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पाक में तोड़ा गया सौ साल पुराना मंदिर, हिंदुओं में नाराजगी!

पाकिस्तान में कराची की एक अदालत में मामला लंबित होने के बावजूद एक बिल्डर द्वारा आनन-फानन में सौ साल पुराने मंदिर को ढहाने पर रविवार को अल्पसंख्यक हिंदुओं ने कड़ा विरोध जताया..

पाकिस्तान में कराची की एक अदालत में मामला लंबित होने के बावजूद एक बिल्डर द्वारा आनन-फानन में सौ साल पुराने मंदिर को ढहाने पर आज अल्पसंख्यक हिंदुओं ने कड़ा विरोध जताया.

एक पाक अखबार के अनुसार कराची के सोल्जियर बाजार में विभाजन से पहले के श्रीराम पीर मंदिर को ढहाने के अलावा बिल्डर ने कल समीप कई मकान तोड़ दिए. फलस्वरूप करीब 40 लोग बेघर हो गए जिनमें से ज्यादातर हिंदू हैं.

इस विध्वंस के बाद पाकिस्तान हिंदू काउंसिल ने रविवार दोपहर कराची में प्रेस क्लब के बाहर विरोध प्रदर्शन किया. उन्होंने बिल्डर द्वारा मंदिर और मकानों को तोड़े जाने तथा प्रशासन की ओर से कोई कार्रवाई नहीं किये जाने का विरोध किया.

गौरतलब है कि इस मंदिर ऐसे समय में ढ़हाया गया जब सिंध हाईकोट श्री राम पीर मंदिर को ढहाने पर स्थगन लगाने की मांग करने वाली याचिका पर सुनवाई कर रहा है. इस पर हिंदुओं की कड़ी प्रतिक्रिया देखने को मिली. प्रकाश नाम के एक नाराज व्यक्ति ने कहा, ‘उन्होंने हमारा मंदिर तोड़ दिया और हमारे देवी-देवताओं का अपमान किया.

पाक हिंदूओं ने बताया कि इस कार्रवाई के दौरान पूरे इलाके को पुलिस और अर्धसैनिक पाकिस्तान रेंजर्स ने घेर लिया था. किसी भी बाहरी व्यक्ति को इलाके में नहीं जाने दिया जा रहा था. जिन 40 लोगों के मकान तोड़ दिए गए, उनमें श्वेता नाम एक महिला भी है जिनके पति कराची से बाहर हैं. श्वेता ने कहा कि उन्होंने और उनके बच्चों ने खुले में रात गुजारी. मंदिर और मकान तोड़े जाने से नाराज हिंदुओं ने मांग की कि सरकार उनके लिए भारत जाने के टिकट का इंतजाम करे. एक महिला ने कहा, ‘यदि आपको हमारी जरूरत नहीं है तो हम भारत जायेंगे’.

हालांकि पुलिस अधिकारियों ने वहां मंदिर होने के बात पूरी तरह खारिज कर दी है. उन्होंने कहा कि उन्हें अतिक्रमण हटाने का आदेश था. पुलिस उपाधीक्षक परवेज इकबाल ने कहा, ‘‘वहां कोई मंदिर नहीं था. वहां मकानों में कुछ हिंदू देवी-देवताओं की प्रतिमाएं थीं लेकिन हमने यह सुनिश्चित किया कि वे सुरक्षित रहें.’

पुलिस उपाधीक्षक ने कहा कि लोगों को अपने घरों से सामान ले जाने के लिए पर्याप्त समय दिया गया था. उन्होंने कहा, ‘‘हमने उन्हें कोई चोट नहीं पहुंचाया. उल्टे, उन्होंने हमपर पथराव किया और थाना प्रभारी हुसैन शाह घायल हो गए.’

स्थानीय निवासी मलबे से मंदिर का नाम फलक निकालने में सफल रहे. मंदिर में रहने वाले महाराज बदरी ने इस बात से इनकार किया कि अतिक्रमण किया गया था. उन्होंने कहा, ‘हमारे पूर्वज आजादी से पहले से यहां रह रहे हैं. हम अतिक्रमण करने वाले लोग नहीं हैं.’

सैन्य भूमि और छावनी की निदेशक जीनत अहमद ने कहा कि मंदिर को छुआ तक नहीं गया.उन्होंने कहा कि यह अभियान अवैध अतिक्रमणकारियों के खिलाफ था और मंदिर एक पुरानी मंजूरी प्राप्त संपत्ति थी.

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