

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सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर

रूस-यूक्रेन के बीच जारी जंग के बीच रूस ने क्रीमिया पर यूक्रेन के ड्रोन अटैक को नाकाम करने का दावा किया है. रूसी अधिकारियों ने दो UAV मार गिराने का भी दावा किया है. हमले पर फिलहाल यूक्रेन की तरफ से कोई बयान नहीं आया है. रूस ने हमले वाले इलाके में रह रहे लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है.

रॉयटर्स के मुताबिक क्रिमिया के सेवस्तोपोल (Sevastopol) में नियुक्त रूसी गवर्नर मिखाइल रजवोजाहेव (Mikhail Razvozhayev) ने दावा किया कि मंगलवार को यूक्रेन की तरफ से उनके इलाके में दो बार ड्रोन हमला किया गया. यूक्रेन के अनमैंड एरियल व्हीकल (UAV) एक थर्मल पावर स्टेशन को निशाना बनाने की योजना बना रहे थे, लेकिन दोनों हमलों को रूस की एयर फोर्स ने नाकाम कर दिया. 

मिखाइल रजवोजाहेव ने टेलीग्राम पर कहा,'यूक्रेनी नाजियों ने फिर से बालाक्लावा (Balaklava) में हमारे थर्मल पावर स्टेशन पर हमला करने की कोशिश की. लेकिन हमारे बेड़े ने 3 UAV से किए गए हमलों को विफल कर दिया. इसमें से 2 ड्रोन मार गिराए गए, जबकि एक वापस जाने में कामयाब हो गया' उन्होंने आगे कहा कि सेवस्तोपोल शहर अब शांत है. लेकिन सभी सेनाएं अलर्ट मोड पर हैं.

बता दें कि इससे पहले भी रूस लगातार यूक्रेन पर समुद्री रास्ते से ड्रोन हमला करने का आरोप लगाता रहा है. इस साल अक्टूबर के अंत में रूस ने यूक्रे को अपने बंदरगाह पर हमले का दोषी ठहराया था. इस घटना के बाद ही रूस ने ब्लैक सी के रास्ते से होने वाले यूक्रेन के अनाज एक्सपोर्ट के लिए सहयोग करने से इनकार कर दिया था.

1954 में रूस ने तोहफे में दे दिया था क्रीमिया

- जब सोवियत संघ हुआ करता था, तब रूस और यूक्रेन दोनों ही इसका हिस्सा हुआ करते थे. 1954 में सोवियत संघ के तब के सर्वोच्च नेता निकिता ख्रुश्चेव ने यूक्रेन को एक तोहफे के तौर पर क्रीमिया को दे दिया था.

- 1991 में जब सोवियत संघ टूटा और यूक्रेन और रूस अलग-अलग हुए तो दोनों देशों के बीच क्रीमिया को लेकर झगड़ा शुरू हो गया. क्रिमिया को रूसी साम्राज्य ने 1783 में कैथरीन द ग्रेट के शासनकाल में मिलाया था. कैथरीन द ग्रेट रूसी साम्राज्य की महारानी थी.

रूस समर्थक राष्ट्रपति बनने से बदले हालात

- 1991 में यूक्रेन ने अपनी आजादी की घोषणा कर दी. मई 2002 ने यूक्रेन ने NATO में शामिल होने की प्रक्रिया शुरू कर दी. रूस इसका विरोध करता रहा.

- फरवरी 2010 के आम चुनाव में विक्टर यानुकोविच यूक्रेन के राष्ट्रपति बने. यानुकोविच रूस के समर्थक थे. नवंबर 2013 में यानुकोविच ने यूरोपियन यूनियन के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर करने से पीछे हट गए.

- इस समझौते से यूक्रेन को 15 अरब डॉलर की आर्थिक पैकेज मिलने वाला था. यानुकोविच के फैसले के विरोध में लोग सड़कों पर उतर आए.

- फरवरी 2014 में राजधानी कीव में दर्जनों प्रदर्शनकारी मारे गए. प्रदर्शन तेज हो गए. आखिरकार यानुकोविच को देश छोड़कर जाना पड़ा और विपक्ष सत्ता में आ गया.

फिर शुरू हुआ रूस का हमला

- यूक्रेन में यूरोपीय यूनियन के समर्थकों की सत्ता आने के बाद रूस ने क्रीमिया पर कब्जे के लिए हमला कर दिया. 27 फरवरी 2014 को रूसी बंदूकधारियों ने क्रीमिया में सरकारी इमारतों पर कब्जा कर लिया. अगले दिन क्रीमिया के दो हवाई अड्डे भी कब्जा लिए गए.

- क्रीमिया पर कब्जा करने वाले सैनिकों की वर्दी पर कोई बैज नहीं था. इसलिए उस समय शुरुआत में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ये मानने से इनकार कर दिया कि ये रूसी सैनिक हैं.

- 6 मार्च 2014 को क्रीमिया की संसद में जनमत संग्रह कराने पर सहमति बनी. 16 मार्च को क्रीमिया में जनमत संग्रह करवाया गया, जिसमें 97 फीसदी लोगों ने रूस में शामिल होने के पक्ष में वोट किया.

- इस जनमत संग्रह को अमेरिका और यूरोपीय देशों ने अवैध करार दिया था. हालांकि, रूस ने दलील दी कि वहां 60 फीसदी लोग रूसी हैं और वो खुद के लिए फैसले का हक रखती है.

- 18 मार्च 2014 को रूस ने क्रीमिया को औपचारिक तौर पर मिला लिया. उस समय पुतिन ने कहा कि यूक्रेन में चल रहे राजनीतिक संकट ने वहां रह रहे रूसी मूल के लोगों को तबाह कर दिया. पुतिन का कहना था कि क्रीमिया में रूसी हस्तक्षेप नहीं हुआ है और क्योंकि इतिहास में अब तक हस्तक्षेप बिना गोली चलाए और बिना किसी के हत्या के संभव नहीं हुआ है.

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